सरायकेला/जमशेदपुर. झारखंड के सरायकेला-खरसावां जिले में सरायकेला पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा बलों की संयुक्त कार्रवाई ने भाकपा (माओवादी) संगठन की रीढ़ तोड़ दी है. पुलिस रिमांड पर लिए गए तीन शीर्ष माओवादी कैडरों की निशानदेही पर कुचाई के सिकरम्बा जंगल और चांडिल के आसनबनी स्थित दलमा पहाड़ी इलाकों में चलाए गए आक्रामक सर्च ऑपरेशन के दौरान 2 .303 राइफल, 1 इन्सास, 1 SLR, 2 देशी पिस्टल, 300 से अधिक कारतूस और मौके पर ही नष्ट की गई IED समेत विस्फोटकों का भारी जखीरा बरामद किया गया है. यह बड़ी सफलता केवल एक सैन्य उपलब्धि नहीं है, बल्कि कोल्हान प्रमंडल में नक्सली नेटवर्क को पूरी तरह से ध्वस्त करने की दिशा में एक निर्णायक कदम है.
नक्सली नेटवर्क और गुप्त शस्त्र भंडारों पर प्रहार
सुरक्षा बलों की गिरफ्त में आए माओवादी सब जोनल कमेटी सदस्य रवि सिंह सरदार उर्फ सागर सिंह सरदार, रीजनल कमेटी सदस्य मदन महतो उर्फ चरण महतो और सब जोनल कमांडर मीना पहाड़िया उर्फ नेपू पहाड़िया कोल्हान और दलमा क्षेत्र में हिंसा और लेवी वसूली के मुख्य सूत्रधार रहे हैं. शीर्ष कैडरों की गिरफ्तारी के साथ-साथ उनके गुप्त ठिकानों से अत्याधुनिक हथियारों और गोला-बारूद की बरामदगी यह साबित करती है कि संगठन का लॉजिस्टिक्स, खुफिया ढांचा और रसद तंत्र अब पूरी तरह बिखर चुका है.
संयुक्त कार्रवाई और बेहतर तालमेल
यह ऑपरेशन झारखंड पुलिस, 209 कोबरा बटालियन (खूंटी) और 26वीं वाहिनी एसएसबी (रांची) के सटीक समन्वय का उदाहरण है. सरायकेला-खरसावां के पुलिस अधीक्षक के नेतृत्व में कांड्रा, चांडिल, नीमडीह, कुचाई, चौका और गमहरिया समेत कई थानों के बलों ने जिस मुस्तैदी से घने जंगलों में यह अभियान चलाया, उसने सुरक्षा बलों की आक्रामक रणनीति को साबित किया है.
‘ऑपरेशन नवजीवन-II’ और आत्मसमर्पण की लहर
सरायकेला और सारंडा के इलाकों में पुलिस के बढ़ते दबाव का ही नतीजा है कि हाल ही में ‘ऑपरेशन नवजीवन-II’ के तहत 16 माओवादियों ने हथियारों के साथ आत्मसमर्पण किया था. एक तरफ आत्मसमर्पण की आसान राह और दूसरी तरफ ताबड़तोड़ गिरफ्तारियां व हथियारों की बरामदगी इस दोहरी रणनीति ने माओवादियों के मनोबल को पूरी तरह तोड़ दिया है. जो इलाके कभी नक्सलियों के सुरक्षित पनाहगाह माने जाते थे, वहां अब उनका अस्तित्व समाप्त होने की कगार पर है.
क्षेत्र में शांति और विकास का मार्ग प्रशस्त
कुचाई और दलमा के दुर्गम जंगलों से विस्फोटकों और हथियारों का यह जखीरा जब्त होना स्थानीय ग्रामीणों के लिए एक नया सवेरा लेकर आया है. भयमुक्त माहौल बनने से क्षेत्र में सड़कों, स्कूलों और बुनियादी सुविधाओं के विस्तार को गति मिलेगी.
सरायकेला और दलमा में मिली यह सफलता इस बात की स्पष्ट पुष्टि करती है कि कोल्हान प्रमंडल अब नक्सलवाद के अंतिम अध्याय की ओर बढ़ चुका है और जल्द ही यह पूरा क्षेत्र स्थायी शांति व सुरक्षा की दिशा में पूर्ण रूप से स्थापित हो जाएगा.


