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Home » राम मंदिर : दो माह एकांतवास से बाहर आये चंपत राय, बोले – “अंतिम सांस तक नहीं छोड़ूंगा अयोध्या”
देश/दुनिया

राम मंदिर : दो माह एकांतवास से बाहर आये चंपत राय, बोले – “अंतिम सांस तक नहीं छोड़ूंगा अयोध्या”

Ocean News DeskBy Ocean News DeskAugust 5, 2026
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अयोध्या. श्री रामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में चढ़ावा चोरी (चंदा विवाद) का मामला तूल पकड़ने के बाद से सार्वजनिक गतिविधियों से दूर रहे ट्रस्ट के निवर्तमान महासचिव चंपत राय करीब दो महीने बाद एकांतवास से बाहर आए हैं. चंपत राय ने अयोध्या के प्रमुख संतों से मुलाकात की और स्पष्ट शब्दों में संकल्प व्यक्त किया कि वह अपनी अंतिम सांस तक भगवान राम की नगरी अयोध्या को छोड़कर कहीं नहीं जाएंगे.

एकांतवास के बाद संतों से संवाद

चढ़ावा चोरी के आरोपों और उसके बाद खड़े हुए विवाद के बीच चंपत राय ने सार्वजनिक जीवन से दूरी बना ली थी. हालांकि, करीब दो महीने बाद उन्होंने पुनः संतों से संवाद शुरू किया है. इसी क्रम में वे रामघाट स्थित आश्रम तपस्वी छावनी पहुंचे, जहां उन्होंने जगद्गुरु परमहंस आचार्य से बंद कमरे में विस्तृत बातचीत की. परमहंस आचार्य ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया और उन्हें बेदाग बताते हुए अपना समर्थन दिया.

“उदारता की कीमत चुकानी पड़ी”: परमहंस आचार्य

मुलाकात के बाद जगद्गुरु परमहंस आचार्य ने संवाददाताओं से बातचीत में कहा कि चंपत राय पूरी तरह से निर्दोष हैं. उन्होंने कहा कि कुछ लोगों पर अत्यधिक विश्वास करने की उनकी उदारता के कारण उन्हें ट्रस्ट के महासचिव पद से त्यागपत्र देना पड़ा. परमहंस आचार्य ने ही चंपत राय से अयोध्या न छोड़ने का विशेष आग्रह किया था, जिस पर चंपत राय ने आश्वासन दिया कि वे जीवन के अंतिम क्षण तक अयोध्या में ही रहेंगे.

क्या है अयोध्या का राम मंदिर चंदा और चढ़ावा विवाद?

राम मंदिर निर्माण और चढ़ावे के प्रबंधन को लेकर पिछले कुछ समय से गंभीर सवाल उठ रहे हैं:

  • बजट और खर्च में भारी अंतर: मंदिर निर्माण के लिए प्रारंभिक अनुमानित लागत ₹800 करोड़ रखी गई थी, लेकिन एसआईटी (SIT) को सौंपी गई रिपोर्ट और सबूतों के अनुसार निर्माण कार्य पर खर्च ₹2,200 करोड़ तक पहुंच गया.
  • बिजली बिल और अन्य अनियमितताएं: जांच में सामने आया कि राम कछारी मंदिर ट्रस्ट का मासिक बिजली बिल औसतन ₹15,000 आता था, जबकि ट्रस्ट की ओर से केवल ₹7,000 का ही भुगतान किया जाता था.
  • भोग शुद्धता प्रमाणपत्र अटका: चढ़ावा चोरी के आरोपों और जारी जांच के कारण रामलला के भोग को मिलने वाला शुद्धता प्रमाणपत्र भी अधर में लटक गया है.

एसआईटी (SIT) की जांच और 200 लोगों को नोटिस

मामले की गंभीरता को देखते हुए एक नई विशेष जांच टीम (SIT) का गठन किया गया है. एसआईटी ने राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले की निगरानी में सघन जांच शुरू कर दी है. अब तक वित्तीय गबन और प्रबंधन में ढिलाई के आरोपों के सिलसिले में 200 से अधिक लोगों को पूछताछ के लिए नोटिस जारी किए जा चुके हैं.

वर्तमान स्थिति और भक्तों के लिए राहत

एक तरफ जहां एसआईटी वित्तीय अनियमितताओं की तह तक पहुंचने में जुटी है, वहीं दूसरी ओर अयोध्या में श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए व्यवस्थाओं को बेहतर बनाया जा रहा है. हाल ही में रामलला के दर्शनार्थियों के लिए पास व्यवस्था खत्म कर दी गई है, जिससे भक्त अब निर्बाध रूप से राम दरबार के दर्शन कर पा रहे हैं.

चंपत राय का एकांतवास तोड़ना और संतों का उनके पक्ष में आना इस बात का संकेत है कि अयोध्या के धार्मिक नेतृत्व का एक वर्ग अभी भी उनके साथ खड़ा है, जबकि जांच एजेंसियां चंदा विवाद की निष्पक्ष जांच में लगी हुई हैं.

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