- जिला प्रशासन ने रामपुर की मौलाना मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी के स्पष्टीकरण को किया खारिज
- अतिक्रमण हटाने के लिए 15 दिनों का दिया अल्टीमेटम
लखनऊ. उत्तर प्रदेश की राजनीति में कभी सबसे चर्चित और रसूखदार मानी जाने वाली रामपुर की मौलाना मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी एक बार फिर कानूनी विवादों के भंवर में है. यह वही विश्वविद्यालय है जिसकी नींव रखने के लिए कभी सूबे की पूरी सरकार ही रामपुर आ गई थी. आज इतिहास के पन्नों से निकलकर यह परिसर एक ऐसे मोड़ पर खड़ा है, जहाँ इसके अस्तित्व पर ही संकट मंडराने लगा है.
मुलायम सिंह यादव की ऐतिहासिक पहल और 52 मंत्रियों का मजमा
बात 18 सितंबर 2006 की है, जब उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी की सरकार थी. तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव ने इस परियोजना को अमलीजामा पहनाने के लिए पूरी ताकत झोंक दी थी. आजम खान के इस ‘ड्रीम प्रोजेक्ट’ का शिलान्यास करने के लिए मुलायम सिंह यादव अपने मंत्रिमंडल के 52 मंत्रियों के साथ रामपुर पहुंचे थे.
उस समय इसे क्षेत्र में उच्च शिक्षा और अल्पसंख्यक कल्याण की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम माना गया था. बाद में वर्ष 2012 में इसे पूर्ण विश्वविद्यालय का दर्जा मिला और तत्कालीन सपा सरकार के दौर में यह परिसर विकास की बुलंदियों को छूता गया. करीब 184 एकड़ से अधिक क्षेत्र में फैले इस आलीशान परिसर में कभी 3,000 से अधिक छात्र विभिन्न व्यावसायिक और पारंपरिक पाठ्यक्रमों की पढ़ाई कर रहे थे.
सियासी रसूख से कानूनी पचड़ों तक का सफर
वक्त बदला और सूबे की सत्ता बदलने के साथ ही जौहर यूनिवर्सिटी के सुनहरे दिन कानूनी विवादों में तब्दील होने लगे. वर्ष 2017 में योगी आदित्यनाथ सरकार के आने के बाद इस जमीन के आवंटन और खरीद-फरोख्त की गहन जांच शुरू हुई.
जांच में आरोप लगे कि मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट ने भूमि आवंटन की शर्तों का उल्लंघन किया, किसानों की जमीन पर कथित तौर पर अवैध कब्जे किए और सार्वजनिक रास्तों (चकरोड) को परिसर के अंदर मिला लिया. यह मामला जिला प्रशासन से लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा, जिससे ट्रस्ट को तगड़े कानूनी झटके लगे.
अब 38 भवनों पर चलेगा रामपुर विकास प्राधिकरण का बुलडोजर
ताजा विवाद विश्वविद्यालय परिसर के अवैध निर्माण से जुड़ा है. रामपुर विकास प्राधिकरण (RDA) की जांच में एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि पूरे परिसर में बने कुल 40 भवनों में से केवल 2 भवनों का नक्शा ही स्वीकृत पाया गया है. बाकी 38 भवन बिना किसी प्रशासनिक स्वीकृति के अवैध रूप से खड़े किए गए हैं.
जिलाधिकारी अजय कुमार द्विवेदी ने विश्वविद्यालय प्रबंधन द्वारा दिए गए स्पष्टीकरण को खारिज करते हुए सख्त आदेश जारी किए हैं. प्रबंधन को 15 दिनों का अल्टीमेटम दिया गया है कि वे खुद इन अवैध निर्माणों को हटा लें.
यदि तय समय सीमा के भीतर ऐसा नहीं किया गया, तो रामपुर विकास प्राधिकरण खुद बुलडोजर चलाकर इन 38 भवनों को ध्वस्त कर देगा और इस कार्रवाई का पूरा खर्च भी प्रबंधन से ही वसूला जाएगा. मुलायम सिंह यादव की बड़ी पहल से शुरू हुआ यह सफर आज ढहने की कगार पर आकर रुक गया है.
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