पटना. बिहार के मधुबनी जिले से एक बेहद शर्मनाक, खौफनाक और कानून-व्यवस्था की पोल खोलने वाली घटना सामने आई है, जिसने पूरे पुलिस महकमे को हिलाकर रख दिया है। बाबूबरही थाना क्षेत्र के बलिराजगढ़ पुलिस पिकेट में तैनात एएसआई (ASI) चंद्रमोहन सिंह की करतूत ने यह साबित कर दिया है कि जब रक्षक ही भक्षक बन जाए, तो आम जनता की सुरक्षा भगवान भरोसे ही रह जाती है।
क्या है पूरा मामला?
प्राप्त जानकारी के मुताबिक, आरोपी ASI चंद्रमोहन सिंह अक्सर एक महिला के घर आता-जाता था। बीती रात भी वह उसी महिला के घर पहुंचा था, जहां स्थानीय लोगों ने उसे आपत्तिजनक स्थिति में रंगे हाथ पकड़ लिया। आक्रोशित ग्रामीणों ने तुरंत समझदारी दिखाते हुए उसे घर के अंदर ही घेर लिया और बाहर से कमरा बंद कर दिया। देखते ही देखते मौके पर भारी भीड़ जमा हो गई। खुद को घिरता देख और अपनी पोल खुलती देख ASI मानसिक संतुलन खो बैठा और बौखलाहट में उसने अपनी सरकारी सर्विस रिवॉल्वर निकाल ली।
अंधाधुंध फायरिंग से मचा कोहराम
भीड़ से घबड़ाए इस लापरवाह पुलिसकर्मी ने कानून और खाकी की गरिमा को ताक पर रखकर बाहर खड़े निर्दोष लोगों पर ताबड़तोड़ गोलियां बरसानी शुरू कर दीं। अचानक हुई इस गोलीबारी से मौके पर भगदड़ मच गई। इस खूनी खेल में विजय यादव नामक एक व्यक्ति की गोली लगने से दर्दनाक मौत हो गई, जबकि तीन अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। घायलों को तुरंत अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उनकी हालत नाजुक बनी हुई है।
सुरक्षा व्यवस्था पर बड़ा सवालिया निशान
यह घटना सिर्फ एक आपराधिक मामला नहीं है, बल्कि यह इस बात का गंभीर उदाहरण है कि जिन पुलिसकर्मियों के कंधों पर आम जनता की सुरक्षा की जिम्मेदारी है, वे खुद किस तरह कानून की धज्जियां उड़ा रहे हैं। घटना के बाद से आरोपी ASI चंद्रमोहन सिंह फरार है और पुलिस उसकी तलाश में जुटी है। मौके पर एसपी योगेंद्र कुमार ने पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया है और भारी पुलिस बल तैनात किया गया है।
यह घटना न सिर्फ समाज के लिए बल्कि पूरे प्रशासनिक तंत्र के लिए एक गंभीर चेतावनी और चिंता का विषय है कि आखिर जनता उन खाकीधारियों पर कैसे भरोसा करे जो खुद ही अपराधियों जैसा आचरण करने लगे हैं।


