
Hazaribag. लोक नायक जयप्रकाश नारायण केंद्रीय कारा, हजारीबाग में एक ऐसा दृश्य देखने को मिला, जिसने जेल की कठोर दीवारों के बीच भी ममता, अपनापन और मानवीय संवेदनाओं की गर्माहट महसूस करा दी. एक महिला बंदी के नवजात शिशु के जन्म के छठे दिन कारा प्रशासन और साथी महिला बंदियों ने मिलकर पूरे पारंपरिक रीति-रिवाज के साथ छठियारी पूजन का आयोजन किया. अपने एक गुनाह की वजह से जेल की दीवारों के बीच रहने को मजबूर एक महिला को मां बनने के बाद जेल में भी अपनेपन का एहसास दिलाया गया.
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महिला बंदी के नवजात शिशु के जन्म के छठे दिन जेल प्रशासन और साथी महिला बंदियों ने मिलकर पूरे पारंपरिक रीति-रिवाज के साथ छठियारी पूजन का आयोजन किया. इस दौरान महिला वार्ड को फूलों और रंग-बिरंगे गुब्बारों से सजाया गया. कुछ देर के लिए जेल का माहौल ऐसा हो गया, मानो किसी घर में बच्चे के जन्म की खुशी मनाई जा रही हो. साथी महिला बंदियों ने सोहर (पारंपरिक लोकगीत) और मंगल गीत गाकर नवजात को आशीर्वाद दिया.

गीतों की गूंज के बीच मां की आंखों में खुशी और भावुकता साफ दिखाई दे रही थी. जेल आईजी सुदर्शन मंडल ने बताया कि हमारे जिलों में महिला बंदियो के बच्चों के लिए विशेष व्यवस्था की जाती है. कई जिलों में बच्चों के लिए गोल्डन केज का निर्माण किया गया है. वही जन्म के समय भी जेल प्रशासन के द्वारा पारंपरिक आयोजन भी किए जाते हैं.

