- साहिबगंज से धनबाद जेल शिफ्टिंग के दौरान हुई घटना
रांची. झारखंड के आपराधिक गलियारों में खौफ का पर्याय बन चुके कुख्यात गैंगस्टर सुजीत सिन्हा का अंत हो गया है. जामताड़ा जिले के सीमावर्ती क्षेत्र में पुलिस की जवाबी कार्रवाई में वह मारा गया. यह पूरी घटना उस समय घटी जब सुजीत सिन्हा को कड़ी सुरक्षा घेरे के बीच साहिबगंज जेल से धनबाद जेल स्थानांतरित किया जा रहा था.
पुलिस की इस त्वरित और सख्त कार्रवाई के बाद पूरे इलाके में सनसनी फैल गई है. वह झारखंड के अपराध जगत का बड़ा नाम था. उसपर 60 से अधिक हत्या, रंगदारी, भयादोहन, आगजनी आदि से जुड़े मामले दर्ज हैं.
भागने की कोशिश और गोलियों की तड़तड़ाहट
प्राप्त जानकारी के अनुसार, पुलिस का काफिला जैसे ही साहिबगंज से धनबाद के लिए रवाना हुआ, सब कुछ सामान्य लग रहा था. हालांकि, जामताड़ा जिले की सीमा में प्रवेश करते ही सुजीत सिन्हा ने वाहन में मौजूद सुरक्षाकर्मियों से शौच जाने की बात कही.
पुलिस टीम ने एहतियात बरतते हुए गाड़ी को सड़क के किनारे रुकवाया. जैसे ही उसे वाहन से नीचे उतारा गया, सुजीत ने अचानक सुरक्षाकर्मियों को चकमा देकर अंधेरे और सुनसान इलाके का फायदा उठाते हुए भागने का प्रयास किया.
चेतावनी का असर नहीं: पुलिस अधिकारियों ने उसे तुरंत रुकने और आत्मसमर्पण करने की चेतावनी दी, लेकिन उसने भागना जारी रखा.
जवाबी फायरिंग: स्थिति की गंभीरता को देखते हुए पुलिस को मजबूरन गोलियां चलानी पड़ीं.
अस्पताल में मौत: गोली लगने से सुजीत सिन्हा गंभीर रूप से घायल होकर वहीं गिर पड़ा. पुलिस उसे तत्काल अस्पताल ले गई, जहाँ डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया.
फॉरेंसिक टीम मौके पर, जांच तेज
मुठभेड़ की सूचना मिलते ही वरिष्ठ पुलिस अधिकारी और फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (FSL) की विशेष टीम घटनास्थल पर पहुंची. पुलिस प्रशासन ने पूरे इलाके को सील कर दिया है और साक्ष्य जुटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है. अधिकारियों का कहना है कि पूरी घटना की विस्तृत जांच की जा रही है और कानून के अनुसार सभी आवश्यक कागजी व फॉरेंसिक प्रक्रियाएं पूरी की जा रही हैं.
लंबा आपराधिक इतिहास
पलामू जिले के डालटनगंज (रेडमा क्षेत्र) का रहने वाला सुजीत सिन्हा पिछले कई वर्षों से संगीन आपराधिक वारदातों के सिलसिले में सलाखों के पीछे था. उस पर हत्या, रंगदारी और आपराधिक षड्यंत्र जैसे दर्जनों मामले दर्ज थे.
जेलों में लगातार बदलाव: सुरक्षा कारणों और उसकी गतिविधियों पर अंकुश लगाने के लिए उसे पिछले वर्ष पलामू सेंट्रल जेल से साहिबगंज जेल स्थानांतरित किया गया था.
धनबाद शिफ्टिंग का फैसला: हाल ही में प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था को और पुख्ता करने के उद्देश्य से उसे धनबाद जेल भेजने का निर्णय लिया था, जिसके दौरान यह एनकाउंटर घटित हुआ.
कुख्यात अमन साहू की तरह ही सुजीत सिन्हा का भी एनकाउंटर
छत्तीसगढ़ के रायपुर से रांची लाने के दौरान जिस तरह कुख्यात अमन साहू का पलामू में एनकाउंटर हुआ, उसी तरह उसके प्रतिद्वंद्वी सुजीत सिन्हा का भी हो गया. कभी दोनों साथ मिलकर अपराध में सक्रिय थे, बाद में दोनों प्रतिद्वंद्वी हो गए थे.
पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि जेल में निगरानी बढ़ने के बाद गिरोह का संचालन कथित सहयोगी प्रियंका कुमारी उर्फ खुशबू उर्फ सृष्टि गिरोह के आर्थिक लेन-देन, शूटरों तक निर्देश पहुंचाने और नेटवर्क को सक्रिय रखने में भूमिका निभाती थी.
उसकी गिरफ्तारी के बाद पत्नी रिया सिन्हा ने आर्थिक गतिविधियों और कथित मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े कामों की जिम्मेदारी संभाली. वर्तमान में रिया सिन्हा भी आपराधिक मामलों में चाईबासा जेल में बंद है.
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