मुंबई. त्योहारी सीजन (Festival Season) की शुरुआत से ठीक पहले देश के दो सबसे बड़े ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स—Amazon और Flipkart—ने अपने नियमों में कड़े बदलाव किए हैं. इन बदलावों के तहत ऑर्डर कैंसिलेशन, शिपिंग और फुलफिलमेंट पर लगने वाले शुल्क (Fees and Penalties) को काफी बदल दिया गया है. इन नए नियमों का असर सीधे तौर पर ऑनलाइन सामान बेचने वाले छोटे और मध्यम कारोबारियों (MSMEs) पर पड़ रहा है, लेकिन इसका अप्रत्यक्ष असर ग्राहकों की खरीदारी और कीमतों पर भी देखने को मिल सकता है.
अमेज़न का नया कैंसिलेशन और क्लोजिंग फीस स्ट्रक्चर
अमेज़न इंडिया ने अपने ‘ईजी शिप’ (Easy Ship) और ‘सेल्फ शिप’ (Self Ship) सर्विसेज के तहत ऑर्डर कैंसिलेशन फीस कैलकुलेट करने का तरीका पूरी तरह बदल दिया है, जो 17 अगस्त से लागू हो चुका है. पहले यह फीस कैटेगरी-तय रेफरल चार्ज के आधार पर लगती थी, लेकिन अब इसे सीधे ऑर्डर वैल्यू के प्रतिशत (Percentage) के रूप में वसूला जाएगा:
- 10,000 रुपये से कम के ऑर्डर पर: 10% चार्ज
- 10,001 से 50,000 रुपये के बीच: 8% चार्ज
- 50,001 से 1,00,000 रुपये के बीच: 5% चार्ज
- 1,00,000 रुपये से अधिक के ऑर्डर पर: 2% चार्ज
इसके साथ ही, इस राशि पर 18% का वस्तु एवं सेवा कर (GST) अलग से वसूला जाएगा. यह पेनल्टी तब लागू होती है जब या तो सेलर खुद किसी वजह से ऑर्डर कैंसिल करता है या फिर तय समय (24 घंटे) के भीतर शिपमेंट कन्फर्म न होने के कारण ऑर्डर ऑटो-कैंसिल हो जाता है.
इसके अतिरिक्त, अमेज़न 7 सितंबर से अपने फुलफिलमेंट सेंटर, ईजी शिप और सेलर फ्लेक्स चैनल्स पर ‘क्लोजिंग फीस’ भी बढ़ाने जा रहा है. 500 रुपये तक के उत्पादों पर यह फीस 1 रुपये और इससे महंगे उत्पादों पर 3 रुपये तक बढ़ाई जा रही है, जिसकी वजह बढ़ती ईंधन और लॉजिस्टिक्स लागत को बताया गया है.
फ्लिपकार्ट का थ्री-टियर पेनल्टी सिस्टम
दूसरी ओर, Flipkart ने 23 अगस्त से ऑर्डर पूरा करने में देरी या चूक होने पर एक नया थ्री-टियर (Three-tier) पेनल्टी स्ट्रक्चर लागू किया है:
- डिस्पैच डेडलाइन चूकने पर: यदि तय ‘डिस्पैच बाय डेट’ (DBD) तक ऑर्डर पिकअप के लिए तैयार नहीं होता है, तो 30 रुपये प्रति शिपमेंट चार्ज लगेगा.
- सेलर कैंसिलेशन या लगातार देरी पर: सेलर द्वारा ऑर्डर कैंसिल करने या लगातार तीन बार डेडलाइन मिस होने पर ऑटो-कैंसिलेशन होने पर 60 रुपये प्रति शिपमेंट पेनल्टी लगेगी.
- डिले के बाद कैंसिलेशन: यदि कोई ऑर्डर देरी से प्रोसेस होने के बाद अंततः कैंसिल होता है, तो जुर्माना बढ़कर 90 रुपये प्रति शिपमेंट हो जाएगा.
राहत की बात यह है कि नए सेलर्स को उनके बिजनेस के शुरुआती तीन महीनों तक इस नीति से छूट दी गई है.
सेलर्स की चिंताएं और ग्राहकों पर इसका क्या असर होगा?
ऑनलाइन सेलर्स और ट्रेडर्स संगठनों (जैसे FIRST INDIA) का कहना है कि ये बढ़े हुए शुल्क ऐसे समय में आए हैं जब छोटे कारोबारी पहले से ही पतले मार्जिन (Thin Margins) और बढ़ती लागत का सामना कर रहे हैं. सेलर्स का तर्क है कि कई बार ऑर्डर डिलीवरी एजेंट के समय पर पिकअप के लिए न आने की वजह से कैंसिल होते हैं, जिसके लिए उन्हें जिम्मेदार ठहराना और भारी जुर्माना वसूलना अनुचित है.
हालांकि ये नियम सीधे तौर पर सेलर्स के लिए हैं, लेकिन जानकारों का मानना है कि इससे अंततः उत्पादों की कीमतें प्रभावित हो सकती हैं. जब सेलर लॉजिस्टिक्स और कैंसिलेशन पेनल्टी के बढ़ते बोझ को अपनी लागत में जोड़ेंगे, तो फेस्टिव सीजन के दौरान ऑनलाइन शॉपिंग करने वाले ग्राहकों को मिलने वाले डिस्काउंट कम हो सकते हैं या सामान के दाम थोड़े बढ़ सकते हैं.





