बिहार केसरी डॉ. श्रीकृष्ण सिंह (सिन्हा) को 139वीं जयंती पर जमशेदपुर के बागबेड़ा कॉलोनी में आयोजित एक कार्यक्रम में याद किया गया. आधुनिक बिहार के निर्माता और उनके अमर योगदान को समर्पित श्रद्धांजलि सभा में समाज में अहम योगदान करने वालों को सम्मानित भी किया गया. इस मौके पर श्री बाबू को ‘भारत रत्न’ देने के लिए हस्ताक्षर अभियान चलाने के प्रस्ताव भी आया है.
जमशेदपुर. झारखंड के जमशेदपुर अंतर्गत बागबेड़ा में श्री कृष्ण मेमोरियल संघ के तत्वावधान में आधुनिक बिहार के प्रणेता, महान जननेता और प्रथम मुख्यमंत्री ‘बिहार केसरी’ डॉ. श्रीकृष्ण सिंह (श्री बाबू) की 139वीं जयंती अत्यंत श्रद्धा, सम्मान और हर्षोल्लास के साथ मनाई गई। इस भव्य समारोह में बिहार और झारखंड के कई गणमान्य अतिथियों, शिक्षाविदों, समाजसेवियों तथा स्थानीय नागरिकों ने शिरकत कर उनके आदर्शों और विचारों को नमन किया। पूरा आयोजन श्रीकृष्ण बाबू के उस अतुलनीय योगदान को समर्पित रहा, जो उन्होंने देश और विशेष रूप से बिहार-झारखंड के निर्माण के लिए दिया था।
कार्यक्रम का संचालन वरिष्ठ शिक्षक भास्कर ने जबकि धन्यवाद पत्रकार मनीष ने किया. समारोह को सफल बनाने में मनोज कुमार मन्नू, संतोष ठाकुर, वीरेंद्र तिवारी, सुशील कुमार, चंदन, अजय, लखविंदर कुमार, राकेश, भोला झा, दीपू सिंह एवं जयकुमार सहित अन्य सदस्यों की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
‘श्रीकृष्ण सिंह सम्मान’ से नवाजे गये लोग
कार्यक्रम का शुभारंभ डॉ. श्रीकृष्ण सिंह की प्रतिमा पर माल्यार्पण और दीप प्रज्वलित कर किया गया। इस गरिमामयी समारोह में बिहार के खगड़िया जिले के परबत्ता विधानसभा क्षेत्र के विधायक श्री बाबूलाल शौर्य मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। वहीं, विशिष्ट अतिथि के रूप में पूर्व जिला परिषद उपाध्यक्ष राजकुमार सिंह और जमशेदपुर ब्रह्म ऋषि विकास मंच के अध्यक्ष सत्येंद्र कुमार शामिल हुए।
समारोह के दौरान शिक्षा और समाज सेवा के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाली कई प्रतिष्ठित विभूतियों को ‘श्रीकृष्ण सिंह सम्मान’ से मोमेंटो और शॉल भेंट कर सम्मानित किया गया। सम्मानित होने वाले प्रमुख शिक्षाविदों और समाजसेवियों में हरि बल्लभ सिंह आरसी, डीके मिश्रा, एसएस मिश्रा, अनिल शर्मा, केपी सिंह, देवेंद्र ठाकुर, पारस मिश्रा, प्रवीण सेठी, मंजू देवी (पुनीत जीवन संस्था) तथा सीएसपी सिंह (अनुग्रह नारायण सेवा संस्थान) शामिल रहे।
श्री बाबू के समाज में योगदान को किया याद
डॉ. श्रीकृष्ण सिंह केवल एक राजनेता नहीं थे, बल्कि वे आधुनिक बिहार के सच्चे वास्तुकार और मार्गदर्शक थे। जब देश स्वतंत्र हुआ और बिहार को एक मजबूत प्रशासनिक व सामाजिक ढांचे की आवश्यकता थी, तब श्री बाबू ने अपनी दूरदर्शिता, अटूट निष्ठा और जनसेवा के बल पर राज्य की नींव रखी।
सामाजिक न्याय और समानता: उन्होंने समाज के दबे-कुचले, शोषित और वंचित वर्गों के उत्थान के लिए ऐतिहासिक कदम उठाए। देवघर के बैद्यनाथ मंदिर में दलितों के प्रवेश का ऐतिहासिक निर्णय उनके सामाजिक सुधार और समतावादी सोच का सबसे बड़ा प्रमाण था।
औद्योगिक विकास: उनके कार्यकाल के दौरान ही बिहार (वर्तमान झारखंड सहित) में देश के प्रमुख औद्योगिक संस्थान जैसे टाटा स्टील, सिंदरी उर्वरक कारखाना, बोकारो स्टील प्लांट (प्रस्तावना व आधार), और बरौनी रिफाइनरी जैसी बड़ी परियोजनाओं की नींव पड़ी, जिसने पूरे क्षेत्र को आर्थिक समृद्धि दी।
शिक्षा का प्रसार: श्री बाबू का मानना था कि समाज का उत्थान शिक्षा के बिना असंभव है। उनके नेतृत्व में राज्यभर में शिक्षण संस्थानों का जाल बिछाया गया, जिससे आने वाली पीढ़ियों के लिए ज्ञान के द्वार खुले।
बिहारियों का गौरव और ‘भारत रत्न’ की मांग
मुख्य अतिथि विधायक बाबूलाल शौर्य ने अपने संबोधन में कहा कि श्रीकृष्ण बाबू के आदर्श आज भी समाज और युवा पीढ़ी के लिए सबसे बड़े प्रेरणास्रोत हैं। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि श्रीकृष्ण बाबू के महान योगदान को राष्ट्रीय स्तर पर विधिवत सम्मान मिलना चाहिए। इसके लिए उन्हें देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘भारत रत्न’ से सम्मानित किए जाने की मांग को लेकर एक व्यापक हस्ताक्षर अभियान चलाया जाना चाहिए, ताकि देश उनकी सेवाओं को चिरस्थायी रूप से याद रखे।

यह जयंती समारोह केवल एक श्रद्धांजलि सभा नहीं थी, बल्कि यह हर बिहारी के लिए अपने गौरवशाली अतीत से जुड़ने और बिहार तथा बिहारियों के देश के प्रति दिए गए अद्वितीय बलिदान व योगदान को पुनर्जीवित करने का अवसर था। कार्यक्रम के अंत में उपस्थित सैकड़ों लोगों ने श्रीकृष्ण बाबू के बताए मार्ग पर चलने और समाज कल्याण के उनके सपनों को साकार करने का संकल्प लिया।



