केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी के अनुसार, खुदरा बिक्री केंद्रों (रिटेल आउटलेट्स) की नियमित जांच जारी है और गुणवत्ता से समझौता करने वाले इक्का-दुक्का मिलावट के मामलों पर सख्त कार्रवाई की जा रही है.
नई दिल्ली. ई-20 (E-20) पेट्रोल के इस्तेमाल से वाहनों के माइलेज में आ रही गिरावट और इंजन की सेहत को लेकर उठ रहे सवालों के बीच केंद्र सरकार ने स्थिति स्पष्ट की है. सरकार ने साफ किया है कि माइलेज कम होने या वाहनों में आने वाली दिक्कतों के लिए केवल ई-20 ईंधन को जिम्मेदार ठहराना ठीक नहीं है.
सड़कों पर वास्तविक परिस्थितियों में माइलेज कई अन्य तकनीकी और व्यावहारिक कारकों पर निर्भर करता है, जिनमें वाहन चलाने का तरीका (ड्राइविंग हैबिट्स) और गाड़ियों का नियमित रखरखाव सबसे प्रमुख हैं.
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक आधिकारिक बयान जारी कर बताया कि देश में ई-20 पेट्रोल को बाजार में उतारने से पहले इसका व्यापक और कठोर परीक्षण किया गया है. सरकारी परीक्षणों और सत्यापन के अनुसार, निर्धारित मानकों वाले इस ईंधन से वाहनों के इंजन पर कोई नकारात्मक असर नहीं पड़ता है.
हालांकि, सरकार ने यह स्वीकार किया है कि पारंपरिक पेट्रोल की तुलना में ई-20 ईंधन के उपयोग से कुछ वाहनों के माइलेज में 3 से 5 प्रतिशत तक की मामूली कमी दर्ज की जा सकती है. लेकिन अगर माइलेज में इससे अधिक गिरावट आ रही है, तो इसके पीछे टायर में सही हवा का दबाव न होना, जरूरत से ज्यादा एयर कंडीशनिंग (AC) का इस्तेमाल, भारी ट्रैफिक की स्थिति और वाहन की समय पर सर्विसिंग न कराना मुख्य वजह हो सकते हैं.
इसके साथ ही, बाजार में ई-20 पेट्रोल की गुणवत्ता को लेकर फैल रही अफवाहों और मिलावट या पानी की शिकायत पर तेल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) ने भी स्पष्टीकरण जारी किया है. इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम ने देशभर के विभिन्न हिस्सों से एकत्र किए गए पेट्रोल और इथेनॉल के नमूनों की जांच की.
रिफाइनरियों से लिए गए 100 से अधिक पेट्रोल नमूनों में क्लोराइड का स्तर safe limit (1 ppm) या उससे भी कम पाया गया. इसी तरह 80 डिस्टिलरियों के इथेनॉल और 80 से अधिक डिपो व टर्मिनलों से लिए गए ई-20 पेट्रोल नमूनों में क्लोराइड का स्तर तय सीमा (3 ppm) के भीतर ही रहा. इसके अलावा, देशभर के लगभग 90,000 पेट्रोल पंपों के भंडारण टैंकों की सघन जांच में पानी की मौजूदगी का कोई भी मामला सामने नहीं आया है.
केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी के अनुसार, खुदरा बिक्री केंद्रों (रिटेल आउटलेट्स) की नियमित जांच जारी है और गुणवत्ता से समझौता करने वाले इक्का-दुक्का मिलावट के मामलों पर सख्त कार्रवाई की जा रही है.


