रांची. झारखंड में इन दिनों प्रशासनिक नियुक्तियों और परीक्षाओं में हो रही धांधलियों ने हेमंत सरकार की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की परीक्षाओं में सामने आई कथित अनियमितताओं, पेपर लीक और भ्रष्टाचार के मामलों के खिलाफ बुधवार को राजधानी रांची की सड़कें युवाओं के आक्रोश से गूंज उठीं.
हजारों की संख्या में छात्रों ने जयपाल सिंह स्टेडियम से अलबर्ट एक्का चौक तक एक विशाल विरोध मार्च निकालकर राज्य सरकार की नाकामी और उसकी व्यवस्थागत विफलता के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया.
सरकार की नाकामी और प्रशासनिक विफलता का प्रमाण
छात्रों का यह विरोध प्रदर्शन केवल एक परीक्षा में गड़बड़ी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह राज्य सरकार की उस पूरी व्यवस्था के खिलाफ है जो युवाओं को पारदर्शी और निष्पक्ष परीक्षाएं देने में लगातार विफल रही है. एक के बाद एक परीक्षाओं का रद्द होना, मुख्य परीक्षाओं का स्थगित होना और आयोग के शीर्ष अधिकारियों का घोटालों व भ्रष्टाचार के मामलों में रडार पर आना, सीधे तौर पर सरकार की लचर प्रशासनिक पकड़ और नाकामी को उजागर करता है. प्रदर्शन कर रहे युवाओं का कहना है कि सरकार के संरक्षण और ढुलमुल रवैये के कारण राज्य के काबिल और मेहनतकश युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है.
अलबर्ट एक्का चौक पर घंटों प्रदर्शन, शहर में ठप रही व्यवस्था
जयपाल सिंह स्टेडियम से शुरू हुआ विरोध मार्च जब मुख्य मार्गों से गुजरते हुए अलबर्ट एक्का चौक पहुंचा, तो वहां छात्रों ने सरकार विरोधी नारेबाजी करते हुए अनिश्चितकालीन धरना व प्रदर्शन शुरू कर दिया. इस दौरान घंटों तक चले प्रदर्शन के कारण शहर की यातायात व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई.
प्रमुख मार्गों पर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं, जिससे आम नागरिकों और एंबुलेंस जैसी आपातकालीन सेवाओं को भी भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा. हालांकि जिला प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए थे और भारी पुलिस बल की तैनाती की गई थी, लेकिन सरकार की जनविरोधी नीतियों के प्रति छात्रों का गुस्सा शांत होने का नाम नहीं ले रहा था.
भ्रष्टाचार के दलदल में फंसे बड़े चेहरे
यह पूरा विवाद तब और गहरा गया जब JPSC की परीक्षाओं और कथित घोटालों में पूर्व चेयरमैन एल. खियांग्ते के आवास पर सीआईडी की छापेमारी और उप परीक्षा नियंत्रक श्वेता गुप्ता समेत कई अन्य आरोपियों की गिरफ्तारियां सामने आईं.
इससे यह साफ हो गया कि राज्य की भर्ती एजेंसियां किस हद तक भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ चुकी हैं. पूर्व में 25 जुलाई से होने वाली मुख्य परीक्षा का स्थगित होना और अन्य परीक्षाओं का रुकना इस बात का जीता-जागता सबूत है कि सरकार अपनी एजेंसियों की शुचिता बनाए रखने में पूरी तरह नाकाम साबित हुई है.
‘मांगें पूरी होने तक जारी रहेगा आंदोलन’
अलबर्ट एक्का चौक पर प्रदर्शन समाप्त करने के बाद छात्र वापस जयपाल सिंह स्टेडियम पहुंचे और वहां अपना धरना जारी रखा. छात्र नेताओं ने दो टूक शब्दों में चेतावनी दी है कि जब तक JPSC घोटालों की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच नहीं होती, तथा दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई नहीं की जाती, तब तक उनका यह आंदोलन और अधिक उग्र रूप लेता रहेगा.
बेरोजगारी और पेपर लीक के इस दौर में राज्य सरकार की विफलता ने झारखंड के युवाओं को सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर कर दिया है, और यह विरोध आने वाले दिनों में सरकार के लिए एक बड़ी राजनीतिक चुनौती बनता जा रहा है.
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