प्रधान न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत को मुख्य अतिथि बनाए जाने को लेकर उठे विवाद के बीच नेशनल लॉ स्कूल ऑफ इंडिया यूनिवर्सिटी (NLSIU), बेंगलुरु ने 12 सितंबर को होने वाले अपने दीक्षांत समारोह को रद्द कर दिया है. यूनिवर्सिटी प्रशासन द्वारा जारी नोटिस में हालांकि छात्रों और पूर्व छात्रों के विरोध का सीधा उल्लेख नहीं किया गया है, लेकिन पिछले एक महीने के भीतर यह चौथा ऐसा अवसर है जब किसी प्रमुख शिक्षण संस्थान में CJI की मौजूदगी पर विवाद के बाद कार्यक्रम को रद्द या स्थगित करना पड़ा है.
700 से अधिक छात्रों ने दर्ज कराया विरोध
NLSIU बेंगलुरु में 574 वर्तमान और 128 पूर्व छात्रों समेत 700 से ज्यादा विद्यार्थियों ने दीक्षांत समारोह में CJI सूर्यकांत और बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) के अध्यक्ष मनन कुमार मिश्रा की उपस्थिति का कड़ा विरोध किया था. इसके साथ ही छात्रों ने BCI द्वारा हैदराबाद की NALSAR यूनिवर्सिटी के छात्रों पर की गई कार्रवाई के खिलाफ बिना शर्त माफी की भी मांग रखी थी.
विवाद की पृष्ठभूमि और प्रमुख संस्थानों का घटनाक्रम
इस पूरे विरोध की शुरुआत मई 2026 में CJI सूर्यकांत द्वारा एक सुनवाई के दौरान की गई विवादास्पद टिप्पणी के बाद हुई. CJI ने रोजगार न पाने वाले कानून के युवाओं की तुलना ‘कॉकरोच’ से करते हुए कहा था कि वे सोशल मीडिया और RTI एक्टिविज्म में शामिल होकर हर किसी पर निशाना साधते हैं. इस बयान के बाद ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ का गठन हुआ और देश भर के छात्रों में असंतोष फैल गया.
विभिन्न संस्थानों में घटनाक्रम का ब्योरा
NALSAR हैदराबाद : लगभग 450 छात्रों ने CJI को दिया गया निमंत्रण वापस लेने के लिए पत्र लिखा. विवाद बढ़ने पर BCI ने स्नातकों के वकील पंजीकरण पर रोक लगाने का निर्देश दिया, जिसे बाद में CJI के हस्तक्षेप और छात्रों के विरोध के अधिकार को सही ठहराने के बाद वापस लिया गया.
TISS मुंबई : 2 अगस्त का 86वां दीक्षांत समारोह संभावित छात्र विरोध के कारण स्थगित किया गया और बाद में 22 अगस्त को नए मुख्य अतिथि डॉ. सीएस प्रमेश की अध्यक्षता में आयोजित हुआ.
ओपी जिंदल ग्लोबल यूनिवर्सिटी (सोनीपत) : 25 जुलाई को 15वें दीक्षांत समारोह में CJI शामिल नहीं हुए, जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस पीएस नरसिम्हा ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की.
छात्रों के बढ़ते विरोध और विधिक बिरादरी में छिड़ी बहस के बीच संस्थानों द्वारा समारोह रद्द करने के फैसले न्यायपालिका और शैक्षणिक जगत के बीच बढ़ते तनाव को दर्शाते हैं.




