New Delhi.ने कहा है कि एक निर्वाचित प्रतिनिधि की यह विशेष जिम्मेदारी है कि वह कानून के शासन को बनाए रखे और ऐसा आचरण करे, जिससे संस्थाओं में जनता का भरोसा मजबूत हो। शीर्ष अदालत ने निर्वाचित पदों पर बैठे लोगों की ओर से देश में चिकित्सकों और अन्य कर्मियों पर हमलों की बढ़ती घटनाओं को लेकर नाखुशी भी जाहिर की।
न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने यह टिप्पणी 28 सितंबर को महाराष्ट्र के ठाणे जिले में नगर निकाय के एक अस्पताल में चिकित्सकों के साथ मारपीट और गाली-गलौज के आरोपी शिवसेना निगम पार्षद रमेश म्हात्रे और तीन अन्य आरोपियों की जमानत रद्द करते हुए की।
पीठ ने कहा कि ऐसी घटनाओं का सामाजिक शांति और सौहार्द पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है तथा इनसे सार्वजनिक व्यवस्था भी बाधित होती है। उसने कहा,हमें यह ध्यान रखना चाहिए कि इस घटना को उस बड़ी चिंता से अलग करके नहीं देखा जा सकता, जो तब पैदा होती है, जब निर्वाचित प्रतिनिधि नागरिकों या सरकारी अधिकारियों के साथ पेश आते समय बल प्रयोग, डराने-धमकाने या कानून से हटकर दूसरे तरीकों का इस्तेमाल करते हैं। देश के अलग-अलग हिस्सों से ऐसे आचरण के कई मामले सामने आए हैं।


