- प्रशासन छात्रों से बातचीत कर स्थिति को संभालने की कोशिश कर रहा, अभ्यर्थी ठोस और लिखित आश्वासन चाहते हैं
- 6 से 12 अगस्त तक चलने वाले मानसून सत्र में JPSC-JSSC परीक्षा घोटाले सरकार के लिए बनी चुनौती बन गया है
रांची. झारखंड में मानसून सत्र के दूसरे दिन भी JPSC-JSSC पर हंगामा का मुद्दा पूरी तरह छाया रहा. झारखंड विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान राज्य की प्रमुख प्रतियोगी परीक्षाओं JPSC (झारखंड लोक सेवा आयोग) और JSSC (झारखंड कर्मचारी चयन आयोग) में हुई कथित अनियमितताओं को लेकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और प्रदर्शनकारी छात्रों का गुस्सा चरम पर नजर आया. छात्रों के सड़क पर जारी भारी विरोध प्रदर्शन और सदन के भीतर भाजपा के आक्रामक रुख ने राज्य सरकार को पूरी तरह बैकफुट पर धकेल दिया है.
भाजपा की मांग, हाईकोर्ट की निगरानी में हो CBI जांच
मानसून सत्र की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्ष ने सरकार पर तीखा हमला बोला. विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी के नेतृत्व में भाजपा विधायकों ने JPSC और JSSC की विवादित व संदिग्ध भर्ती परीक्षाओं को तुरंत रद्द करने की मांग रखी. भाजपा की मुख्य मांग है कि इन तमाम परीक्षाओं की गड़बड़ियों की निष्पक्ष जांच हाईकोर्ट की निगरानी में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) से कराई जाए.
सत्र के दौरान भाजपा विधायकों के तेवर बेहद तल्ख दिखे. विधायक सरकार विरोधी और “न्याय चाहिए, धोखा नहीं” के नारों वाली पट्टियां व मास्क पहनकर सदन पहुंचे थे. सदन में हंगामा बढ़ता देख जब सत्ता पक्ष के मंत्रियों ने पलटवार करने की कोशिश की, तो भाजपा विधायक वेल (आसन के समीप) में आकर नारेबाजी करने लगे. हंगामे और भारी विरोध के कारण अध्यक्ष को सदन की कार्यवाही बार-बार स्थगित करनी पड़ी. भाजपा नेताओं का स्पष्ट कहना है कि जब तक युवाओं को न्याय नहीं मिलता और CBI जांच के आदेश नहीं दिए जाते, उनका विरोध जारी रहेगा.
सड़क पर छात्रों का JPSC प्रदर्शन: बारिश और पुलिसिया कड़ाई के बावजूद डटे अभ्यर्थी
एक तरफ जहां सदन में राजनीतिक माहौल गर्म था, वहीं दूसरी तरफ राजधानी रांची की सड़कों पर JPSC और JSSC अभ्यर्थियों का जन-आक्रोश देखने को मिला. ‘जयपाल मुंडा स्टेडियम’ और राजभवन के आसपास हजारों की संख्या में अभ्यर्थी एकत्रित होकर लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं. मूसलाधार बारिश और प्रशासनिक दबाव के बावजूद छात्रों का हौसला डिगा नहीं है.
अभ्यर्थियों का आरोप है कि परीक्षाओं में बड़े पैमाने पर धांधली, पेपर लीक और सीट बेचने का खेल हुआ है, जिससे वर्षों से तैयारी कर रहे मेधावी छात्रों का भविष्य अंधकारमय हो गया है. प्रदर्शनकारी छात्रों ने सरकार से पारदर्शी प्रक्रिया अपनाने और जांच एजेंसी बदलने की मांग की है. छात्रों के इस शांतिपूर्ण लेकिन बुलंद आंदोलन को समाज के विभिन्न वर्गों का भी समर्थन मिल रहा है.
राजनीतिक सरगर्मी और बैकफुट पर सरकार
सड़क से लेकर सदन तक बने इस माहौल ने राज्य की राजनीति में हलचल मचा दी है. राहुल गांधी आदि ने भी वीडियो कॉल के जरिए प्रदर्शनकारी छात्रों से बात कर उनकी समस्याओं को सुना और समर्थन का आश्वासन दिया.
दूसरी ओर, प्रशासनिक स्तर पर जिला प्रशासन और पुलिस अधिकारी (SDO आदि) छात्रों से बातचीत कर स्थिति को संभालने की कोशिश कर रहे हैं. हालांकि, अभ्यर्थी स्पष्ट कर चुके हैं कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस और लिखित आश्वासन नहीं मिलता, तब तक आंदोलन खत्म नहीं होगा. 6 से 12 अगस्त तक चलने वाले इस 5 दिवसीय मानसून सत्र में JPSC-JSSC परीक्षा घोटाले का यह मुद्दा सरकार के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन गया है.


