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Home » चंद्रशेखरन की पुनर्नियुक्ति को बोर्ड की मंजूरी के बाद Tata Sons ने समर्थन में और Tata Trust ने विरोध में जारी किया बयान, जानें किसने क्या कहा?
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चंद्रशेखरन की पुनर्नियुक्ति को बोर्ड की मंजूरी के बाद Tata Sons ने समर्थन में और Tata Trust ने विरोध में जारी किया बयान, जानें किसने क्या कहा?

Ocean News DeskBy Ocean News DeskSeptember 18, 2026
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Mumbai. टाटा संस के निदेशक मंडल ने बृहस्पतिवार को एन. चंद्रशेखरन को कार्यकारी चेयरमैन के रूप में एक और कार्यकाल के लिए पुनर्नियुक्त करने को मंजूरी देने के साथ कंपनी को शेयर बाजार में सूचीबद्ध करने की दिशा में कदम उठाने का भी फैसला किया। हालांकि, टाटा संस में निर्णायक हिस्सेदारी रखने वाले टाटा ट्रस्ट ने चंद्रशेखरन की पुनर्नियुक्ति के प्रस्ताव पर आपत्ति जताते हुए मतदान को ‘अमान्य’ करार दिया। निदेशक मंडल की करीब तीन घंटे चली बैठक के बाद दोनों पक्षों की ओर से अलग-अलग बयान जारी किए गए। चंद्रशेखरन की पुनर्नियुक्ति के प्रस्ताव पर मतदान को लेकर भी मतभेद सामने आया। टाटा ट्रस्ट ने पूर्व प्रधान न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ की कानूनी राय का हवाला देते हुए कहा कि यह मतदान कानूनी रूप से अमान्य था।
चंद्रशेखरन ने पिछले महीने कहा था कि वह 20 फरवरी, 2027 को मौजूदा कार्यकाल समाप्त होने के बाद एक और कार्यकाल नहीं चाहते हैं। बोर्ड में उनके कार्यकाल के विस्तार पर सर्वसम्मति नहीं बन पाने के बाद यह बयान आया था। हालांकि, भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) द्वारा टाटा संस के शेयर बाजार में सूचीबद्ध होने से बचने के प्रयास को खारिज कर दिए जाने के बाद पूरा घटनाक्रम बदल गया।

टाटा संस ने बयान में कहा कि चंद्रशेखरन ने ‘बोर्ड के अनुरोध पर अपने फैसले पर पुनर्विचार करने पर सहमति जताई’ और इसके बाद निदेशक मंडल ने बहुमत से उन्हें पांच साल के एक और कार्यकाल के लिए कार्यकारी चेयरमैन नियुक्त करने का फैसला किया। चार निदेशकों ने प्रस्ताव के पक्ष में मतदान किया, जबकि टाटा ट्रस्ट के चेयरमैन नोएल टाटा ने इसके खिलाफ मतदान किया।

बोर्ड ने कहा कि वह आरबीआई के लागू दिशानिर्देशों के अनुपालन के लिए कदम उठाएगा और इस संबंध में नियामक तथा टाटा ट्रस्ट के साथ विचार-विमर्श करेगा। टाटा संस में संबद्ध ट्रस्टों के साथ करीब 66 प्रतिशत हिस्सेदारी रखने वाले टाटा ट्रस्ट ने बोर्ड के फैसले को खारिज करते हुए कहा कि चंद्रशेखरन का पद छोड़ने का मौलिक निर्णय ‘विधिवत स्वीकार किया जा चुका था और अंतिम हो चुका था’। ट्रस्ट ने कहा कि उसने टाटा संस को उत्तराधिकारी चुनने के लिए चयन समिति के गठन का निर्देश भी दे दिया था।

ट्रस्ट ने कंपनी के नियमों का हवाला देते हुए कहा कि चेयरमैन की नियुक्ति से संबंधित प्रस्ताव के लिए ट्रस्ट द्वारा नामित दोनों निदेशकों का पक्ष में मतदान करना जरूरी है। चूंकि नोएल टाटा ने प्रस्ताव का विरोध किया, इसलिए मतदान ‘कानूनी रूप से अमान्य और आधारहीन’ हो जाता है। टाटा ट्रस्ट ने कहा कि नोएल टाटा ने पूर्व प्रधान न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ की कानूनी राय भी बोर्ड के समक्ष रखी, लेकिन बोर्ड ने उस पर ध्यान नहीं दिया।

नोएल टाटा ने निदेशकों को दिए एक स्पष्ट बयान में कहा कि पुनर्नियुक्ति के प्रस्ताव के जरिये बोर्ड से एक साथ तीन चीजों को दरकिनार करने को कहा गया। इनमें चेयरमैन का खुद पद छोड़ने का फैसला, बहुलांश शेयरधारक द्वारा उस फैसले की स्वीकृति और उत्तराधिकारी के चयन की प्रक्रिया का शुरू होना शामिल है। उन्होंने कहा कि एक आम बैठक में कोरम पूरा नहीं होने के कारण कार्यवाही आगे नहीं बढ़ सकी और ऐसे में निदेशक के रूप में उनकी अपनी स्थिति ‘फिलहाल अनिश्चित’ है। उन्होंने कहा कि इस स्थिति में संपन्न कोई भी मतदान किसी भी शेयरधारक द्वारा गंभीर कानूनी चुनौती के लिए खुला रहेगा।

नोएल टाटा ने निदेशकों से उत्तराधिकार विवाद को आरबीआई के समक्ष सूचीबद्धता के विवाद से नहीं जोड़ने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि किसी नियामकीय घटनाक्रम से उत्तराधिकार प्रक्रिया का परिणाम तय होना कंपनी के हित में नहीं होगा। टाटा ट्रस्ट ने सूचीबद्धता के मुद्दे पर जारी अलग बयान में कहा कि पंजीकरण रद्द करने के आवेदन को खारिज करने वाले आरबीआई के 11 सितंबर के पत्र पर इस बैठक में चर्चा हुई। ट्रस्ट के मुताबिक, बोर्ड ने ‘केवल सूचीबद्धता ही नहीं, बल्कि सभी उपलब्ध विकल्पों’ की तत्काल आधार पर गहन समीक्षा और मूल्यांकन करने पर सहमति जताई है। समीक्षा पूरी होने के बाद इस मुद्दे पर अलग बोर्ड बैठक होगी।

ट्रस्ट ने कहा कि टाटा संस के बोर्ड ने मार्च, 2024 में दिवंगत रतन टाटा के मार्गदर्शन में कंपनी को सूचीबद्ध नहीं करने का सर्वसम्मत फैसला किया था। सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट और सर रतन टाटा ट्रस्ट ने जुलाई, 2025 में भी इस संबंध में अलग-अलग सर्वसम्मत प्रस्ताव पारित किए थे। ट्रस्ट ने कहा कि उसका रुख ‘लगातार एक जैसा और अपरिवर्तित’ रहा है।

Following the board's approval of Chandrasekaran's reappointment Tata Sons issued a statement in support while Tata Trusts issued one in opposition; find out what each said.
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