पटना: बिहार की सियासत से इस वक्त की सबसे बड़ी राजनीतिक खबर सामने आ रही है. राष्ट्रीय जनता दल (RJD) का प्रमुख चेहरा और दशकों तक पार्टी का पक्ष मजबूती से रखने वाले वरिष्ठ नेता मृत्युंजय तिवारी ने आरजेडी से इस्तीफा दे दिया है.
उन्होंने बिहार आरजेडी के प्रदेश अध्यक्ष मंगनी लाल मंडल से मुलाकात कर पार्टी के प्रवक्ता सहित अपने सभी सांगठनिक पदों से त्यागपत्र सौंप दिया. इस बड़े फैसले के बाद उन्होंने मीडिया से बातचीत में अपना दर्द साझा किया, जिसने बिहार के सियासी गलियारों में एक नई हलचल पैदा कर दी है.
‘समर्पित कार्यकर्ताओं का नहीं बचा सम्मान’
मृत्युंजय तिवारी ने बेहद भावुक और निराश होकर कहा कि उन्होंने पार्टी के लिए हमेशा पूरी निष्ठा और अनुशासन के साथ काम किया. सबसे कठिन दौर में भी वह पार्टी के साथ चट्टान की तरह खड़े रहे. उन्होंने भारी मन से कहा:
“अब पार्टी में मेरे जैसे समर्पित और पुराने कार्यकर्ताओं के लिए सम्मान नहीं बचा था. ऐसे उपेक्षित माहौल में काम करना बिल्कुल संभव नहीं था.”
उन्होंने यह भी साफ किया कि वह पिछले छह-सात महीनों से लगातार खुद को पार्टी के भीतर अलग-थलग महसूस कर रहे थे. उन्होंने इसकी शिकायत कई वरिष्ठ नेताओं से भी की, लेकिन किसी ने उनकी सुध नहीं ली.
तेजस्वी यादव सब जानते थे, पर…
इस्तीफे के बाद सबसे बड़ा हमला मृत्युंजय तिवारी ने पार्टी के आंतरिक तंत्र पर किया है. उन्होंने सीधे तौर पर कार्यकारी अध्यक्ष तेजस्वी यादव का नाम लेते हुए कहा कि तेजस्वी उनकी नाराजगी और चिंताओं को अच्छी तरह से जानते थे. तिवारी ने कहा, “तेजस्वी यादव मेरी बात समझते थे, लेकिन उनकी क्या मजबूरी है, यह मैं नहीं जानता.”
उन्होंने किसी खास नेता का नाम लेने से तो साफ इनकार कर दिया, लेकिन यह इशारा जरूर किया कि पार्टी में पिछले कुछ समय से ऐसे लोगों का प्रभाव बढ़ गया है जिनके सामने बड़े-बड़े दिग्गज नेता भी खुलकर बोलने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं.
लालू-राबड़ी के दौर को किया याद
भावुक होते हुए तिवारी ने उस पुराने वक्त को याद किया जब लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी ने उन्हें साल 2014 में पार्टी का मीडिया प्रभारी और प्रवक्ता नियुक्त किया था. उन्होंने बताया कि एक बार जब उन्हें पद से हटाया गया था, तो खुद लालू और राबड़ी देवी ने उसी दिन उन्हें फिर से जिम्मेदारी सौंप दी थी. लेकिन इस बार स्थितियां बिल्कुल बदल चुकी थीं. उन्होंने बताया कि करीब एक महीने पहले तेजस्वी यादव के बेटे के जन्मदिन पर उनकी आखिरी मुलाकात हुई थी, लेकिन इस्तीफा देने के बाद से नेतृत्व की तरफ से कोई फोन या संपर्क नहीं किया गया है.
आगे की राह पर सस्पेंस बरक़रार
बिहार विधानसभा चुनाव से पहले इसे आरजेडी के लिए एक बड़ा राजनीतिक झटका माना जा रहा है क्योंकि मृत्युंजय तिवारी टीवी डिबेट्स से लेकर जमीनी स्तर तक राजद का सबसे मुखर चेहरा थे. भविष्य की राजनीति और किसी दूसरी पार्टी में शामिल होने के सवाल पर उन्होंने फिलहाल अपने पत्ते नहीं खोले हैं. उन्होंने सिर्फ इतना कहा कि वे जनता के सेवक हैं और आखिरी सांस तक सेवा करते रहेंगे, आगे की रणनीति का फैसला समय आने पर होगा.
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