जमशेदपुर. आदित्यपुर स्थित होटल क्रूज में कन्फेडरेशन ऑफ इंडियन इंडस्ट्री (CII) के झारखंड चैप्टर की ओर से दो दिवसीय ‘सेफ्टी टॉक’ सम्मेलन का आयोजन किया गया। इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए टाटा स्टील के वाइस प्रेसिडेंट (सेफ्टी, हेल्थ एंड सस्टेनेबिलिटी) राजीव मंगल ने औद्योगिक सुरक्षा को लेकर एक बड़ा बयान दिया है। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि कार्यस्थलों पर सुरक्षा मानकों को लेकर कंपनियों और प्रबंधन को अब बेहद गंभीर और संवेदनशील होना पड़ेगा।
सिंगापुर और ऑस्ट्रेलिया की तर्ज पर हो सख्त व्यवस्था
श्री मंगल ने अपने संबोधन में सिंगापुर का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां यदि कोई जानलेवा औद्योगिक दुर्घटना होती है, तो कंपनी के मालिक, ठेकेदार और प्रबंधक तक को सीधे जेल भेजने का प्रावधान है। उन्होंने अफसोस जताया कि भारत में अभी वैसी कानूनी सख्ती नहीं है, लेकिन देश के उद्योगों को स्वेच्छा से ऐसी ही कड़ाई अपनाने की जरूरत है। उन्होंने ऑस्ट्रेलिया का जिक्र करते हुए कहा कि वहां जोखिम भरे स्थानों पर कर्मचारी खुद सुरक्षा मानकों की अनदेखी होने पर काम करने से साफ इनकार कर देते हैं, जो एक बेहतरीन कार्य संस्कृति है।
एमएसएमई सेक्टर और एसओपी पालन पर जोर
टाटा स्टील के वीपी ने इस बात पर चिंता जताई कि बड़ी कंपनियां तो आधुनिक तकनीक अपना रही हैं, लेकिन सीमित संसाधनों के कारण छोटी और एमएसएमई कंपनियां सुरक्षा उपकरणों और प्रशिक्षण पर पर्याप्त खर्च नहीं कर पाती हैं। उन्होंने बड़ी औद्योगिक इकाइयों से अपील की कि वे छोटी कंपनियों को भी साथ लेकर चलें। इसके अलावा, उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि अक्सर स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (एसओपी) का पालन न करना ही बड़े हादसों की मुख्य वजह बनता है।
असुरक्षित माहौल में काम करने से करें इनकार
कार्यक्रम के अंत में उन्होंने सभी औद्योगिक कर्मचारियों से अपील की कि वे अपनी जान जोखिम में डालकर किसी भी असुरक्षित परिस्थिति में काम न करें और सुरक्षा व्यवस्था में खामी दिखने पर बेझिझक आवाज उठाएं। एक भी जानलेवा दुर्घटना कंपनी के तमाम उत्पादन लक्ष्यों पर सवालिया निशान लगा देती है, इसलिए सुरक्षा को हर हाल में पहली प्राथमिकता बनाना चाहिए।


