NEW DELHI. देश के करोड़ों रेल यात्रियों की जेब पर हर साल टिकट कैंसिलेशन और वेटिंग टिकटों के नाम पर भारी-भरकम राशि कटती है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि रेलवे के पास इस बात का कोई पुख्ता और क्षेत्र-वार (Zone-wise) रिकॉर्ड ही नहीं है कि किस जोन को टिकट रद्द कराने से कितनी मलाई (कमाई) मिल रही है?
जी हां, यह कोई आम दावा नहीं बल्कि खुद देश के रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने संसद में लिखित तौर पर स्वीकार किया है. सरकार के इस जवाब ने अब कई तरह के सवाल खड़े कर दिए हैं कि आखिर आधुनिक तकनीक और कंप्यूटरीकृत टिकटिंग के इस दौर में भी वित्तीय पारदर्शिता का यह हाल क्यों है?
संसद में क्या बोले रेल मंत्री?
राज्यसभा में एक सांसद द्वारा पिछले कुछ वर्षों में टिकट रद्द करने वाले शुल्कों और बिना रद्द किए गए वेटिंग टिकटों से होने वाली आय का जोन-वार विवरण मांगा गया था. इस सवाल के लिखित जवाब में रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि भारतीय रेलवे के पास टिकट रद्द कराने से होने वाली आय का कोई अलग से जोन-वार रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है.
इस बयान के सामने आते ही सवाल उठने लाजिमी हैं कि जब आईआरसीटीसी (IRCTC) और पीआरएस (PRS) का पूरा सिस्टम ऑनलाइन और सेंट्रलाइज्ड है, तो फिर हर जोन की अलग से कमाई का डेटा क्यों मेंटेन नहीं किया जाता?
जानकारों का मानना है कि पारदर्शी व्यवस्था के दावे करने वाले महकमे में इस तरह के आंकड़ों का न होना प्रशासनिक लापरवाही या व्यवस्था की बड़ी चूक को दर्शाता है.
रेलवे के टिकट रद्द करने और रिफंड के मौजूदा नियमएक तरफ जहां रेलवे के पास कमाई का हिसाब नहीं है, वहीं दूसरी तरफ यात्रियों पर टिकट कैंसिलेशन के कड़े नियम थोप दिए गए हैं. हाल ही में प्रीमियम ट्रेनों जैसे वंदे भारत स्लीपर और अमृत भारत एक्सप्रेस के साथ-साथ सामान्य ट्रेनों के लिए भी नियमों में बदलाव किए गए हैं.
आइए जानते हैं टिकट रद्द करने पर क्या हैं नियम
- वंदे भारत स्लीपर और अमृत भारत एक्सप्रेस के नियम: इन आधुनिक ट्रेनों में यदि कोई यात्री अपनी कन्फर्म टिकट को ट्रेन के निर्धारित छूटने के समय से 72 घंटे पहले रद्द करता है, तो किराए का 25 प्रतिशत हिस्सा काट लिया जाता है.
- यदि टिकट 72 घंटे से लेकर 8 घंटे के बीच रद्द किया जाता है, तो किराए का 50 प्रतिशत हिस्सा काटा जाता है.
- यदि ट्रेन के तय समय से 8 घंटे के भीतर टिकट रद्द किया जाता है, तो यात्रियों को शून्य रिफंड (कोई पैसा वापस नहीं) मिलता है.
- सामान्य ट्रेनों के नियम: सामान्य एक्सप्रेस और मेल ट्रेनों के लिए भी नियमों को सख्त किया गया है. ट्रेन के निर्धारित प्रस्थान से 8 घंटे पहले तक टिकट रद्द कराने पर रिफंड न मिलने का प्रावधान लाया गया है, जबकि पहले यह समय सीमा 4 घंटे हुआ करती थी.
- ट्रेन छूटने के 24 से 8 घंटे के बीच टिकट रद्द करने पर 50 प्रतिशत की कटौती होती है, और 72 से 24 घंटे पहले रद्द करने पर 25 प्रतिशत किराया काटा जाता है. ट्रेन के तय समय से 72 घंटे से ज्यादा पहले टिकट रद्द करने पर फ्लैट कैंसिलेशन चार्ज काटकर पूरा पैसा रिफंड मिलता है.
पारदर्शिता पर उठ रहे सवाल
विशेषज्ञों का कहना है कि एक तरफ रेलवे यात्रियों द्वारा ऐंसे गए कैंसिलेशन चार्ज और क्लर्केज के जरिए हर साल करोड़ों-अरबों रुपये कमाता है, वहीं दूसरी ओर संसद में यह कह देना कि इसका जोन-वार डेटा नहीं रखा जाता, पारदर्शिता के दावों की पोल खोलता है. यात्रियों का हक और रेलवे की कमाई का हिसाब साफ न होना आने वाले दिनों में राजनीतिक गलियारों में एक बड़ा मुद्दा बन सकता है.
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