जमशेदपुर, लोहनगरी के एक प्रतिष्ठित अखबार ने सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की बारीकी से पड़ताल करते हुए सिस्टम की पोल खोलने का प्रयास किया है. अखबार ने एमजीएम अस्पताल के खराब पड़े लिफ्ट में कुत्ते के आराम करते हुए तस्वीर के साथ ही कर्मचारी और आम लोगों की परेशानियों का बारीकी से मुआयना करते हुए यह बताया है कि सिस्टम की खामियों के कारण विभाग के कर्मचारी कितने परेशान है.

लेकिन कमाल और दिलचस्प है कि इस अखबार में कभी भी जमशेदपुर सदर अस्पताल की खामियों पर एक भी ‘शब्द’ लिखा गया हो, जबकि सदर अस्पताल में कुत्तों के आतंक से मरीज परेशान है आलम यह है कि दर्जनों की संख्या में कुत्ते यहां मुख्य द्वार से लेकर परिसर में विचरण करते देखे जाते है. इससे मरीजों में भय का आलम बना रहता है. मरीजों का सवाल यह है कि आखिर इस अखबार को सदर अस्पताल की कमियां क्यों नजर नहीं आती? यहां बेखौफ मरीजों के बीच घुमने वाले दहशत के पर्याय कुत्ते क्यों नजर नहीं आते…?
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