जमशेदपुर: टेल्को स्टेडियम-भुवनेश्वरी मंदिर मार्ग पर N-111 के पास सुबह एक दर्दनाक हादसा सामने आया. चिन्मया स्कूल के मासूम बच्चों को लेकर स्टेडियम की ओर जा रही एक टाटा विंगर स्कूल वैन अनियंत्रित होकर सड़क के बीचों-बीच बने डिवाइडर से जा टकराई. टक्कर इतनी प्रचंड थी कि वैन का चैंबर तक फट गया और ज़ोरदार धमाके जैसी आवाज़ से पूरा इलाका दहल उठा.
हादसे के तुरंत बाद वैन में सवार बच्चों की चीख-पुकार सुनकर आसपास के लोग और पास स्थित फ्लैट्स के निवासी तुरंत मौके पर पहुंचे. स्थानीय लोगों ने मुस्तैदी दिखाते हुए राहत कार्य शुरू किया और घायल बच्चों को गाड़ी से बाहर निकाला. इस दुर्घटना में करीब 15 से 17 बच्चे घायल हुए हैं. सभी घायलों को इलाज के लिए टाटा मोटर्स अस्पताल भेजा गया है, जहां दो बच्चों और वैन चालक की हालत अत्यंत गंभीर बनी हुई है.
मासूमों की सुरक्षा पर मंडराता खतरा
इस दर्दनाक घटना ने एक बार फिर शहर में स्कूली बच्चों के परिवहन की सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोल कर रख दी है. माता-पिता रोज़ सुबह अपने कलेजे के टुकड़ों को जिस भरोसे के साथ स्कूल वैन में बैठाते हैं, ऐसे हादसे उस भरोसे को पूरी तरह से झकझोर देते हैं. आखिर ओवरस्पीडिंग, चालकों की लापरवाही और वाहनों की फिटनेस पर समय रहते कड़ा संज्ञान क्यों नहीं लिया जाता?
प्रशासन और स्कूल प्रबंधन से बड़े सवाल
- वाहनों की गति और फिटनेस: क्या स्कूली वैन चालकों की गति-सीमा पर नजर रखने के लिए स्पीड गवर्नर अनिवार्य रूप से काम कर रहे हैं?
- चालकों का सत्यापन: क्या बच्चों को ले जाने वाले चालकों के ड्राइविंग कौशल, अनुभव और मानसिक स्थिति का नियमित बैकग्राउंड चेक होता है?
- सुरक्षा मानकों की अनदेखी: अक्सर देखा जाता है कि स्कूल वैन में क्षमता से अधिक बच्चों को बैठाया जाता है, जिससे आपातकालीन स्थिति में नियंत्रण पाना मुश्किल हो जाता है.
यह हादसा महज़ एक दुर्घटना नहीं, बल्कि प्रशासन और स्कूल प्रबंधन के लिए एक चेतावनी है. यदि अब भी सड़कों पर दौड़ रहे कमर्शियल और प्राइवेट स्कूली वाहनों की कड़ाई से जांच नहीं की गई, तो मासूमों की ज़िंदगी यूं ही दांव पर लगती रहेगी. अभिभावक अब शासन और प्रशासन से लापरवाह चालकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और कड़े सुरक्षा दिशानिर्देशों को लागू करने की मांग कर रहे हैं.



