भाेपाल. मध्य प्रदेश की दतिया विधानसभा सीट पर होने वाले आगामी उपचुनाव से ठीक पहले भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में एक बड़ा राजनीतिक भूचाल आ गया है. पार्टी द्वारा पूर्व गृह मंत्री और क्षेत्र के कद्दावर नेता नरोत्तम मिश्रा का टिकट काटकर आशुतोष तिवारी को उम्मीदवार बनाए जाने के बाद दतिया भाजपा में सामूहिक इस्तीफों का दौर शुरू हो गया है. इस फैसले ने न केवल पार्टी के भीतर की गुटबाजी को उजागर किया है, बल्कि क्षेत्र के सामाजिक और राजनैतिक संतुलन को भी पूरी तरह से झकझोर दिया है.
राजनैतिक पहलू: कद्दावर नेतृत्व को दरकिनार करने के मायने
राजनैतिक दृष्टिकोण से दतिया को नरोत्तम मिश्रा का मजबूत गढ़ माना जाता रहा है. हालांकि, 2023 के मुख्य विधानसभा चुनाव में उन्हें कांग्रेस के राजेंद्र भारती से मामूली अंतर से हार का सामना करना पड़ा था. हाल ही में राजेंद्र भारती को एक कानूनी मामले में सजा मिलने के कारण उनकी सदस्यता रद्द हुई, जिससे यहाँ उपचुनाव की स्थिति बनी.
भाजपा आलाकमान द्वारा नरोत्तम मिश्रा की जगह एक नए स्थानीय चेहरे आशुतोष तिवारी पर दांव लगाना संगठन की ‘नई पीढ़ी को आगे बढ़ाने’ की रणनीति का हिस्सा हो सकता है, लेकिन इसका तात्कालिक परिणाम बेहद आक्रामक रहा. भाजपा जिलाध्यक्ष रघुवीर सिंह कुशवाह सहित पूरी जिला कार्यकारिणी, पार्षदों और बूथ अध्यक्षों ने एक साथ सामूहिक इस्तीफा दे दिया है. कार्यकर्ताओं का आरोप है कि यह फैसला ‘एकतरफा’ है. राजनैतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि शीर्ष नेतृत्व ने डैमेज कंट्रोल नहीं किया, तो यह आंतरिक कलह उपचुनाव में भाजपा की संभावनाओं को भारी नुकसान पहुंचा सकती है.
यह पूरी तरह से पार्टी का निर्णय है। मैं सभी पार्टी कार्यकर्ताओं से अपील करता हूँ, विशेषकर सोशल मीडिया पर जो पेट्रोल या केरोसिन डालने वाले वीडियो सामने आ रहे हैं, वैसी हरकतें बिल्कुल न करें। पार्टी फोरम में अपनी बात रखने का एक सही तरीका होता है, इस तरह सड़कों पर बवाल करके बातें नहीं पहुंचाई जातीं।
सामाजिक पहलू: कार्यकर्ताओं का आक्रोश और जनजीवन पर असर
इस राजनैतिक घटनाक्रम का सामाजिक असर भी दतिया की सड़कों पर साफ देखा जा सकता है. टिकट कटने की खबर आते ही हजारों की संख्या में नरोत्तम मिश्रा के समर्थक और कार्यकर्ता सड़कों पर उतर आए. उग्र प्रदर्शनकारियों ने नेशनल हाईवे-44 (NH-44) पर चक्का जाम कर दिया, जिससे कई किलोमीटर लंबा ट्रैफिक जाम लग गया और आम जनता को भारी असुविधा का सामना करना पड़ा.
प्रदर्शनकारियों द्वारा टायर फूंकने और बाजार में दुकानें बंद कराए जाने से स्थानीय व्यापार और सामाजिक शांति पर भी असर पड़ा है. दतिया के सामाजिक ताने-बाने में नरोत्तम मिश्रा की पकड़ सिर्फ एक नेता के तौर पर नहीं, बल्कि एक ‘संकटमोचक’ के रूप में रही है. कार्यकर्ताओं का यह सामूहिक आक्रोश दर्शाता है कि क्षेत्र का एक बड़ा सामाजिक वर्ग इस बदलाव को स्वीकार करने के मूड में नहीं है.
भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व के लिए एक बड़ी परीक्षा
दतिया का यह घटनाक्रम भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व के लिए एक बड़ी परीक्षा है. एक तरफ जहां पार्टी अनुशासन और नए चेहरों को मौका देने की बात करती है, वहीं दूसरी तरफ जमीनी कार्यकर्ताओं की नाराजगी चुनाव का रुख बदल सकती है. अब देखना यह होगा कि पार्टी इस बगावत को कैसे शांत करती है और क्या आशुतोष तिवारी इस राजनैतिक गतिरोध के बीच अपनी चुनावी नैया पार लगा पाते हैं.
भाजपा अब सीनियर नेताओं को किनारे करने की राजनीति कर रही : भूपेश
भाजपा के वरिष्ठ नेता नरोत्तम मिश्रा के टिकट काटने पर शुरू हुई सियासत के बीच पूर्व सीएम भूपेश बघेल ने कहा कि भाजपा बड़े नेताओं को दूध से मक्खी की तरह निकाल फेंकने का काम कर रही है, इसे यूज एंड थ्रो कहा जाता है. यही भाजपा की कार्यशैली है. नरोत्तम मिश्रा जैसे वरिष्ठ फ़ायर ब्रांड नेता पूर्व गृहमंत्री को किस तरह अपमानित कर रहे है. ये साफ-साफ नजर आ रहा है. भाजपा अब सीनियर नेताओं को किनारे करने की राजनीति कर रही है.




यह पूरी तरह से पार्टी का निर्णय है। मैं सभी पार्टी कार्यकर्ताओं से अपील करता हूँ, विशेषकर सोशल मीडिया पर जो पेट्रोल या केरोसिन डालने वाले वीडियो सामने आ रहे हैं, वैसी हरकतें बिल्कुल न करें। पार्टी फोरम में अपनी बात रखने का एक सही तरीका होता है, इस तरह सड़कों पर बवाल करके बातें नहीं पहुंचाई जातीं।
