- नया विवाद : राष्ट्रगीत के सम्मान पर आमने-सामने आए भाजपा और कांग्रेस, तेज हुई सियासत
- कर्नाटक और नई दिल्ली में सोनिया गांधी और राहुल गांधी के खिलाफ दो मामले दर्ज कराये गये
नई दिल्ली/चित्तौड़गढ़
राजस्थान के चित्तौड़गढ़ (निंबाहेड़ा) में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की पुण्यतिथि पर आयोजित कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कांग्रेस और उसकी वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी पर जोरदार राजनीतिक हमला बोला. अमित शाह ने आरोप लगाया कि स्वतंत्रता दिवस पर कांग्रेस मुख्यालय में ‘वंदे मातरम’ के गान को बीच में ही रुकवाने का प्रयास किया गया था. शाह ने इसे देश का अपमान करार देते हुए कहा कि कांग्रेस को इसके लिए देशवासियों और बैंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय से हाथ जोड़कर माफी मांगनी चाहिए.
इससे पहले इस मामले में कर्नाटक और नई दिल्ली में वंदे मातरम के अपमान को लेकर सोनिया गांधी और राहुल गांधी के खिलाफ मामले दर्ज कराये गये हैं.
शाह का सीधा हमला: ‘वोट बैंक की राजनीति में राष्ट्रगीत को भुला दिया’
जनसभा को संबोधित करते हुए अमित शाह ने कहा कि जिस ‘वंदे मातरम’ के उद्घोष के साथ हजारों देशभक्तों ने हंसते-हंसते फांसी के फंदे को चूम लिया, लाठियां खाईं और जेल की सजा काटी, उसी पवित्र गीत को कांग्रेस ने अपने वोट बैंक के लालच में दरकिनार कर दिया. उन्होंने आगे कहा कि पूरा देश टीवी पर देख चुका है कि कैसे राष्ट्रगीत के दौरान सोनिया गांधी ने पार्टी अध्यक्ष को गाना रोकने का इशारा किया. शाह ने दावा किया कि 140 करोड़ देशवासी कांग्रेस के इस “पाप” को कभी माफ नहीं करेंगे.
कांग्रेस का पलटवार: ‘पूरा वंदे मातरम गाया गया, आरोप पूरी तरह निराधार’
गृह मंत्री के इन तीखे आरोपों पर कांग्रेस ने भी तुरंत और कड़ा पलटवार किया. पार्टी ने शाह के दावों को पूरी तरह से खारिज करते हुए कहा कि स्वतंत्रता दिवस के आधिकारिक कार्यक्रम में ‘वंदे मातरम’ का पूरा संस्करण मर्यादापूर्वक गाया गया था. कांग्रेस नेताओं ने पलटवार करते हुए भाजपा पर मुख्य मुद्दों से ध्यान भटकाने और स्वतंत्रता दिवस जैसे राष्ट्रीय पर्व का राजनीतिकरण करने का आरोप लगाया.
चुनावी माहौल में राष्ट्रवाद की सियासत तेज
‘वंदे मातरम’ को लेकर शुरू हुआ यह नया विवाद देश के राजनीतिक पारे को और चढ़ाने वाला साबित हो रहा है. एक तरफ जहां भाजपा इसे कांग्रेस की पुरानी “तुष्टीकरण नीति” का हिस्सा बताकर राष्ट्रवाद के मुद्दे को धार दे रही है, वहीं दूसरी तरफ कांग्रेस इसे अपनी देशभक्ति पर हमला मानते हुए भाजपा के अपने पुराने इतिहास और प्रशासनिक चूक पर सवाल उठा रही है.
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले समय में राष्ट्रवाद, राष्ट्रगीत और देश के प्रतीकों के सम्मान से जुड़ा यह मुद्दा चुनावी रैलियों में और जोर-शोर से गूंजेगा.


