नई दिल्ली: भारतीय युवा कांग्रेस (IYC) ने अनुशासनहीनता और राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में आयोजित विपक्षी ‘इंडी’ गठबंधन की रैली में अनुपस्थित रहने के खिलाफ एक बड़ा और कड़ा कदम उठाया है। पार्टी ने देश के विभिन्न राज्यों में राहुल गांधी की इस अहम रैली में शामिल न होने वाले 200 से ज्यादा पदाधिकारियों और सदस्यों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। संगठन के सूत्रों के अनुसार, यह अनुशासनात्मक समीक्षा अभी जारी है और आने वाले दिनों में यह आंकड़ा बढ़कर 500 तक पहुंच सकता है।
विभिन्न राज्यों में की गई कार्रवाई
राष्ट्रीय नेतृत्व द्वारा की गई इस कार्रवाई का सबसे ज्यादा असर मध्य प्रदेश पर देखा गया है, जहां अकेले 60 सदस्यों को निलंबित किया गया है। इसके अलावा, गुजरात में 49 और पश्चिम बंगाल में 26 नेताओं पर गाज गिरी है। अन्य प्रभावित राज्यों में तेलंगाना (14), मध्य उत्तर प्रदेश (13), कांग्रेस शासित हिमाचल प्रदेश (13) और हरियाणा (10) शामिल हैं। पार्टी सूत्रों का कहना है कि यह कार्रवाई उन कार्यकर्ताओं के खिलाफ की गई है जिन्हें रैली में अनिवार्य रूप से उपस्थित रहने के निर्देश दिए गए थे।
निलंबित नेताओं का फूटा गुस्सा, संगठन पर मनमानी का आरोप
इस अचानक हुई कार्रवाई से कांग्रेस के भीतर भारी असंतोष और हैरानी का माहौल है। कई वरिष्ठ और लंबे समय से सक्रिय पदाधिकारियों ने बिना उनका पक्ष सुने इस तरह की त्वरित कार्रवाई पर तीखी आपत्ति जताई है।
मध्य प्रदेश युवा कांग्रेस के महासचिव रोहित राजोरिया ने इस निलंबन को पूरी तरह अनुचित बताया है। उन्होंने अपना दर्द बयां करते हुए कहा कि उन्होंने पार्टी के लिए 15 साल तक निष्ठा से काम किया है। इस दौरान उन पर 15 एफआईआर दर्ज हुईं और वे पार्टी के संघर्षों के चलते कई बार जेल भी गए। राजोरिया ने अपना पक्ष रखते हुए एक कार्ड साझा किया, जिसमें उनके दिवंगत चाचा की तेरहवीं (शोक कार्यक्रम) का जिक्र था।
उन्होंने दावा किया कि उन्होंने पहले ही पार्टी नेतृत्व को अपने पारिवारिक शोक और इस मजबूरी की जानकारी दे दी थी कि वे 1 नवंबर को रामलीला मैदान में होने वाली रैली में शामिल नहीं हो पाएंगे। इसके बावजूद उन्हें बिना किसी पूर्व नोटिस के पद से हटा दिया गया। उन्होंने सवाल उठाया कि इस तरह के तानाशाही रवैये से पार्टी कैसे आगे बढ़ सकती है और सत्ता में लौटने की उम्मीद कर सकती है।
राजनीतिक गलियारों में गरमाया मुद्दा
इस देशव्यापी कार्रवाई ने विपक्षी खेमे और राजनीतिक विश्लेषकों का ध्यान खींच लिया है। एक तरफ जहां युवा कांग्रेस का केंद्रीय नेतृत्व संगठन में अनुशासन और एकजुटता बनाए रखने के लिए इस कदम को जरूरी बता रहा है, वहीं दूसरी तरफ जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं में पनप रहा यह रोष पार्टी के लिए एक नई आंतरिक चुनौती बन सकता है।
विपक्षी दलों के नेता भी इस घटनाक्रम पर अपनी पैनी नजर बनाए हुए हैं, क्योंकि लोकसभा चुनावों और आगामी राजनीतिक रणनीतियों के लिहाज से युवा संगठन की यह खींचतान पार्टी के लिए नुकसानदेह साबित हो सकती है। फिलहाल, निलंबित नेताओं द्वारा केंद्रीय संगठन के समक्ष अपनी शिकायत दर्ज कराने की तैयारी की जा रही है, जिससे आने वाले दिनों में यह विवाद और अधिक तूल पकड़ सकता है।


