चक्रधरपुर. दक्षिण पूर्व रेलवे (SER) का सबसे प्रमुख और कमाऊ चक्रधरपुर (CKP) रेलमंडल इस समय गंभीर प्रशासनिक लापरवाही और भ्रष्टाचार के आरोपों से घिर गया है. जोनल मुख्यालय और रेल भवन के दावों के विपरीत, चक्रधरपुर मंडल के वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक (Senior DCM) कार्यालय से अति-गोपनीय दस्तावेज, टेंडर फाइलें और सूचना का अधिकार (RTI) के तहत आए आवेदनों का डेटा अनधिकृत लोगों व ठेकेदारों तक पहुंचाया जा रहा है.
आवेदकों की पहचान उजागर कर दबाया जा रहा भ्रष्टाचार
नियमानुसार RTI आवेदकों की व्यक्तिगत जानकारी गोपनीय रखी जानी चाहिए. लेकिन सीनियर DCM कार्यालय में आवेदन पहुंचते ही आवेदक का नाम, पता और मोबाइल नंबर बिचौलियों और संबंधित ठेकेदारों को दे दिया जाता है. इसके बाद आवेदकों को डराने-धमकाने और सौदेबाजी का सिलसिला शुरू हो जाता है. यह पूरा खेल इसलिए रचा जा रहा है ताकि RTI के जरिए दफ्तर में वर्षों से चल रहे वित्तीय भ्रष्टाचार और टेंडर सिंडिकेट का पर्दाफाश न हो सके.
अफसरों की शह पर 4 साल वाली ट्रांसफर नीति की अनदेखी
यह पूरा नेटवर्क उच्च अधिकारियों के संरक्षण में चलने की बात सामने आ रही है. रेलवे बोर्ड के स्पष्ट नियम हैं कि संवेदनशील पदों (Sensitive Posts) पर कार्यरत कर्मियों का हर 4 साल में अनिवार्य तबादला होना चाहिए. इसके बावजूद चक्रधरपुर के वाणिज्य विभाग में कई चहेते कर्मचारी नियमों को ताक पर रखकर सालों से एक ही टेबल और सेक्शन में जमे हुए हैं. (खुलासा जल्द)
उच्चस्तरीय जांच और कार्रवाई की मांग
प्रशासनिक पारदर्शिता और कानून की रक्षा के लिए चक्रधरपुर DRM, विजिलेंस विभाग और दक्षिण पूर्व रेलवे मुख्यालय को तत्काल इस मामले की निष्पक्ष जांच करवानी चाहिए. यदि टेंडर और गोपनीय सेक्शन के सिंडिकेट पर सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो यह मामला आने वाले दिनों में अदालत और केंद्रीय सतर्कता आयोग (CVC) तक पहुंच सकता है.



