दही की तरह जमी सफेद परत, मारुति सुजुकी ग्रैंड विटारा हाइब्रिड का इंजन 5 महीने में हुआ कबाड़
एसजीएस लैब की रिपोर्ट में बड़ा खुलासा, E20 ईंधन के अनुकूल नहीं था गाड़ी का इंजन
मारुति सुजुकी ने कहा – ‘आदेश को देंगे चुनौती, हमारी गाड़ियां एथेनॉल के लिए सुरक्षित’
रायपुर. छत्तीसगढ़ के रायपुर से देश में एथेनॉल मिश्रित ईंधन (E20) के इस्तेमाल से गाड़ी का इंजन खराब होने और उस पर उपभोक्ता अदालत (कंज्यूमर कोर्ट) द्वारा बड़ा जुर्माना लगाने का पहला मामला सामने आया है.
रायपुर उपभोक्ता फोरम ने कार निर्माता कंपनी मारुति सुजुकी इंडिया लिमिटेड और उसके अधिकृत डीलर को सेवा में कमी का दोषी पाया है. कोर्ट ने आदेश दिया है कि कंपनी या तो ग्राहक को उसी मॉडल की नई कार दे या फिर 20.5 लाख रुपये वापस करे.
क्या है पूरा मामला?
रायपुर के डॉ. प्रेमराज देबता ने जून 2024 में मारुति सुजुकी की नेक्सा डीलरशिप से ‘ग्रैंड विटारा स्ट्रॉन्ग हाइब्रिड जेटा प्लस’ कार खरीदी थी. कार खरीदने के करीब 5 महीने बाद ही नवंबर 2024 में अचानक गाड़ी के डैशबोर्ड पर इंजन मालफंक्शन का अलर्ट आया और कार बंद हो गई. डीलरशिप ने इसे मिलावटी पेट्रोल की समस्या बताकर ईंधन की टंकी साफ कर दी.
इसके बाद भी कार बार-बार खराब होती रही. बार-बार जांच करने पर फ्यूल टैंक और फिल्टर में सफेद रंग की गाढ़ी परत (दही की तरह जमी हुई) और पानी जैसा तरल पदार्थ मिला. आखिरकार कंपनी ने ई-मेल के जरिए डॉक्टर को सूचित किया कि गाड़ी का इंजन पूरी तरह खराब हो चुका है और इसे बदलने में 5.30 लाख रुपये का खर्च आएगा, जो वारंटी के तहत कवर नहीं होगा.
सरकारी लैब रिपोर्ट से हुआ खुलासा
डॉक्टर देबता ने मामले की शिकायत की और पेट्रोल के नमूनों की जांच एसजीएस लैब से कराई गई.
जांच रिपोर्ट: लैब टेस्ट में पुष्टि हुई कि ईंधन में एथेनॉल मौजूद था. एथेनॉल पेट्रोल से अलग होकर टैंक के निचले हिस्से में सफेद परत के रूप में जम गया था.
अदालत का निष्कर्ष: उपभोक्ता आयोग ने पाया कि बेची गई कार का इंजन E20 अनुकूल नहीं था, जबकि देश में अब E20 ईंधन तेजी से इस्तेमाल हो रहा है. डीलर ने ग्राहक को कार की मैन्युफैक्चरिंग डेट भी गलत बताई थी (दिसंबर 2023 की जगह असल में कार जनवरी 2023 में बनी थी).
कंज्यूमर कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला
14 जुलाई 2026 को उपभोक्ता फोरम ने ग्राहक के पक्ष में फैसला सुनाते हुए कड़ा रुख अपनाया:
नई कार या रिफंड: कंपनी को 45 दिनों के भीतर ग्राहक को E20 अनुकूल नई कार देनी होगी.
पूरी रकम की वापसी: ऐसा न करने पर वाहन की पूरी कीमत (20.5 लाख रुपये), आरटीओ रजिस्ट्रेशन, बीमा और अन्य खर्च लौटाने होंगे.
मुआवजा: मानसिक प्रताड़ना के लिए 1 लाख रुपये और अदालती खर्च के लिए 10 हजार रुपये का हर्जाना भी देना होगा.
मारुति सुजुकी का पक्ष
इस फैसले पर मारुति सुजुकी के अधिकारियों का कहना है कि वे इस आदेश को चुनौती देंगे. कंपनी का दावा है कि उनकी कार पहले से ही E20 ईंधन के अनुकूल थी, इसलिए उपभोक्ता आयोग का यह फैसला तथ्यों के विपरीत है. कंपनी के अनुसार, 2023 से पहले बनी उनकी गाड़ियों में भी पर्याप्त सुरक्षा मानक हैं, जिससे एथेनॉल ईंधन के इस्तेमाल से इंजन को कोई नुकसान नहीं होता है.
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