Close Menu
Ocean PostOcean Post
  • होम
  • झारखंड
    • शिक्षा
    • स्वास्थ्य
  • बिहार
  • रेलवे
  • राजनीति
  • कारोबार
  • देश/दुनिया
  • मीडिया
  • ओसियन स्पेशल
Facebook X (Twitter) Instagram Threads
Ocean PostOcean Post
  • होम
  • झारखंड
    • शिक्षा
    • स्वास्थ्य
  • बिहार
  • रेलवे
  • राजनीति
  • कारोबार
  • देश/दुनिया
  • मीडिया
  • ओसियन स्पेशल
Ocean PostOcean Post
  • होम
  • झारखंड
  • बिहार
  • रेलवे
  • राजनीति
  • कारोबार
  • देश/दुनिया
  • मीडिया
  • ओसियन स्पेशल
Home » झारखंड हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: आदिवासी जमीन हस्तांतरण को अनंत काल तक चुनौती नहीं दी जा सकती
झारखंड

झारखंड हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: आदिवासी जमीन हस्तांतरण को अनंत काल तक चुनौती नहीं दी जा सकती

SHOBHA SINGHBy SHOBHA SINGHJuly 9, 2026
Share Facebook Twitter WhatsApp Telegram Copy Link
Share
Facebook Twitter Telegram WhatsApp Copy Link

रांची. झारखंड हाईकोर्ट ने छोटानागपुर काश्तकारी अधिनियम (CNT एक्ट) के तहत आने वाली आदिवासी भूमि की बहाली (रेस्टोरेशन) से जुड़े मामलों में एक ऐतिहासिक और दूरगामी फैसला सुनाया है. जस्टिस संजय कुमार द्विवेदी की अदालत ने स्पष्ट किया है कि भले ही कानून में स्पष्ट समय-सीमा (Limitation Period) तय न की गई हो, लेकिन इसका यह मतलब बिल्कुल नहीं है कि आदिवासी जमीन के हस्तांतरण को अनंत काल (अनिश्चित काल) तक चुनौती दी जा सकती है.

अदालत ने कहा कि किसी भी कानूनी मामले में कार्रवाई एक उचित समय-सीमा के भीतर ही की जानी चाहिए. दशकों पुराने बंद हो चुके मामलों को बिना किसी ठोस और मजबूत आधार के दोबारा खोलना कानून की मूल मंशा के पूरी तरह खिलाफ है.

क्या है पूरा मामला?

यह पूरा विवाद रांची के चान्हो इलाके की खाता संख्या-41, प्लॉट संख्या-610 की करीब 1.32 एकड़ जमीन से जुड़ा हुआ है. याचिकाकर्ता अमर कुमार चौधरी के अनुसार, उनके पिता ने वर्ष 1947 में यह जमीन ₹2,500 में खरीदी थी और तब से यह उनके कब्जे में थी. वर्ष 1962 में इस भूमि को लेकर एक टाइटल सूट दायर हुआ, जिसका निपटारा 1965 में दोनों पक्षों के बीच आपसी समझौते के आधार पर हो गया.

एसएआर केस (1986-87) : इसके बाद 1986-87 में पहली बार एसएआर (शेड्यूल एरिया रेगुलेशन) केस दायर किया गया. उस समय एसएआर अधिकारी ने पिछले समझौते और सीएनटी एक्ट के प्रावधानों को देखते हुए, समान क्षेत्रफल की दूसरी जमीन आदिवासी रैयत के पक्ष में रजिस्ट्री करने का आदेश दिया. इस आदेश का पालन हुआ, रजिस्ट्री हुई और म्यूटेशन भी हो गया. इस फैसले को किसी ने चुनौती नहीं दी.

दोबारा विवाद (2006): करीब 20 साल बाद वर्ष 2006 में उसी जमीन को लेकर दोबारा एसएआर केस दायर कर दिया गया. हालांकि, तब एसएआर अधिकारी ने इसे ‘रेस जुडीकाटा’ (पहले ही तय हो चुके विवाद) का मामला मानते हुए खारिज कर दिया था. लेकिन बाद में अपीलीय और पुनरीक्षण प्राधिकार ने पुराने आदेशों को पलट दिया, जिसके खिलाफ याचिकाकर्ता को हाईकोर्ट की शरण लेनी पड़ी.

सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला

हाईकोर्ट ने अपने फैसले को मजबूती देने के लिए सुप्रीम कोर्ट द्वारा सीटू साहू और फूलचंद मुंडा के मामले में दिए गए ऐतिहासिक फैसलों का हवाला दिया. अदालत ने कहा कि सीएनटी एक्ट की धारा 71-ए में भले ही समय-सीमा स्पष्ट नहीं है, लेकिन बहाली की कार्रवाई उचित समय के भीतर होनी चाहिए. वर्ष 1988 का आदेश अंतिम रूप ले चुका था और उसके खिलाफ न तो समय पर अपील की गई और न ही कोई नया तथ्य सामने आया था. ऐसे में 2006 में दोबारा मामला शुरू करना कानूनन गलत और अनुचित विलंब से प्रभावित था.

कोर्ट की तल्ख टिप्पणी: “मुआवजा लेने या दूसरी जमीन मिलने के बाद भी सालों बाद दोबारा केस दर्ज करा देना और दूसरे पक्ष को डराना-धमकाना न्यायसंगत नहीं है. ऐसे मामलों पर सख्ती से रोक लगनी चाहिए.”

फैसले का असर और निष्कर्ष

झारखंड हाईकोर्ट ने चान्हो निवासी अमर कुमार चौधरी की याचिका को स्वीकार करते हुए दक्षिण छोटानागपुर प्रमंडलीय आयुक्त और अपर समाहर्ता के उस आदेश को पूरी तरह रद्द कर दिया है, जिसमें 20 साल बाद पहले के आदेश को पलट दिया गया था.

इस फैसले से उन गैर-आदिवासी जमीन खरीदारों को बड़ी राहत मिलेगी जिन्होंने दशकों पहले कानूनी प्रक्रियाओं का पालन करते हुए जमीनें खरीदी थीं. कोर्ट के इस कड़े रुख से आदिवासियों के नाम पर जमीन विवादों को अनिश्चितकाल तक खींचने और ब्लैकमेलिंग या मुकदमेबाजी के जरिए अनुचित लाभ कमाने की प्रवृत्ति पर लगाम लगेगी. अदालत ने साफ कर दिया है कि कानून का उद्देश्य सुरक्षा देना है, न कि दशकों पुराने सुलझ चुके मामलों को बिना वजह जीवित रखकर अराजकता पैदा करना.

  • Author
  • Recent Posts
SHOBHA SINGH
SHOBHA SINGH
Sub Editor at oceanpost
मास कम्युनिकेशन की पृष्ठभूमि, डिजिटल मीडिया में गहराई से रुचि रखने वाली शोभा सिंह हिंदी न्यूज राइटर और OCEANPOST.IN की सब-एडिटर हैं. देश-दुनिया की हलचलों, राजनीति और सामाजिक मुद्दों पर सटीक, निष्पक्ष और विश्वसनीय खबरों को शब्दों के सही चयन और बेहतरीन संपादन (Editing) के जरिए पाठकों तक आसान भाषा में पहुंचा रहीं हैं.
SHOBHA SINGH
Latest posts by SHOBHA SINGH (see all)
  • झारखंड हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: आदिवासी जमीन हस्तांतरण को अनंत काल तक चुनौती नहीं दी जा सकती - July 9, 2026
  • गम्हरिया में भीषण सड़क हादसा : ट्रक की टक्कर से दो युवकों की मौत, आक्रोशित लोगों ने किया सड़क जाम - July 8, 2026
  • बिल्डरों की मनमानी पर कसेगा शिकंजा, झारखंड RERA की कमान अब अजय सिंह के हाथ - July 6, 2026
CNT Act Jharkhand Jharkhand High Court Decision Jharkhand News Tribal Land Restoration अमर कुमार चौधरी आदिवासी जमीन विवाद जमीन हस्तांतरण कानून झारखंड हाईकोर्ट रांची न्यूज सीएनटी एक्ट फैसला
Share. Facebook Twitter Telegram WhatsApp Copy Link
Previous Articleझारखंड विजन 2050 में बोले सीएम हेमंत, खनिज ही नहीं, अब ‘माइंड्स’ और आईटी से बनेगी झारखंड की नई पहचान
SHOBHA SINGH
  • Website

मास कम्युनिकेशन की पृष्ठभूमि, डिजिटल मीडिया में गहराई से रुचि रखने वाली शोभा सिंह हिंदी न्यूज राइटर और OCEANPOST.IN की सब-एडिटर हैं. देश-दुनिया की हलचलों, राजनीति और सामाजिक मुद्दों पर सटीक, निष्पक्ष और विश्वसनीय खबरों को शब्दों के सही चयन और बेहतरीन संपादन (Editing) के जरिए पाठकों तक आसान भाषा में पहुंचा रहीं हैं.

Related Posts

झारखंड

जमशेदपुर में बढ़ते अपराध से परेशान पुलिस की बड़ी कार्रवाई, मानगो मुठभेड़ में अपराधी साहब सिंह उर्फ सब्बे को लगी गोली

July 9, 2026
झारखंड

स्टील सिटी या ‘क्राइम सिटी’? जमशेदपुर में दिनदहाड़े खूनी खेल, मानगो में युवक की हत्या से दहला शहर

July 8, 2026
झारखंड

हिमांशु सिंह हत्याकांड का मुख्य आरोपी ‘मोस्ट वांटेड’ और 2 लाख के इनामी ‘बोदरा’ ने जमशेदपुर कोर्ट में किया सरेंडर

July 8, 2026
Add A Comment
Leave A Reply Cancel Reply

अभी-अभी

झारखंड हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: आदिवासी जमीन हस्तांतरण को अनंत काल तक चुनौती नहीं दी जा सकती

July 9, 2026

झारखंड विजन 2050 में बोले सीएम हेमंत, खनिज ही नहीं, अब ‘माइंड्स’ और आईटी से बनेगी झारखंड की नई पहचान

July 9, 2026

स्वास्थ्य विभाग बेहाल : जिले में मलेरिया से सातवीं मौत, पोटका प्रभारी सस्पेंड, सिविल सर्जन की कब तय होगी जिम्मेदारी!

July 9, 2026

जमशेदपुर में बढ़ते अपराध से परेशान पुलिस की बड़ी कार्रवाई, मानगो मुठभेड़ में अपराधी साहब सिंह उर्फ सब्बे को लगी गोली

July 9, 2026

स्टील सिटी या ‘क्राइम सिटी’? जमशेदपुर में दिनदहाड़े खूनी खेल, मानगो में युवक की हत्या से दहला शहर

July 8, 2026
Advertisement
Ocean Post
Facebook X (Twitter) Instagram YouTube
  • About Us
  • Advertise With Us
  • Privacy Policy
  • Terms and Conditions
  • Contact
© 2026 Ocean Post. Designed by Launching Press.

Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.

Join OceanPost