निखार हत्याकांड के तार जब सिदगोड़ा स्थित ‘विक्रम उद्योग’ और अपराधकर्मी से सफेदपोश बने विक्रम शर्मा के पुराने नेटवर्क तक पहुंचे, तो यह साफ हो गया कि इन हत्यारों के पीछे केवल कुछ शूटरों का हाथ नहीं है, बल्कि इनके वित्तीय साम्राज्य और फंडिंग के स्रोत सफेदपोशों की तिजोरियों से जुड़े हैं.
जमशेदपुर. शहर की आबोहवा में अपराधियों की गोलियों की गूंज और परदे के पीछे बैठे सफेदपोशों का संरक्षण अब शहर के माथे पर एक गहरा नासूर बन चुका है. कारोबारी निखार सबलोक हत्याकांड की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, इसने शहर के उस खौफनाक सच को बेनकाब कर दिया है जहां अपराध, राजनीति और अकूत अवैध कमाई का गठजोड़ खुलेआम फल-फूल रहा है.
चांडिल थाना क्षेत्र के टेंथ माइलस्टोन होटल के पास हुई निखार सबलोक की हत्या कोई मामूली वारदात नहीं है, बल्कि यह शहर के कुख्यात अपराधी समूहों के बीच वर्चस्व की खूनी जंग और उनके राजनीतिक-व्यापारिक संरक्षकों के काले कारनामों की एक सोची-समझी दास्तान है.
अखिलेश-गणेश गिरोह का वर्चस्व और सफेदपोशों की ढाल
जमशेदपुर के आपराधिक इतिहास में वर्चस्व की जंग हमेशा से खूनी रही है. यहां अखिलेश सिंह और गणेश सिंह जैसे गिरोह शहर के युवाओं और कारोबारियों के लिए खौफ का पर्याय बन चुके हैं. इन गिरोहों के बीच अवैध उगाही, रंगदारी के स्रोतों पर कब्जा जमाने की अंधी दौड़ ने शहर की कानून-व्यवस्था को गंभीर चुनौती दी है.
इन सरगनाओं को यह अच्छी तरह मालूम होता है कि जमीन पर भले ही गोलियां उनके शूटर चलाएं, लेकिन उनकी ढाल बनने के लिए परदे के पीछे कुछ बड़े सफेदपोश हमेशा तैयार रहते हैं. यही वजह है कि अपराध और राजनीति का यह गठजोड़ पुलिस के लिए भी एक बड़ी पहेली बना रहता है.
हाल ही में इस हत्याकांड में अशोक सिंह उर्फ राघव के सोनारी स्थित डिजिटल मीडिया कार्यालय की गहन पड़ताल के बाद मंगलवार को पुलिस की जांच सिदगोड़ा स्थित ‘विक्रम उद्योग’ तक पहुंच गयी. इससे यह तो साफ हो गया कि इन हत्यारों के पीछे केवल कुछ शूटरों का हाथ नहीं है, बल्कि इनके वित्तीय साम्राज्य और फंडिंग के स्रोत सफेदपोशों की तिजोरियों से जुड़े हैं.
पुलिस की संदेहास्पद भूमिका और अपराधियों की तैयार फसल
शहर के आम लोगों के मन में आज एक बहुत बड़ा सवाल यह है कि आखिर ये अपराधी इतने बेखौफ कैसे हो गए? कालांतर में पुलिस की मौन भूमिका और ढुलमुल रवैये ने ही अपराधियों की इस फसल को तैयार करने में पूरी मदद की, जिसका खामियाजा आज पूरा शहर भुगत रहा है. जब-जब पुलिस ने अपराधियों के खिलाफ खानापूर्ति वाली कार्रवाई की, तब-तब उनका मनोबल और बढ़ता गया. सोनारी और सिदगोड़ा में हाल ही में हुई ताबड़तोड़ छापेमारी से भले ही कुछ उम्मीदें जगी हों, लेकिन जनता अब सिर्फ छिटपुट छापों से संतुष्ट होने वाली नहीं है.
सिंडिकेट ध्वस्त हो और टूटे अपराधियों की धमक
निखार सबलोक हत्याकांड ने जमशेदपुर के सभ्य समाज को झकझोर कर रख दिया है. यह सिर्फ एक युवा कारोबारी की निर्मम हत्या नहीं है, बल्कि यह उस सड़ी-गली व्यवस्था पर सवालिया निशान है जो चंद सफेदपोशों के मुनाफे के लिए पूरे शहर को अपराधियों के हवाले कर देती है.
आम लोगों की मांग है कि जांच एजेंसियां और पुलिस प्रशासन बिना किसी राजनीतिक दबाव के अपनी निष्पक्षता साबित करे. पुलिस केवल शूटरों को पकड़कर औपचारिकता न निभाए, बल्कि अपराधियों के इन तमाम गिरोहों को पूरी तरह से ध्वस्त करे. जब तक इन दुर्दांत अपराधियों के नाम पर चल रहे आर्थिक सिंडिकेट, अवैध धंधों और उनके सफेदपोश मददगारों के चेहरों को बेनकाब कर उन्हें कानून के कटघरे में खड़ा नहीं किया जाता, तब तक जमशेदपुर की गलियों से खौफ का यह साया कभी दूर नहीं हो सकता.



