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Home » महंगी चीनी के लिए एथनॉल जिम्मेदार नहीं. सरकार ने बताया, बाजार में कैसे कृत्रिम तरीके से बढ़ाए गए दाम
देश/दुनिया

महंगी चीनी के लिए एथनॉल जिम्मेदार नहीं. सरकार ने बताया, बाजार में कैसे कृत्रिम तरीके से बढ़ाए गए दाम

Ocean News DeskBy Ocean News DeskAugust 22, 2026
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देश में चीनी की कीमतों में हो रही अचानक बढ़ोतरी को लेकर केंद्र सरकार ने स्थिति पूरी तरह स्पष्ट कर दी है. सरकार ने उन दावों को सिरे से खारिज कर दिया है, जिनमें कहा जा रहा था कि एथनॉल उत्पादन के लिए गन्ने या चीनी का इस्तेमाल किए जाने की वजह से कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं. केंद्रीय खाद्य सचिव संजीव चोपड़ा ने स्पष्ट किया है कि चीनी के दामों में हालिया उछाल के पीछे उद्योग जगत की कृत्रिम रणनीति और मुनाफाखोरी है, न कि उत्पादन की कोई वास्तविक कमी.

महज 15 दिनों में बढ़े दाम, सरकार ने उठाए सख्त कदम

पिछले कुछ हफ्तों में खुदरा बाजार में चीनी की कीमतों में बड़ा अंतर देखने को मिला है. अखिल भारतीय औसत खुदरा कीमत जो कुछ समय पहले 48 रुपये प्रति किलोग्राम थी, वह बढ़कर 56 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गई है. वहीं, मिलों के स्तर पर कीमतें महज सात से दस दिनों के भीतर 47-48 रुपये से उछलकर 62 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गईं. खाद्य सचिव ने इस तीव्र मूल्य वृद्धि को पूरी तरह अनुचित बताया है.

सरकार का कहना है कि देश में घरेलू स्तर पर चीनी की सालाना मांग लगभग 280 से 285 लाख टन है. हालांकि, इस वर्ष गन्ने की फसल में रोगों के लगने तथा अधिक बारिश के कारण जलभराव से उत्पादन 343 लाख टन के शुरुआती अनुमान से घटकर 306 लाख टन रहने की उम्मीद है, फिर भी देश में घरेलू मांग को पूरा करने के लिए पर्याप्त चीनी का भंडार मौजूद है. इसके बावजूद बाजार में कृत्रिम कमी का माहौल बनाया जा रहा है.

एथनॉल उत्पादन का तर्क बेबुनियाद

इस बात पर जोर दिया गया है कि चीनी के दामों में तेजी का एथनॉल निर्माण से कोई सीधा ताल्लुक नहीं है. चालू विपणन वर्ष में एथनॉल उत्पादन के लिए केवल 28 लाख टन चीनी का ही उपयोग हुआ है. अब विविधीकरण के कारण एथनॉल का केवल एक-चौथाई हिस्सा ही चीनी से बनता है, जबकि बाकी का बड़ा हिस्सा मक्के जैसे अन्य अनाजों से तैयार किया जा रहा है. इसलिए एथनॉल को इसके लिए जिम्मेदार ठहराना गलत है.

जमाखोरी और कालाबाजारी पर नकेल

बढ़ती कीमतों पर लगाम लगाने के लिए केंद्र सरकार ने कई एहतियाती और कड़े कदम उठाए हैं:

  • शुल्क-मुक्त आयात: सरकार ने 31 अक्टूबर तक 10 लाख टन कच्ची चीनी के शुल्क-मुक्त आयात की अनुमति दे दी है.
  • भंडारण सीमा: कारोबारियों के साथ-साथ कोल्ड ड्रिंक्स और आइसक्रीम जैसी चीजों का निर्माण करने वाले थोक उपभोक्ताओं पर स्टॉक की सीमा तय कर दी गई है. 1 सितंबर से थोक उपभोक्ताओं को 15 दिन की खपत से ज्यादा चीनी रखने की अनुमति नहीं होगी.
  • राज्य सरकारों को निर्देश: प्रमुख चीनी उत्पादक राज्यों को यह सख्त निर्देश दिए गए हैं कि वे जमाखोरों, सट्टेबाजों और कालाबाजारियों के खिलाफ तुरंत कड़ी कार्रवाई करें.

त्योहारी सीजन में राहत की उम्मीद

सरकार का अनुमान है कि सितंबर के अंत तक देश में 33 से 35 लाख टन चीनी का सुरक्षित भंडार उपलब्ध रहेगा. इसके अलावा, इस साल चीनी मिलों में 15 अक्टूबर के आसपास पेराई सत्र जल्दी शुरू होने की संभावना है, जिससे अक्टूबर के महीने में लगभग 10 से 12 लाख टन अतिरिक्त चीनी बाजार में आ जाएगी. इन तमाम प्रशासनिक और नीतिगत कदमों के बाद, सरकार को पूरी उम्मीद है कि आने वाले त्योहारी सीजन में उपभोक्ताओं को चीनी की उपलब्धता को लेकर किसी प्रकार की समस्या का सामना नहीं करना पड़ेगा.

Ethanol Production Sugar Price Hike एथनॉल उत्पादन खाद्य मंत्रालय चीनी की कीमत जमाखोरी
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