रांची. केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) की रांची स्थित भ्रष्टाचार निरोधक शाखा (एसीबी) ने एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम देते हुए केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) के तीन अधिकारियों को 48,400 रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया है. यह कार्रवाई रांची के डोरंडा स्थित रीजनल पे एंड अकाउंट्स कार्यालय में की गई.
गिरफ्तार किए गए अधिकारियों में सीआईएसएफ के सीनियर अकाउंट अधिकारी संतोष कुमार महतो, सहायक अकाउंट अधिकारी सुनील कुमार और सहायक अकाउंट अधिकारी सुजीत कुमार सिंह शामिल हैं. इस मामले के सामने आने के बाद प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मच गया है और जांच का दायरा लगातार बढ़ाया जा रहा है.
क्या है पूरा मामला
मिली जानकारी के अनुसार, इस पूरे मामले में शिकायतकर्ता सीआईएसएफ का ही एक सिपाही है. सिपाही के यात्रा भत्ता (टीए) और बच्चों के शैक्षणिक भत्ता के बिलों को प्रोसेस करने तथा उनके भुगतान की एवज में इन अधिकारियों द्वारा रिश्वत की मांग की गई थी. तंग आकर पीड़ित सिपाही ने इसकी शिकायत सीबीआई से कर दी.
शिकायत मिलने के बाद सीबीआई की टीम ने सबसे पहले इस सूचना का सत्यापन किया और इसके बाद भ्रष्टाचार निरोधक शाखा में औपचारिक रूप से प्राथमिकी दर्ज की गई. प्राथमिकी दर्ज करने के बाद सीबीआई ने एक सुनियोजित योजना के तहत सीआईएसएफ के डोरंडा स्थित कार्यालय में जाल बिछाया. जैसे ही तीनों अधिकारी रिश्वत की रकम ले रहे थे, सीबीआई ने उन्हें मौके पर ही दबोच लिया.
पांच ठिकानों पर छापेमारी और नकदी बरामद
गिरफ्तारी के बाद सीबीआई ने आरोपियों की निशानदेही पर रांची और धनबाद में कुल पांच ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की. देर रात तक चली इस तलाशी अभियान के दौरान अधिकारियों के ठिकानों से 10 से 12 लाख रुपये नकद, भारी मात्रा में जेवरात, जमीन के कागजात और बैंक लॉकर से जुड़े दस्तावेज बरामद किए गए हैं. सीबीआई इन सभी संपत्तियों और दस्तावेजों का बारीकी से सत्यापन कर रही है.
अन्य अधिकारियों या कर्मचारियों से भी होगी पूछताछ
सीबीआई सूत्रों के मुताबिक, इस रिश्वत कांड में सीआईएसएफ के अन्य अधिकारियों या कर्मचारियों के भी शामिल होने की आशंका जताई जा रही है. जांच एजेंसी अब गिरफ्तार आरोपियों के सहयोगियों के बारे में भी महत्वपूर्ण जानकारियां जुटा रही है.
पकड़े गए तीनों आरोपियों को शुक्रवार को रांची स्थित सीबीआई की विशेष अदालत में पेश किया जाएगा. अदालत में पेश करने के बाद सीबीआई आरोपियों की रिमांड की मांग कर सकती है ताकि इस भ्रष्टाचार नेटवर्क की गहराई से पड़ताल की जा सके. जांच पूरी होने के बाद इस मामले में कई और बड़े खुलासे होने की उम्मीद है.





