जमशेदपुर. जमशेदपुर के बिष्टुपुर स्थित ‘डबल डाउन’ (DD) बार के बाहर हुए सनसनीखेज हिमांशु सिंह हत्याकांड में जमशेदपुर पुलिस को बड़ी सफलता मिलने की बात कही जा रही है. मामले में नामजद आरोपी और डीडी बार के मालिक सह भाजपा नेता नीरज सिंह को उनके बार मैनेजर के साथ राजस्थान से गिरफ्तार करने की सूचना है. यह गिरफ्तारी पुलिस की तकनीकी सर्विलांस का नतीजा बतायी जा रही है.
खाटू श्याम मंदिर के पास धरे गए आरोपी
पुलिस के अनुसार वारदात के बाद से ही पुलिस की गिरफ्तारी से बचने के लिए नीरज सिंह और उनका बार मैनेजर लगातार अपनी लोकेशन बदल रहे थे. झारखंड पुलिस की विशेष जांच टीम (SIT) ने मोबाइल फोन रिकॉर्ड और तकनीकी खुफिया जानकारी के आधार पर उनकी लोकेशन राजस्थान के प्रसिद्ध खाटू श्याम मंदिर के पास ट्रेस किया.
इसके बाद झारखंड पुलिस ने तुरंत राजस्थान पुलिस को अलर्ट किया, जिसने घेराबंदी कर दोनों को धर दबोचा. अब पुलिस टीम उन्हें ट्रांजिट रिमांड पर जमशेदपुर ला रही है, जहां गहन पूछताछ में कई बड़े राज खुलने की उम्मीद है.
क्या था पूरा विवाद और ‘खूनी’ रात का सच?
यह खूनी खेल 27 जून 2026 की रात बिष्टुपुर के प्रसिद्ध डीडी बार एंड कैफे में शुरू हुआ था.
डांस फ्लोर पर विवाद : करणी सेना (युवा विंग) के नेता हिमांशु सिंह (24 वर्ष) और उनके दोस्त प्रत्युष आनंद बार में मौजूद थे. आरोप है कि डांस फ्लोर पर कुछ असामाजिक तत्वों द्वारा एक महिला के साथ की जा रही बदसलूकी का हिमांशु और प्रत्युष ने विरोध किया था.
बार से बाहर निकाला जाना : विवाद बढ़ने पर बार के बाउंसर्स और प्रबंधन ने दोनों पक्षों को समझाने या सुरक्षा पुख्ता करने के बजाय, उन्हें परिसर से बाहर सड़क पर धकेल दिया.
हथियारों से लैस होकर हमला : मुख्य आरोपी विश्वनाथ लोहरा उर्फ बोदरा ने फोन कर अपने गांव से धारदार हथियारों (चापड़ और टांगी) से लैस गुर्गों को बुला लिया. इसके बाद हिमांशु और प्रत्युष पर सरेआम बर्बरता से जानलेवा हमला किया गया.
पुलिस के सामने हुई वारदात : सबसे हैरान और आक्रोशित करने वाली बात यह रही कि यह हमला पेट्रोलिंग पार्टी (पुलिस गश्ती दल) की मौजूदगी में हुआ. हमलावर इतने बेखौफ थे कि उन्होंने पीड़ितों को पुलिस गाड़ी के पास से खींचकर बेरहमी से गोदा. इलाज के दौरान सोमवार को टाटा मेन हॉस्पिटल (TMH) में हिमांशु ने दम तोड़ दिया, जबकि प्रत्युष की हालत अब भी गंभीर बनी हुई है.
जनता का आक्रोश और पुलिस पर गिरी गाज
हिमांशु की मौत के बाद जमशेदपुर में भारी उबाल देखा गया. करणी सेना और स्थानीय लोगों ने पुलिस की संलिप्तता और लापरवाही के खिलाफ सड़कों पर उतरकर चक्का जाम किया. इस भारी दबाव के बाद प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया:
पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई: लापरवाही बरतने के आरोप में बिष्टुपुर थाना प्रभारी (SHO) आलोक दुबे समेत गश्ती दल के 3 पुलिसकर्मियों (एएसआई रतन कुमार दास, राजेश रंजन और कांस्टेबल मनोज कुमार) को तत्काल सस्पेंड कर दिया गया.
बार हुआ सील: जिला प्रशासन के आदेश पर आबकारी विभाग ने ‘डबल डाउन बार’ को तुरंत सील कर दिया और लाइसेंस नियमों के उल्लंघन की जांच शुरू की.
अब तक की गिरफ्तारियां: पुलिस इस मामले में अब तक सोनू राम सरदार, राज लोहार और तीन नाबालिगों (जुवेनाइल) समेत कई आरोपियों को दबोच चुकी है, जबकि मुख्य शूटर बोदरा पर ₹2 लाख का इनाम घोषित कर उसकी तलाश जारी है.
नीरज सिंह पर क्यों कसा शिकंजा?
नीरज सिंह के परिवार और समर्थकों का दावा था कि वे घटना के वक्त जमशेदपुर में मौजूद नहीं थे, और उन्होंने कोर्ट में अग्रिम जमानत की अर्जी भी दी थी. हालांकि, पुलिस का मानना है कि बार प्रबंधन की लापरवाही, अपराधियों को शह देने और विवाद की शुरुआत से लेकर मूकदर्शक बने रहने के पीछे गहरी साजिश हो सकती है.
नीरज सिंह और बार मैनेजर की गिरफ्तारी से अब यह साफ हो सकेगा कि नाइटलाइफ़ के नाम पर शहर में चल रहे इन बार और क्लबों में सुरक्षा के क्या पुख्ता इंतजाम थे और क्या इस हत्याकांड के पीछे कोई पुरानी रंजिश या बड़ी राजनीतिक शह थी. पीड़ित परिवार को अब न्याय की उम्मीद जगी है.
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