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Home » Tata Sons में रार बरकरार! चंद्रशेखरन की दोबारा नियुक्ति के फैसले से नाखुश टाटा ट्रस्ट्स ने 4:1 की वोटिंग पर उठाए सवाल, जानें क्या कहा?
देश/दुनिया

Tata Sons में रार बरकरार! चंद्रशेखरन की दोबारा नियुक्ति के फैसले से नाखुश टाटा ट्रस्ट्स ने 4:1 की वोटिंग पर उठाए सवाल, जानें क्या कहा?

Ocean News DeskBy Ocean News DeskSeptember 21, 2026
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New Delhi. टाटा ट्रस्ट्स ने एन चंद्रशेखरन को फिर से चेयरमैन नियुक्त करने के टाटा संस के 17 सितंबर के फैसले की वैधता को चुनौती दी है। टाटा ट्रस्ट्स ने तर्क दिया कि कंपनी के आर्टिकल्स ऑफ एसोसिएशन (एओए) के तहत ट्रस्ट द्वारा नामित निदेशकों के बहुमत का समर्थन अनिवार्य है और चेयरमैन का निर्णायक मत इस शर्त को दरकिनार नहीं कर सकता। देश के सबसे बड़े औद्योगिक समूह के निदेशक मंडल में यह विवाद पिछले सप्ताह उस समय गहरा गया, जब टाटा संस के निदेशकों ने कार्यकारी चेयरमैन के रूप में चंद्रशेखरन के नए कार्यकाल को मंजूरी दे दी। इस मतदान को समूह के सबसे बड़े शेयरधारक ने अवैध करार दिया है।

टाटा संस में लगभग दो-तिहाई हिस्सेदारी रखने वाले परोपकारी ट्रस्टों के समूह के प्रमुख नोएल टाटा ने चंद्रशेखरन के कार्यकाल को पांच साल बढ़ाने के खिलाफ अकेला वोट दिया था, जबकि निदेशक मंडल में टाटा ट्रस्ट्स के दूसरे नामित निदेशक वेणु श्रीनिवासन ने इस विस्तार का समर्थन किया था।एक बयान में ट्रस्ट्स ने कहा कि निदेशक मंडल बैठक में कोई गतिरोध नहीं था और दो नामित निदेशकों में एक के विरोध के बाद यह प्रस्ताव वैध रूप से पारित नहीं माना जा सकता।

ट्रस्ट्स ने कहा, ”टाटा संस के निदेशक मंडल में टाटा ट्रस्ट्स के दो नामित निदेशक हैं। दो में से बहुमत का अर्थ दोनों (दो) होता है, न कि एक। इससे पहले 17 सितंबर, 2026 को ऐसे एक निदेशक ने प्रस्ताव के खिलाफ मतदान किया। लिहाजा एओए के अनिवार्य प्रावधान के अनुसार ट्रस्ट द्वारा नामित निदेशकों का सकारात्मक समर्थन नहीं मिला। यह शर्त पूरी नहीं हुई, इसलिए प्रस्ताव भी निष्फल हो गया।”

टाटा संस के निदेशक मंडल ने चंद्रशेखरन को कार्यकारी चेयरमैन के रूप में पांच साल का एक और कार्यकाल देने के पक्ष में 4-1 से मतदान किया था। चंद्रशेखरन ने पहले अगला कार्यकाल नहीं लेने की बात कही थी, लेकिन निदेशक मंडल के पुनर्विचार के अनुरोध के बाद वह पद पर बने रहने के लिए सहमत हो गए थे।

टाटा संस में लगभग 66 प्रतिशत हिस्सेदारी रखने वाले ट्रस्ट्स ने कहा कि निदेशक मंडल के कुल मतों का कोई महत्व नहीं है, क्योंकि एओए ट्रस्ट द्वारा नामित निदेशकों के लिए एक अलग अनिवार्य शर्त तय करता है। ट्रस्ट्स ने कहा, ”मतदान का परिणाम 4:1 था या कोई अन्य आंकड़ा, यह अप्रासंगिक है। कोई शर्त या तो पूरी होती है या नहीं। इस मामले में शर्त पूरी नहीं हुई। ट्रस्ट्स ने इस दलील को भी खारिज कर दिया कि नोएल टाटा के विरोध से गतिरोध पैदा हुआ, जिसे चेयरमैन के निर्णायक मत से सुलझाया जा सकता था।

ट्रस्ट्स ने कहा, ”चेयरमैन का निर्णायक मत केवल तभी प्रभावी होता है जब समग्र निदेशक मंडल स्तर पर मत बराबर हों। यह टाटा ट्रस्ट्स के नामित निदेशकों के बीच लागू नहीं होता। वहां न तो कोई गतिरोध था और न ही कोई ठहराव। निदेशक मंडल ने एक प्रश्न रखा और एओए ने उसका नकारात्मक उत्तर दिया। कंपनी के संविधान द्वारा दिए गए सुरक्षात्मक अधिकार का प्रयोग गतिरोध नहीं है।” ट्रस्ट्स ने आगे कहा कि 17 सितंबर का प्रस्ताव ”वैध रूप से पारित नहीं हुआ था, इसका कोई कानूनी प्रभाव नहीं है” और यह शुरुआत से ही अमान्य है।

Chandrasekaran has raised questions here is what they said. regarding the 4:1 voting outcome; Tata Sons में रार बरकरार! चंद्रशेखरन की The rift within Tata Sons persists! Tata Trusts unhappy with the decision to reappoint जानें क्या कहा? दोबारा नियुक्ति के फैसले से नाखुश टाटा ट्रस्ट्स ने 4:1 की वोटिंग पर उठाए सवाल
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