जमशेदपुर. जमशेदपुर और सरायकेला-खरसावां की संयुक्त पुलिस टीम ने युवा होटल व्यवसायी निखार सबलोक हत्याकांड का खुलासा कर शहर के उन तथाकथित संभ्रांत चेहरों से नकाब खींच लिया है, जो सूट-बूट और मीडिया की आड़ में अपराध का साम्राज्य चला रहे थे. गत 24 अगस्त को चांडिल के आसनबनी स्थित 10th Mile होटल में दिनदहाड़े हुई इस सनसनीखेज वारदात ने यह साबित कर दिया है कि खून खराबे की यह पटकथा अंधेरी गलियों में नहीं, बल्कि वातानुकूलित कमरों में रची गई थी.
सफेदपोश चेहरे के पीछे छिपा कुख्यात षड्यंत्रकारी
इस हाई-प्रोफाइल मर्डर मिस्ट्री के केंद्र में पुलिस के हाथ जो सबसे बड़ा नाम लगा है, वह है अशोक कुमार सिंह उर्फ राघव. खुद को एक मीडिया संस्थान ‘न्यूज-26’ का एमडी और अंग्रेजी अखबार का सीईओ बताने वाला यह शख्स समाज में इज्जतदार होने का ढोंग रचता था, लेकिन पर्दे के पीछे से खून का खेल खेल रहा था. पुलिस की एसआईटी (SIT) ने गहन तकनीकी और वैज्ञानिक तफ्तीश के बाद इस मास्टरमाइंड समेत कुल छह आरोपियों को धर दबोचा है.
गिरफ्तार किए गए अन्य आरोपियों में मानगो के सुनील रजक और रितेश सिंह, सोनारी के सुशील केराई के अलावा उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर के रहने वाले राज कुमार सिंह उर्फ प्रिंस और अंकित सिंह शामिल हैं. पुलिस ने इनके पास से वारदात में इस्तेमाल की गई लाल रंग की Hyundai i10 कार, दो देशी पिस्टल, सात जिंदा कारतूस और छह मोबाइल फोन बरामद किए हैं.
ज़मीन का धंधा और 15 लाख की सुपारी का खेल
जांच में यह बात सामने आई है कि इस खौफनाक वारदात के पीछे ज़मीन का कारोबार और वर्चस्व की वर्चस्व की जंग मुख्य वजह थी. मृतक निखार सबलोक खुद भी ज़मीन के कारोबार से जुड़ा हुआ था. शुरुआती खुलासों के मुताबिक, इस हत्या को अंजाम देने के लिए 15 लाख रुपये की सुपारी तय की गई थी, हालांकि पैसों के लेनदेन के तमाम पहलुओं पर अभी पुलिस की तफ्तीश जारी है.
एसएसपी डॉ. एहतेशाम वकारिब और सरायकेला एसपी मनोज स्वर्गीयारी द्वारा साझा की गई जानकारी के अनुसार, सुनील इस साजिश में चालक की भूमिका में था, जबकि रितेश सिंह लगातार निखार की रेकी कर रहा था और उसकी हर गतिविधि की सटीक सूचना शूटरों तक पहुंचा रहा था. वारदात को अंजाम देने के बाद बदमाश रांची की ओर भागे थे, जहां पुलिस ने मुस्तैदी दिखाते हुए उनकी गाड़ी को दबोच लिया. इसके अलावा, पुलिस की टीमें बनारस और मध्य प्रदेश में भी दबिश दे रही हैं ताकि इस नेटवर्क के अन्य गुर्गों को भी जल्द शिकंजे में लिया जा सके.
अपराध का लंबा और काला इतिहास
पकड़े गए आरोपियों का आपराधिक कच्चा-चिट्ठा यह बताने के लिए काफी है कि यह कोई अचानक उपजा विवाद नहीं, बल्कि शातिर अपराधियों का एक सुनियोजित गठजोड़ था:
- अशोक कुमार सिंह उर्फ राघव: बिष्टुपुर थाना कांड संख्या 102/2026 समेत गंभीर धाराओं में नामजद.
- सुशील केराई: सोनारी थाने में 2014 से 2025 के बीच एनडीपीएस एक्ट, आर्म्स एक्ट, हत्या के प्रयास और आपराधिक षड्यंत्र के सात से अधिक गंभीर मामले दर्ज.
- सुनील रजक और रितेश सिंह: मानगो व ओलिडीह थानों में आर्म्स एक्ट, मारपीट और हत्या के प्रयास के कई मुकदमे दर्ज.
- अंकित सिंह: उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर के विभिन्न थानों में हत्या और आर्म्स एक्ट के संगीन मामलों का आरोपी.
संपत्ति की जांच और गैंगवार के एंगल पर पैनी नजर
पुलिस अब इस बात की भी गहराई से पड़ताल कर रही है कि क्या इस हत्याकांड के तार झारखंड के कुख्यात गैंगस्टर गिरोहों (जैसे गणेश सिंह और अखिलेश सिंह) से जुड़े हैं. पुलिस अधिकारियों ने दो टूक स्पष्ट कर दिया है कि अपराध में संलिप्त चाहे कोई भी सफेदपोश क्यों न हो, उसकी चल और अचल संपत्तियों की विधिवत जांच की जाएगी और कानून का शिकंजा कसैला होगा. इस खुलासे ने एक बार फिर शहर के उन रसूखदार चेहरों को बेनकाब कर दिया है जो अपनी साख की आड़ में काले कारोबार की इबारत लिखते हैं.




