रांची. झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में हुई भारी गड़बड़ी और धांधली के मामले में सीआईडी (CID) की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, बड़े-बड़े नाम और चौंकाने वाले खुलासे सामने आ रहे हैं. इस बहुचर्चित परीक्षा घोटाले के तार अब राज्य के वरिष्ठ प्रशासनिक गलियारे से भी जुड़ते नजर आ रहे हैं. सीआईडी की पूछताछ में गिरफ्तार आरोपियों के बयानों के बाद वरिष्ठ आईएएस अधिकारी मनीष रंजन का नाम भी इस पूरे सिंडिकेट में सामने आया है.
हरिओम टावर में बना था ‘सेटिंग’ का केंद्र
मामले में गिरफ्तार टीडीपीएल (TDPL) के मार्केटिंग मैनेजर अभय तिवारी ने सीआईडी के समक्ष दिए गए अपने बयान में यह सनसनीखेज खुलासा किया है कि परीक्षार्थियों को सफलता दिलाने के लिए रांची के प्रसिद्ध हरिओम टावर में बाकायदा एक फ्लैट किराए पर लिया गया था. इस फ्लैट में उत्तर प्रदेश और बिहार से विषय विशेषज्ञों (एक्सपर्ट्स) को बुलाकर रखा जाता था, जो अभ्यर्थियों से मुख्य परीक्षा के उत्तर लिखवाने का काम करते थे. इसके अलावा, जिन अभ्यर्थियों के उत्तर थोड़े बेहतर होते थे, उनके अंक बढ़ाने के लिए कुछ प्रोफेसरों की भी मदद ली जाती थी.
OMR शीट में हेरफेर और 40 लाख की डील
अभय तिवारी ने स्वीकार किया है कि एसीएफ (ACF) और एफआरओ (FRO) जैसी महत्वपूर्ण परीक्षाओं में अपने अभ्यर्थियों के अंक बढ़वाने और मुख्य परीक्षा में उत्तर लिखवाने के लिए करीब 40 लाख रुपये दिए गए थे. सीडीपीओ (CDPO) परीक्षा में भी प्रति अभ्यर्थी लगभग 10 लाख रुपये की दर तय की गई थी.
इसी मामले में गिरफ्तार टीडीपीएल के निदेशक रामवीर सिंह ने खुलासा किया कि परीक्षा में अभ्यर्थियों द्वारा खाली छोड़े गए गोलों (OMR शीट) को बाद में सही उत्तरों से भर दिया जाता था. इसके लिए आंसर-की (Answer Key) को मूल्यांकन प्रक्रिया शुरू होने से पहले ही लीक कर संबंधित कर्मचारियों को दे दिया जाता था, ताकि आंकड़ों में आसानी से मैनिपुलेशन की जा सके.
आईएएस मनीष रंजन का नाम और प्रशासनिक कनेक्शन
अभय तिवारी के बयान के अनुसार, टीडीपीएल के शीर्ष अधिकारियों रामवीर सिंह और सतपाल सिंह का वरिष्ठ आईएएस अधिकारी मनीष रंजन के सरकारी आवास पर नियमित आना-जाना था. आरोपी का दावा है कि उसने इन्हीं अधिकारियों से सुना था कि 14वीं जेपीएससी परीक्षा में आईएएस मनीष रंजन की सिफारिश पर तीन अभ्यर्थियों को अनुचित लाभ पहुंचाकर मदद कराई गई थी.
इतना ही नहीं, एफआरओ प्रारंभिक परीक्षा के बाद मुख्य सचिव के आवास पर तैनात एक कंप्यूटर ऑपरेटर (धर्मेंद्र) और अन्य लोगों के माध्यम से 15 से अधिक अभ्यर्थियों की रोल नंबर सूची तैयार कर OMR शीट में बदलाव कराए गए थे. इसके एवज में प्रति अभ्यर्थी 8 से 10 लाख रुपये की वसूली की बात सामने आई है.
सीआईडी की जांच तेज
सिंडिकेट द्वारा कुल 40 से 50 अभ्यर्थियों को पास कराने के बदले विभिन्न किस्तों में करीब 1.10 करोड़ रुपये की नकद राशि के लेनदेन का दावा किया गया है. वर्तमान में सीआईडी इन बयानों के आधार पर संबंधित अधिकारियों के लिंक और दावों का तकनीकी व भौतिक सत्यापन कर रही है, जिससे आने वाले दिनों में और कई बड़ी गिरफ्तारियों की संभावना जताई जा रही है.


