कोलकाता/रामपुरहाट. पश्चिम बंगाल विधानसभा के पूर्व डिप्टी स्पीकर और तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता आशीष बनर्जी की रविवार सुबह संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई. बीरभूम जिले के रामपुरहाट स्थित पार्टी कार्यालय में उनका शव फंदे से लटकता हुआ मिला.
घटना के सामने आते ही राजनीतिक गलियारों में हड़कंप मच गया. पुलिस ने मौके से एक पन्ने का सुसाइड नोट और मोबाइल फोन बरामद किया है. मामले की गंभीरता को देखते हुए पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने तुरंत संज्ञान लिया और उच्चस्तरीय जांच के आदेश दिए हैं.
मुख्यमंत्री ने परिवार को बंधाया ढांढस
मुख्यमंत्री ने रविवार दोपहर रामपुरहाट विधायक और दिवंगत नेता के परिवार से वीडियो कॉल के जरिए सीधी बात की. अपनी संवेदना व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि आशीष बनर्जी एक शिक्षित, ईमानदार और भद्र राजनीतिज्ञ थे. उनके साथ व्यक्तिगत और राजनीतिक तौर पर पुराने व मजबूत संबंध रहे हैं. उन्होंने पीड़ित परिवार को पूरा न्याय दिलाने का आश्वासन दिया.
साजिश की आशंका और जांच के सख्त निर्देश
सचिवालय में मीडिया से बातचीत करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, “यह जांच का विषय है कि क्या पार्टी के कुछ भ्रष्ट तत्वों ने उन्हें किसी तरह की धमकी दी थी या प्रताड़ित किया था. अगर किसी ने उन्हें डराया-धमकाया है, तो उसकी गहराई से पड़ताल की जाएगी.”
- पुलिस प्रशासन को दिए गए मुख्य निर्देश:
- सुसाइड नोट की फॉरेंसिक जांच: बरामद हस्तलिखित पत्र की लिखावट का आशीष बनर्जी के मूल दस्तावेजों से मिलान कराया जाएगा.
- सीडीआर और कॉल डिटेल्स: उनके मोबाइल फोन को फॉरेंसिक टीम को सौंपा गया है ताकि अंतिम समय में संपर्क में आए लोगों और कॉल्स का ब्योरा निकाला जा सके.
- संदिग्ध भूमिका की जांच: सुसाइड नोट में आत्मसम्मान को ठेस पहुंचने और राजनीति में आने को भूल बताने जैसी बातों की हर पहलू से जांच होगी.
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि जांच में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और आवश्यकता पड़ने पर वह स्वयं बीरभूम जाकर शोकाकुल परिवार से मुलाकात करेंगे.


