रांची. देशभर के स्वास्थ्य तंत्र और आम जनता की सेहत को लेकर एक बेहद चिंताजनक और डरावनी तस्वीर सामने आई है। केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) की हालिया रिपोर्ट ने यह खुलासा कर दिया है कि बाजार में बिकने वाली दवाएं और कॉस्मेटिक्स कितने बड़े पैमाने पर मानकों पर खरी नहीं उतर रही हैं।
इस रिपोर्ट के अनुसार, देश भर में कुल 330 दवाएं और कॉस्मेटिक्स गुणवत्ता जांच में पूरी तरह फेल हो गए हैं। इस सनसनीखेज खुलासे के बाद जमशेदपुर समेत पूरे कोल्हान प्रमंडल में औषधि विभाग ने हड़कंप के बीच एक सघन जांच अभियान शुरू कर दिया है।
गंभीर बीमारियों की दवाओं में भारी मिलावट और खामियां
यह स्थिति इसलिए भी अधिक भयावह है क्योंकि जिन उत्पादों को गुणवत्ता जांच में फेल पाया गया है, उनमें आम जीवन से जुड़ी बेहद जरूरी और जीवनरक्षक दवाएं शामिल हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, बुखार में दी जाने वाली पैरासिटामोल, एंटीबायोटिक्स, उच्च रक्तचाप (बीपी), थायराइड और मधुमेह (डायबिटीज) जैसी गंभीर बीमारियों के इलाज में प्रयुक्त होने वाली दवाओं के सैंपल मानक स्तर के नहीं पाए गए हैं।
इसके अलावा, वजन घटाने और मधुमेह के इलाज में काम आने वाले कुछ इंजेक्शन भी जांच के दायरे में हैं। सोचिए, जिस मरीज को बीमारी से लड़ने के लिए दवा दी जा रही हो, यदि वही दवा गुणवत्ताहीन या नकली निकल जाए, तो उस मरीज की जिंदगी पर कितना बड़ा खतरा मंडरा सकता है।
त्वचा के लिए जहर बन रहे कॉस्मेटिक्स और ब्यूटी प्रोडक्ट्स
सिर्फ दवाइयां ही नहीं, बल्कि सौंदर्य प्रसाधन (कॉस्मेटिक्स) भी इस लापरवाही के दायरे में हैं। सीडीएससीओ की रिपोर्ट में पांच प्रमुख कॉस्मेटिक उत्पादों में निर्धारित सीमा से कई गुना अधिक ‘पारा’ (Mercury) पाया गया है। इनमें गोरी क्रीम के चार उत्पाद और एक खतरनाक बॉडी लोशन शामिल हैं। इसके साथ ही, कुछ लोकप्रिय फेयरनेस क्रीम में ‘हाइड्रोक्विनोन’ जैसे हानिकारक तत्व भी मिले हैं, जो त्वचा को गंभीर रूप से नुकसान पहुंचा सकते हैं।
प्रशासनिक सख्ती और आगे की कार्रवाई
इस गंभीर स्थिति को देखते हुए कोल्हान प्रमंडल में औषधि विभाग ने कड़े कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। ड्रग इंस्पेक्टर सोनी बारा और अन्य अधिकारियों ने सभी दवा कारोबारियों को नोटिस भेजकर उन बैचों की पूरी सूची मांगी है जो गुणवत्ता परीक्षा में विफल रहे हैं। कारोबारियों से यह हिसाब मांगा जा रहा है कि इन संदिग्ध दवाओं की कितनी खेप बाजार में आई, कितनी बिकी और कितना स्टॉक अभी भी मेडिकल स्टोरों में मौजूद है।
विभाग ने सभी मेडिकल दुकानों को सख्त निर्देश दिए हैं कि वे तुरंत इन बैचों की दवाओं की बिक्री रोक दें, ताकि उन्हें बाजार से वापस (रिकॉल) मंगाया जा सके। यह पूरा घटनाक्रम हमारे नियामक तंत्र और स्वास्थ्य सुरक्षा पर एक बड़ा सवालिया निशान लगाता है, जहां आम जनता के स्वास्थ्य के साथ ऐसा गंभीर खिलवाड़ हो रहा है।


