नई दिल्ली. रियल एस्टेट सेक्टर में घर खरीदारों के हितों को सबसे ऊपर रखने और उन्हें सुरक्षित करने के लिए फोरम फॉर पीपल्स कलेक्टिव एफर्ट्स (FPCE) ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक महत्वपूर्ण पत्र लिखा है। इस पत्र में RERA (रियल एस्टेट रेगुलेशन एंड डेवलपमेंट एक्ट) के मौजूदा प्रावधानों में बड़े बदलाव की मांग की गई है ताकि घर खरीदारों के साथ होने वाली धोखाधड़ी और अनियमिताओं पर पूरी तरह लगाम लगाई जा सके।
घर खरीदारों की सुरक्षा सर्वोपरि
FPCE, वही संगठन है जिसने अतीत में रियल एस्टेट (रेगुलेशन एंड डेवलपमेंट) एक्ट के लिए चले ऐतिहासिक आंदोलन का प्रमुख रूप से नेतृत्व किया था। संगठन का मुख्य तर्क यह है कि देश में रियल एस्टेट सेक्टर के व्यावसायिक प्रमोशन और विकास को, घर खरीदारों के कानूनी संरक्षण से पूरी तरह अलग रखा जाना चाहिए। वर्तमान व्यवस्था में कई बार विकास और निर्माण को प्राथमिकता मिलने के कारण आम खरीदार के अधिकारों और हितों की अनदेखी हो जाती है।
FPCE द्वारा सुझाए गए 5 प्रमुख बदलाव
प्रधानमंत्री को सौंपे गए पत्र में संगठन ने निम्नलिखित पांच मुख्य सुझाव और मांगें रखी हैं:
विकास और सुरक्षा का अलगाव: रियल एस्टेट सेक्टर के कमर्शियल प्रमोशन और विकास गतिविधियों को, घर खरीदारों की सुरक्षा और अधिकारों से जुड़े कानूनी ढांचे से अलग किया जाए ताकि दोनों के उद्देश्य आपस में न उलझें।
समर्पित कानून का गठन: RERA को एक नए और समर्पित ‘रियल एस्टेट होमबायर प्रोटेक्शन एक्ट’ (घर खरीदार सुरक्षा कानून) के रूप में फिर से तैयार कर लागू किया जाए, जिसका एकमात्र और मुख्य उद्देश्य उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा करना हो।
उपभोक्ता मंत्रालय के अधीन प्रशासन: इस नए और संशोधित कानून के प्रशासनिक नियंत्रण को ऐसे मंत्रालय के अधीन किया जाना चाहिए जिसका मुख्य फोकस उपभोक्ता सुरक्षा पर हो, जैसे कि केंद्र सरकार का ‘डिपार्टमेंट ऑफ कंज्यूमर अफेयर्स’ (उपभोक्ता मामले विभाग)।
जवाबदेही ढांचा (Accountability Framework): देश भर में रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटीज (नियामक प्राधिकरणों) के कामकाज में पारदर्शिता और तेजी लाने के लिए एक बेहद प्रभावी और सख्त जवाबदेही ढांचा तैयार किया जाए।
समय-सीमा आधारित एक्शन प्लान: आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय को यह निर्देश दिए जाएं कि वे FPCE द्वारा सौंपी गई रिपोर्ट की बारीकी से समीक्षा करें और एक निश्चित समय-सीमा के भीतर ठोस एक्शन प्लान तैयार करें।
रियल एस्टेट बाजार में पारदर्शिता की जरूरत
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सरकार इन सुझावों पर विचार करती है, तो देश भर के रियल एस्टेट बाजारों में मनमानी पर रोक लगेगी और खरीदारों का भरोसा मजबूत होगा। वर्तमान समय में कई राज्यों में खरीदार बिल्डरों द्वारा समय पर प्रोजेक्ट पूरा न करने और फंड के दुरुपयोग जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं। FPCE के इस कदम को घर खरीदारों के अधिकारों की लड़ाई में एक और बड़ा मोड़ माना जा रहा है।


