काेलकाता. पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर बड़ा भूचाल आ गया है. राज्य सरकार ने तृणमूल कांग्रेस (TMC) शासन के अंतिम पांच वर्षों यानी जनवरी 2021 से दिसंबर 2025 के बीच ऑफ़लाइन और ऑनलाइन माध्यम से जारी किए गए सभी जन्म प्रमाणपत्रों की वैधता की गहन जांच करने का बड़ा और कड़ा फैसला लिया है. राज्य सचिवालय के इस निर्देश के बाद प्रशासनिक अमले में हड़कंप मच गया है.
क्यों उठाया गया यह कदम?
राज्य सचिवालय की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, जन्म और मृत्यु प्रमाणपत्र जारी करने की प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं और धांधली के पुख्ता प्रमाण मिले हैं. विशेष तौर पर, मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान के दौरान कई ऐसे मामले सामने आए, जिनमें फर्जी जन्म प्रमाणपत्रों का इस्तेमाल किया गया था. इन गंभीर खुलासों के बाद ही सरकार ने पिछले पांच वर्षों के दौरान बने सभी जन्म प्रमाणपत्रों की प्रमाणिकता की परतें उधेड़ने का निर्णय लिया है.
बीडीओ और एसडीओ को सौंपी गई जिम्मेदारी
इस पूरी जांच प्रक्रिया को पारदर्शी और प्रभावी बनाने के लिए प्रशासन ने स्पष्ट जिम्मेदारियां तय कर दी हैं:
- ग्रामीण क्षेत्र: ग्रामीण इलाकों में जारी किए गए प्रमाणपत्रों की जांच की कमान बीडीओ (Block Development Officer) के हाथों में होगी.
- शहरी क्षेत्र: शहरी इलाकों की जिम्मेदारी एसडीओ (Sub-Divisional Officer) संभालेंगे.
आवश्यकता पड़ने पर ये अधिकारी विशेष जांच टीमों का गठन भी कर सकेंगे, बशर्ते इस टीम में डिप्टी मजिस्ट्रेट या डिप्टी कलेक्टर के पद से नीचे का कोई भी अधिकारी शामिल न किया जाए. इसके अलावा, विलंब से किए गए जन्म पंजीकरण (Delayed Birth Registration) मामलों की विशेष निगरानी और सूक्ष्म पड़ताल की जाएगी.
पोर्टल पर अपलोड करनी होगी रिपोर्ट
जांच अधिकारियों को यह सत्यापित करना होगा कि संबंधित प्रमाणपत्र असली है, फर्जी है या उसमें कोई त्रुटि है. साथ ही, यह भी जांचा जाएगा कि जिस अधिकारी ने प्रमाणपत्र जारी किया था, उसके पास ऐसा करने का वैधानिक अधिकार था या नहीं. जांच के दौरान कौन-कौन से दस्तावेजों को परखा गया और उनका परिणाम क्या रहा, इसकी पूरी रिपोर्ट जन्म-मृत्यु सूचना पोर्टल पर अनिवार्य रूप से अपलोड करनी होगी.
राज्य सरकार ने सभी संबंधित अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए हैं कि इस पूरी प्रक्रिया को सितंबर महीने के भीतर हर हाल में पूरा कर लिया जाए.
पहले ही बदले जा चुके हैं नियम
इससे पहले राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाते हुए यह स्पष्ट कर दिया था कि अब नगरपालिकाओं के अध्यक्ष और पंचायत प्रधान अपने स्तर पर जन्म या मृत्यु प्रमाणपत्र जारी नहीं कर सकेंगे. प्रमाणपत्र जारी करने का अधिकार केवल अधिकृत और जिम्मेदार सरकारी अधिकारियों के पास ही रहेगा. इस ताजा कार्रवाई से फर्जीवाड़े में लिप्त लोगों और बिचौलियों पर शिकंजा कसने की पूरी उम्मीद है.


