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Home » सरकार तय करेगी कर्मचारी और बच्चों की सामाजिक सुरक्षा : जानिए कब लागू होगा नया लेबर कोड, क्या हैं नियम और किसकी तय हुई जिम्मेदारी
ओसियन स्पेशल

सरकार तय करेगी कर्मचारी और बच्चों की सामाजिक सुरक्षा : जानिए कब लागू होगा नया लेबर कोड, क्या हैं नियम और किसकी तय हुई जिम्मेदारी

Ocean News DeskBy Ocean News DeskAugust 7, 2026
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सांकेतिक तस्वीर
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  • नए श्रम कानून में सुधार के तहत कर्मचारियों और उनके बच्चों की सामाजिक सुरक्षा को दी जायेगी प्राथमिकता 

नई दिल्ली. कामकाजी माता-पिता के लिए करियर और बच्चों के पालन-पोषण के बीच संतुलन बनाने की दिशा में केंद्र सरकार एक क्रांतिकारी कदम उठाने जा रही है. नए श्रम सुधारों के तहत लाए जा रहे नये लेबर कोड में कर्मचारियों और उनके बच्चों की सामाजिक सुरक्षा को प्राथमिकता दी गई है.

कब से लागू होगा नया लेबर कोड?

केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्रालय द्वारा चारों श्रम संहिताओं (सोशल सिक्योरिटी कोड, OSHWC कोड, वेज कोड और इंडस्ट्रियल रिलेशंस कोड) में संशोधन को अंतिम रूप दिया जा चुका है. केंद्र सरकार के साथ-साथ कई राज्य सरकारें भी इसे चरणबद्ध तरीके से लागू करने की तैयारी में हैं. मंत्रालय के हालिया स्पष्टीकरणों और नियमावली के तहत इसे जल्द ही देश भर के सभी संगठित और असंगठित क्षेत्रों में लागू किया जाना है.

कर्मचारी और बच्चों की सामाजिक सुरक्षा के मुख्य प्रावधान

नए लेबर कोड में कामकाजी परिवारों को राहत देने के लिए कई बड़े प्रावधान शामिल किए गए हैं:

  • अनिवार्य क्रेच सुविधा: जिस भी संस्थान या कंपनी में 50 या उससे अधिक कर्मचारी कार्यरत हैं, वहां 6 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए क्रेच (बाल देखभाल केंद्र) की व्यवस्था करना अनिवार्य होगा.
  • जेंडर-न्यूट्रल सुविधा: यह सुविधा सिर्फ महिला कर्मचारियों तक सीमित नहीं होगी. OSHWC कोड के तहत पिता (पुरुष कर्मचारी), विधुर, या सिंगल पैरेंट भी अपने बच्चों के लिए इस सुविधा का लाभ उठा सकेंगे.
  • क्रेच भत्ता (Creche Allowance): यदि कोई कंपनी परिसर के 1 किलोमीटर के दायरे में क्रेच सुविधा प्रदान करने में असमर्थ रहती है, तो उसे कर्मचारी की सहमति से प्रति बच्चा कम से कम ₹500 प्रतिमाह का नकद भत्ता देना होगा (अधिकतम दो बच्चों तक).
  • नर्सिंग ब्रेक व छूट: कामकाजी माताओं को दिन में 4 बार क्रेच जाने की अनुमति होगी. साथ ही, बच्चे के 15 महीने का होने तक रोजाना दो बार (15-15 मिनट के) नर्सिंग ब्रेक दिए जाएंगे.

सरकार ने किसकी और क्या-क्या जिम्मेदारी तय की है?

1. कंपनियों और नियोक्ताओं (Employers) की जिम्मेदारी:

सुरक्षा और स्वच्छता के कड़े मानक: कंपनियों को क्रेच परिसर में CCTV निगरानी, पेयजल, हवादार कमरे, फर्स्ट-एड और सुरक्षित खेल क्षेत्र सुनिश्चित करना होगा.

स्टाफ सत्यापन: क्रेच में तैनात सभी कर्मचारियों का पुलिस वेरिफिकेशन कराना कंपनी के लिए अनिवार्य होगा.

साझा मॉडल: कंपनियां चाहें तो अकेले या आसपास के अन्य संस्थानों के साथ मिलकर भी 1 किलोमीटर के दायरे में एक साझा क्रेच केंद्र चला सकती हैं.

2. सरकार और प्रशासन की जिम्मेदारी:

  • निगरानी और मानक निर्धारण: श्रम मंत्रालय की यह जिम्मेदारी होगी कि सभी निजी व सरकारी संस्थान इन नियमों का पूरी तरह से पालन करें.
  • नियमों में पारदर्शिता: सरकार ने स्पष्ट किया है कि सामाजिक सुरक्षा का दायरा केवल बड़े कॉर्पोरेट्स तक सीमित न रहे, बल्कि मध्यम वर्ग और छोटे संस्थानों के कर्मचारियों को भी इसका कानूनी अधिकार मिले.

नए लेबर कोड के इन प्रावधानों से न केवल कार्यस्थलों पर लैंगिक समानता को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि कामकाजी माता-पिता बिना मानसिक तनाव के अपने करियर और बच्चों की सुरक्षा के बीच बेहतर तालमेल बिठा सकेंगे.

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