नई दिल्ली. वैवाहिक रिश्तों, धोखा और कानूनी लड़ाइयों से जुड़े एक दिलचस्प मामले में दिल्ली की साकेत कोर्ट ने बेहद अहम फैसला सुनाया है. एक महिला ने आरोप लगाया कि दूसरी महिला ने उसके ‘पति को चुरा लिया’ और उसका घर तोड़ दिया. इस एवज में महिला ने पति की कथित प्रेमिका से 1 करोड़ रुपये हर्जाने (डेमेजेस) की मांग की. हालांकि, अदालत ने सारे तथ्यों और कानूनी पहलुओं को परखने के बाद याचिका को पूरी तरह से खारिज कर दिया.
2001 में शादी से लेकर 2016 तक का घटनाक्रम
इस कानूनी लड़ाई की शुरुआत काफी समय पहले हुई थी. जोड़े की शादी वर्ष 2001 में हुई थी. पत्नी के दावों के अनुसार, वर्ष 2009 में अमेरिका की एक यात्रा के बाद उसके पति के जीवन में एक अन्य महिला का प्रवेश हुआ और दोनों के बीच विवाहेत्तर संबंध (एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर) बन गए.
धीरे-धीरे दोनों के रिश्ते में दरार गहरी होती गई और जनवरी 2013 में पति ने घर छोड़ दिया. इससे पहले वर्ष 2012 में पति ने अदालत में तलाक की अर्जी भी दाखिल कर दी थी. पत्नी का आरोप है कि पति ने वर्ष 2015 में अपनी प्रेमिका से दूसरी शादी कर ली और सितंबर 2016 में दोनों की एक बेटी भी हुई.
1 करोड़ से 50 लाख पर आया हर्जाने का दावा
पति के घर छोड़ने और दूसरी महिला के साथ रहने से आहत पत्नी ने अदालत का रुख किया. उसने पति की प्रेमिका पर आरोप लगाया कि उसने जानबूझकर उनके रिश्ते में दखल दिया और उसके पति का प्यार उससे छीन लिया (जिसे कानून की भाषा में ‘एलियनेशन ऑफ अफेक्शन’ कहा जाता है).
शुरुआत में पत्नी ने ब्याज समेत 1 करोड़ रुपये के हर्जाने की मांग की थी, जिसे बाद में घटाकर 50 लाख रुपये कर दिया गया. उसका तर्क था कि तीसरे व्यक्ति के हस्तक्षेप के कारण ही उसका हँसता-खेलता परिवार टूट गया.
अदालत का फैसला: सिर्फ अफेयर होना हर्जाने का आधार नहीं
साकेत कोर्ट के जिला जज अतुल अहलावत ने इस मामले की सुनवाई करते हुए स्पष्ट किया कि कानून की नजर में सिर्फ विवाहेत्तर संबंध होना या उससे बच्चा पैदा होना किसी तीसरे पक्ष से हर्जाना वसूलने का पर्याप्त आधार नहीं हो सकता.
अदालत के फैसले में मुख्य बातें
- दबाव या उकसावे का सबूत नहीं: पत्नी यह साबित करने में पूरी तरह विफल रही कि प्रेमिका ने उसके पति को शादी तोड़ने, घर छोड़ने या अलग होने के लिए उकसाया या मजबूर किया था.
- दो बालिगों की सहमति: कोर्ट ने कहा कि दो वयस्कों के बीच आपसी सहमति से संबंध बनना और उससे संतान का जन्म होना, अपने आप में यह साबित नहीं करता कि तीसरे व्यक्ति ने दुर्भावना से शादी तुड़वाई है.
- सच्चा प्यार साबित करना जरूरी: हर्जाना पाने के लिए पत्नी को यह साबित करना पड़ता कि कथित दखल से पहले पति-पत्नी के बीच अटूट प्यार था और तीसरे पक्ष के गलत व्यवहार की वजह से ही वह प्यार खत्म हुआ.
इन ठोस साक्ष्यों के अभाव में अदालत ने याचिका खारिज कर दी और साफ संदेश दिया कि वैवाहिक विवादों में केवल आरोप लगाना काफी नहीं है, बल्कि कानूनी आधारों को साबित करना आवश्यक है.





