रांची. भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने मतदाता सूची में नाम दर्ज कराने की प्रक्रिया को बेहद आसान और पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से एक ऐतिहासिक बदलाव किया है. जिन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, वहां अब नए मतदाताओं को फॉर्म-6 के साथ 2003 से जुड़े किसी रिकॉर्ड या अतिरिक्त घोषणा पत्र जमा करने की बाध्यता से मुक्त कर दिया गया है. आयोग के इस फैसले से लाखों नए आवेदकों को बड़ी राहत मिलेगी.
क्या हुआ बड़ा बदलाव?
नए नियमों के अनुसार, जिन राज्यों में एसआईआर प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, वहां अब आवेदकों को अपने माता-पिता या दादा-दादी के 2003 की वोटर लिस्ट में नाम होने का ब्योरा नहीं देना होगा.
- सरल हुई प्रक्रिया: अब नए मतदाताओं को केवल ‘मतदाता पंजीकरण नियम, 1960’ के तहत निर्धारित मानक फॉर्म-6 ही भरना होगा.
- पारदर्शिता और गति: 26 सितंबर को निर्वाचन आयोग की उच्चस्तरीय बैठक के बाद यह फैसला लिया गया, जिससे फॉर्म-6 के माध्यम से नाम जुड़वाने की रफ्तार में तेजी आएगी.
झारखंड: दावा और आपत्ति की समय-सीमा समाप्त, आगे क्या?
झारखंड में वोटर लिस्ट के पुनरीक्षण अभियान के तहत दावा और आपत्ति दर्ज कराने की तय समय-सीमा (30 सितंबर) अब समाप्त हो चुकी है.
- समय सीमा बढ़ाने पर संशय: मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी (CEO) कार्यालय ने मियाद को 60 दिनों के लिए बढ़ाने का प्रस्ताव निर्वाचन आयोग को भेजा था. हालांकि, आयोग की बैठक में इस पर अभी तक कोई अंतिम निर्णय नहीं हो सका है.
- बीएलओ करेंगे घर-घर सत्यापन: अब आयोग के निर्देशानुसार, बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) मतदाताओं के पास घर-घर जाकर लंबित नोटिस, दावा और आपत्तियों का निस्तारण (निपटारा) करेंगे.
- लाखों मतदाताओं की नजरें: यदि आयोग समय-सीमा बढ़ाने की मंजूरी देता है, तो नए मतदाताओं को नाम जुड़वाने का और मौका मिलेगा. अन्यथा, बीएलओ द्वारा घर-घर जाकर निपटाए गए आवेदनों के आधार पर ही अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन किया जाएगा.
आम जनता और नए आवेदकों के लिए क्या हैं इसके मायने?
निर्वाचन आयोग की इस नई व्यवस्था से उन युवा मतदाताओं को सबसे ज्यादा फायदा होगा, जिन्हें 2003 के दस्तावेज या वंशावली से जुड़े रिकॉर्ड खोजने में काफी मशक्कत करनी पड़ती थी. अब सामान्य प्रक्रिया के तहत फॉर्म-6 भरकर आसानी से मतदाता पहचान पत्र बनवाया जा सकेगा.
झारखंड में चुनाव से ठीक पहले मतदाता सूची को दुरुस्त करने का यह अभियान अपने अंतिम चरण में है, और बीएलओ के इस घर-घर सत्यापन अभियान से फर्जी या दोहरे वोटरों की पहचान करने में भी मदद मिलेगी.



