Mumbai. कंपनी कामकाज संचालन सलाहकार फर्म इनगवर्न रिसर्च सर्विसेज ने टाटा संस लिमिटेड के निदेशक मंडल से बिना किसी देरी के शेयर बाजार में सूचीबद्धता की प्रतिबद्धता जताने को कहा है। फर्म का कहना है कि भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) द्वारा होल्डिंग कंपनी की कड़ी नियामकीय निगरानी से बाहर निकलने की कोशिश वाली अर्जी खारिज किए जाने के बाद भारत के सबसे बड़े कारोबारी समूह के पास सूचीबद्धता से बचने का कोई रास्ता नहीं रह गया है।
टाटा संस: बेल द कैट’ शीर्षक वाली अपनी रिपोर्ट में इनगवर्न ने कहा कि 17 सितंबर को होने वाली निदेशक मंडल की बैठक में कंपनी को ‘‘लंबी कानूनी लड़ाई या सूचीबद्धता से बचे रहने के लिए वैकल्पिक ढांचे’’ तलाशने के बजाय आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) की तैयारी शुरू करनी चाहिए।
रिपोर्ट में कहा गया कि इससे टाटा समूह की कंपनियों के करीब 1.77 करोड़ शेयरधारकों को लाभ होगा। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने 11 सितंबर को लिखे पत्र में टाटा संस को सूचित किया था कि उसने मार्च, 2024 में कंपनी की ओर से प्रणाली आधारित महत्वपूर्ण मुख्य निवेश कंपनी (सीआईसी-एनडी-एसआई) के रूप में अपना पंजीकरण वापस लेने के आवेदन को खारिज कर दिया।
टाटा संस ने 21,000 करोड़ रुपये से अधिक का कर्ज पहले ही चुका दिया था और कंपनी शुद्ध नकदी की स्थिति में आ गई थी। इसके बाद उसने पंजीकरण रद्द करने का आवेदन किया था। विश्लेषकों के अनुसार, यह कदम उसे ‘अपर लेयर’ एनबीएफसी श्रेणी से बाहर निकलने का प्रयास था। आरबीआई ने सितंबर, 2022 में उसे इस श्रेणी में रखा था। इस श्रेणी में आने वाली कंपनियों के लिए तीन साल के भीतर शेयर बाजार में सूचीबद्ध होना अनिवार्य होता है।
इनगवर्न के अनुसार, टाटा संस निदेशक मंडल की बैठक में आरबीआई के फैसले, सूचीबद्धता की समयसीमा, कानूनी और निवेश बैंकिंग सलाहकारों की नियुक्ति तथा नेतृत्व से जुड़े मुद्दों पर चर्चा होने की उम्मीद है।



