भारतीय स्टेट बैंक (SBI) ने अपने ग्राहकों को एक बड़ा झटका देते हुए होम लोन की ब्याज दरों में बढ़ोतरी का ऐलान किया है. रेपो रेट से जुड़े लोन पर बैंक ने 25 बेसिस पॉइंट (0.25%) की बढ़ोतरी कर दी है, जो कि 15 अक्टूबर से प्रभावी हो चुकी है. इस ताजा इजाफे के बाद देश भर के लाखों होम लोन ग्राहकों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ना तय है.
क्या हुआ है बदलाव?
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा रेपो रेट में बदलाव किए जाने के बाद, बैंकों ने भी अपनी ऋण दरों को इसके अनुरूप समायोजित करना शुरू कर दिया है. इसी क्रम में एसबीआई ने अपने रेपो रेट-लिंक्ड होम लोन (RLLR) की ब्याज दरों में 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी की है.
- ब्याज दरें बढ़ने का सीधा असर मौजूदा और नए दोनों तरह के कर्जधारकों पर पड़ेगा. जब बैंक होम लोन की ब्याज दर बढ़ाते हैं, तो ग्राहकों के सामने आम तौर पर दो रास्ते बचते हैं:
- मासिक किस्त (EMI) में बढ़ोतरी: ग्राहक अपनी मंथली ईएमआई की राशि बढ़ा सकते हैं, जिससे लोन तय समय पर ही खत्म हो जाता है.
- लोन की अवधि (Tenure) का बढ़ना: यदि ग्राहक ईएमआई की राशि नहीं बढ़ाना चाहते हैं, तो बैंक लोन चुकाने की कुल अवधि को बढ़ा देते हैं, जिससे ग्राहकों को लंबे समय तक ब्याज चुकाना पड़ता है.
ग्राहकों पर वित्तीय असर
होम लोन लंबी अवधि के वित्तीय कमिटमेंट होते हैं. ऐसे में 25 बेसिस पॉइंट की यह बढ़ोतरी सुनने में भले ही छोटी लगे, लेकिन लाखों रुपये के कर्ज पर यह लंबी अवधि में हजारों-लाखों रुपये का अतिरिक्त ब्याज साबित हो सकती है. जिन ग्राहकों ने हाल ही में बड़ा होम लोन लिया है, उनकी मासिक बजट प्लानिंग पर इसका सीधा असर देखने को मिलेगा.
एसबीआई के बाद अन्य बैंकों पर नजर
वित्तीय जानकारों का मानना है कि ऐसे समय में जब ब्याज दरें बढ़ रही हैं, ग्राहकों को अपने बजट की नए सिरे से समीक्षा करनी चाहिए. यदि संभव हो, तो ग्राहकों को प्री-पेमेंट (समय से पहले आंशिक भुगतान) का विकल्प चुनना चाहिए ताकि मूलधन कम हो सके और कुल ब्याज के बोझ को कुछ हद तक नियंत्रित किया जा सके.
एसबीआई के इस कदम के बाद अन्य बड़े सरकारी और निजी बैंकों द्वारा भी लोन दरों में इसी तरह के बदलाव किए जाने की संभावना जताई जा रही है, जिससे आने वाले दिनों में होम लोन लेना और महंगा हो सकता है.


