ROURKELA. आरपीएफ में इस बार स्थानांतरण और पदस्थापना TMM (ट्रांसफर मैनेजमेंट मॉड्यूल) से होगा. ऐसा माना जा रहा है कि 4 जून तक टीएमएम आधारित स्थानांतरण और पदस्थापन की पहली सूची जारी हो सकती है. इस बार TMM से आरपीएफ के इंस्पेक्टर से लेकर जवानों तक के भाग्य का निर्णय होना है, इन सबके बीच अवैध वेंडिंग ने राउरकेला आरपीएफ प्रभारी की टेंशन बढ़ा दी है. कहां जा रहा है कि राउरकेला-झारसुगुड़ा सेक्शन में चल रही अवैध वेंडिंग को लेकर लगातार होने वाली शिकायतों ने दिल्ली डीजी कार्यालय तक हलचल मचायी है और संभव है इस TMM में इनके भाग्य का भी निर्णय हो जायेगा कि वह राउरकेला में बने रहेंगे अथवा यहां से चलता किये जायेंगें.
डीजी सोनाली मिश्रा इस बार SER जोन को लेकर काफी गंभीर है. जोन और डिवीजन में अवैध धंधों में आरपीएफ की संलिप्तता और सीबीआई छापेमारी ने चक्रधरपुर डिवीजन को भी चर्चा में लाया है. ऐसा माना जा रहा है कि TMM के तबादलों में डिवीजन के कुछ RPF पोस्ट प्रभारियों पर भी गाज गिर सकती है. क्योंकि डीजी कार्यालय तक लगातार कुछ स्टेशनों पर अवैध गतिविधियों की शिकायतें पहुंच रही है. इसमें अवैध वेंडिंग, रेलवे टिकट की कालाबाजारी, स्क्रैप टाल, गांजा तस्करी, रेलवे संपत्ति की चोरियां समेत दूसरे अनियमितताएं शामिल हैं. अवैध वेंडिंग तो पूरे जोन में लगभग हर स्टेशन और सभी सेक्शन पर ट्रेनों में चल रही है लेकिन इसके एक खास पैटर्न को लेकर राउरकेला खास तौर पर चर्चा में आता रहा है.

कुछ दिन पहले ही पूर्व ASC/ROU अग्निदेव प्रसाद को प्रेस कॉफ्रेेंस कर मीडिया के सामने अवैध वेंडिंग को लेकर स्थिति स्पष्ट की थी. अब यह सवाल उठना लाजिमी है कि तबादला आदेश जारी होने के बाद ASC/ROU अग्निदेव प्रसाद को मीडिया के सामने आकर उपलब्धियों का बखान क्यों करना पड़ा? जानकार इसके पीछे अवैध वेंडिंग का लेकर चल रही शिकायतों की फेहरिस्त और TMM की दहशत को ही मानते हैं. हालांकि ASC/ROU अग्निदेव प्रसाद का तबादला पहले ही गुंटूर हो चुका है.
इसके बावजूद उन्होंने मीडिया के सामने आकर स्टेशन और ट्रेनों में अवैध वेंडिंग पर अपना पक्ष रखा और माना कि अवैध वेंडिंग तो चल रही है लेकिन ऐसे लोग पकड़े भी जा रहे. उन्होंने यहां तक सफाई दी कि अवैध वेंडरों से आरपीएफ का कोई लेना-देना नहीं होता है. यह भी कहा कि आरपीएफ सीमित संसाधन में बेहतर काम कर रही. इस मीडिया ब्रीफिंग को राउरकेला आरपीएफ प्रभारी इंस्पेक्टर कमलेश समादार के समर्थन में दिया गया स्पष्टीकरण अधिक माना जा रहा है.
उधर अवैध वेंडिंग और अनियमितताओं की मिल रही शिकायतों पर जांच करने कोलकाता से सीआईबी की टीम के राउरकेला पहुंचने की खबर है. यह टीम यहां अवैध वेंडिंग की जांच कर रही है. हालांकि स्थानीय जानकारों का कहना है कि आरपीएफ ने राउरकेला स्टेशन पर ऐसा ताना-बाना तैयार कर रखा है ताकि किसी बाहरी जांच की स्थिति में आसानी से जांच टीम को गुमराह किया जा सके. इसके लिए स्टॉल संचालित वेंडिंग को हथियार बनाया गया है, जिसमें स्टॉल संचालकों को सीमित संख्या में वेंडिंग की छूट दी गयी है.
वाट्सएप ग्रुप बनाकर अवैध वेंडिंग का किया जा रहा संचालन
राउरकेला में इसी व्यवस्था को हथियार के तौर पर इस्तेमाल किया जा रहा. यहां एक ही स्टॉल के नाम पर चार की जगह 12 से 16 वेंडरों का परिचय पत्र कॉमर्शियल विभाग की मिलीभगत से बना लिया गया. सभी वेंडरों का वाटसएप ग्रुप बना दिया गया. इन वेंडरों को अलग-अलग प्लेटफॉर्म पर चार-चार की संख्या में भेजा जाता है. ऐसे में अगर जांच टीम आती है तो इसकी सूचना ग्रुप में डाल दी जाती है. इसके बाद एक प्लेटफॉर्म पर अगर चार वेंडरों की जांच पायी जाती है इस बीच दूसरे प्लेटफॉर्म पर सक्रिय सभी वेंडर बाहर निकल जाते हैं. इस तरह जांच टीम को गुमराह कर दिया जाता है.
ट्रेनों में लोकल ब्रांड के पानी की आपूर्ति कर रहा दलाल
राउरकेला में बिट्टू नाम का एक दलाल सालों से सक्रिय है. यह आरपीएफ का बड़ा दलाल है और अवैध रूप से बाहरी ब्रांड का पानी ट्रेनों में आपूर्ति करता है. इसके पीछे बड़ा नेटवर्क काम कर रहा है. इसकी जानकारी आरपीएफ से लेकर कॉमर्शियल के लोगों को है लेकिन कभी भी सीआई-कैटरिंग इंस्पेक्टर, आरपीएफ प्रभारी ने इसके खिलाफ कार्रवाई करने की जहमत नहीं उठायी. रेलवे बोर्ड के कड़े दिशानिर्देश के बावजूद आईआरसीटीसी एप्रूर्व रेलनीर की जगह लोकल ब्रांड का सस्ता पानी धड़ल्ले से हर दिन ट्रेनों के पेंट्री में चढ़ाया जाता है और उसकी आपूर्ति होती है.
झारसुगुड़ा प्रभारी के अवैध कृत्यों पर IVG/RPF/SER का संदिग्ध मौन !
आरपीएफ के सीआईबी और आईवीजी टीम को अब सफेद हाथी कहा जाने लगा है. इस विंग के पास उपलब्धि के नाम पर कुछ भी दिखाने को नहीं है. छोड़ी-मोटी कार्रवाई को अंजाम देकर टीम के लोग अपना कार्यकाल पूरा कर रहे. कहां जाता है कि पिछले कुछ महीनों में आईवीजी टीम झारसुगुड़ा रेलवे स्टेशन पर अवैध धंधों को लेकर लगातार मौन रही. IVG/RPF/SER ने हर बार झारसुगुड़ा में जांच के नाम पर खानापूर्ति की. बिना अवकाश ड्यूटी से गायब सब इंस्पेक्टर और जवान की ड्यूटी से गैरहाजिरी पकड़े जाने के बावजूद उस पर कोई कार्रवाई नहीं की गयी. कार्यालय में काम करने वाले लोगों काे भी TA और नाइट पेट्रोलिंग के नाम पर भत्ता का भुगतान किया गया. अप्रैल में 9 से 10 के बीच बरपाली में रेल पटरी की चोरी को आरपीएफ ने पीडब्ल्यूआई से मिलीभगत से दबा दिया, पूरा मामला सामने आने के बाद भी सीआईबी और आईवीजी के लोग मौन रहे !
खबरों का पोस्टमार्टम जारी रहेगा ….

