कोलकाता. पश्चिम बंगाल सरकार ने राज्य में सरकारी परियोजनाओं के क्रियान्वयन और ठेका आवंटन की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाने के लिए एक बड़ा और अहम कदम उठाया है। राज्य सरकार ने 26 महत्वपूर्ण विभागों के लिए नई ई-टेंडर व्यवस्था को पूरी तरह से अनिवार्य कर दिया है। यह नई डिजिटल व्यवस्था मंगलवार से विधिवत रूप से लागू हो चुकी है।
पारदर्शिता और तेजी लाना है मुख्य उद्देश्य
सरकार की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार, अब इन सभी चिन्हित विभागों और उनके अधीनस्थ कार्यालयों को सरकारी कार्यों के लिए नए टेंडर केवल निर्धारित ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से ही जारी करने होंगे। इसके बाद पुरानी या पारंपरिक व्यवस्था के तहत नए टेंडर प्रकाशित करने पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है।
अक्सर देखा जाता है कि टेंडर जारी करने, आवेदन प्राप्त करने, प्रस्तावों की जांच करने और ठेका आवंटित करने की लंबी प्रक्रिया में देरी होने के कारण विकास परियोजनाएं समय पर पूरी नहीं हो पाती हैं। इसी समस्या से निजात पाने और सरकारी खरीद प्रक्रिया को एक एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लाकर अधिक पारदर्शी और समयबद्ध बनाने के उद्देश्य से यह बदलाव किया गया है।
किन विभागों को किया गया है शामिल?
इस नई डिजिटल व्यवस्था के दायरे में राज्य के कई प्रमुख विभागों को लाया गया है। दूसरे चरण के तहत लाए गए इन विभागों में कृषि, कृषि विपणन, पशुपालन विकास, स्कूल शिक्षा, उच्च शिक्षा, खाद्य एवं आपूर्ति, उद्योग एवं वाणिज्य, श्रम, पर्यटन, आवासन, मत्स्य और वन विभाग शामिल हैं।
इसके अलावा, सूचना एवं संस्कृति, महिला एवं बाल कल्याण, पिछड़ा वर्ग कल्याण, सहकारिता, उपभोक्ता मामले, कारागार प्रशासन, अग्निशमन सेवाएं, आपदा प्रबंधन, सूचना प्रौद्योगिकी, न्याय विभाग तथा जल संसाधन अन्वेषण एवं विकास विभाग को भी इस नई प्रणाली का सख्ती से पालन करना होगा। वित्त विभाग ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि मुख्यालय के साथ-साथ सभी अधीनस्थ कार्यालयों को भी इसी डिजिटल प्रक्रिया का उपयोग करना होगा, जिससे विकास कार्यों में तेजी आने की पूरी उम्मीद है।


