लखनऊ. उत्तर प्रदेश की पावन नगरी अयोध्या में शनिवार को संस्कृति, आस्था और विकास का एक अद्भुत संगम देखने को मिलेगा। रामकथा पार्क के मंच पर एक बार फिर त्रेतायुग का ऐतिहासिक प्रसंग जीवंत होगा, जब 14 वर्ष के वनवास के पश्चात प्रभु श्रीराम की अयोध्या वापसी का प्रतीकात्मक मंचन किया जाएगा। इस भव्य दीपोत्सव के अवसर पर देश के उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ रामलला के दरबार में हाजिरी लगाएंगे और प्रभु श्रीराम का राज्याभिषेक कर उनकी आरती उतारेंगे।
सरयू के 56 घाटों पर प्रज्वलित होंगे 30 लाख दीप
इस वर्ष का दीपोत्सव अपने पिछले सभी रिकॉर्ड तोड़ने के लिए तैयार है। मुख्य अतिथि उपराष्ट्रपति और मुख्यमंत्री राम मंदिर में दीप जलाकर इस दसवें दीपोत्सव का औपचारिक शुभारंभ करेंगे। इसके पश्चात, सरयू नदी के तट पर स्थित राम की पैड़ी सहित कुल 56 घाटों पर 30 लाख से अधिक भव्य दीप प्रज्वलित किए जाएंगे। दीपों की यह विशाल श्रृंखला पूरी दुनिया को अयोध्या की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और आध्यात्मिक वैभव का संदेश देगी। इस दौरान मुख्यमंत्री के साथ दोनों उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य, ब्रजेश पाठक और अन्य गणमान्य मंत्री भी उपस्थित रहेंगे।
पुष्पक विमान से आगमन और ड्रोन शो का आकर्षण
समारोह का मुख्य आकर्षण रामकथा पार्क में हेलीकाप्टर (प्रतीकात्मक पुष्पक विमान) से प्रभु श्रीराम, माता जानकी और लक्ष्मण का उतरना होगा, जहाँ उनकी अगवानी स्वयं मुख्यमंत्री और उपराष्ट्रपति करेंगे। इसके साथ ही, आसमान में 2100 स्वदेशी ड्रोन के माध्यम से रामायण काल के विभिन्न प्रसंगों का सजीव और मनमोहक चित्रण किया जाएगा। रामकथा पार्क के समीप 220 टन बालू से तैयार विशाल ‘राम दरबार’ की प्रतिकृति भी देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए मुख्य आकर्षण का केंद्र बनी हुई है।
सांस्कृतिक प्रस्तुतियां और परंपराओं का अनूठा मेल
रामायणकालीन प्रसंगों पर सजी 21 मनमोहक झांकियां इस दीपोत्सव की शोभा को और बढ़ाएंगी, जो सांस्कृतिक गौरव के साथ-साथ प्रदेश के विकास की झलक भी पेश करेंगी। खास बात यह है कि इस बार के दीपोत्सव में 151 वर्ष पुरानी ऐतिहासिक साहबगंज रामलीला का भी पहली बार मंचन किया जाएगा, जिसमें स्थानीय कलाकारों के साथ-साथ देश-विदेश के कलाकार अपनी कला का प्रदर्शन करेंगे। सरयू तट पर 2147 महिलाएं और बटुक पीत वस्त्र धारण कर विधि-विधान से मां सरयू की आरती करेंगे।
योगी सरकार के इन विशेष प्रयासों के चलते अयोध्या का दीपोत्सव अब केवल एक स्थानीय पर्व न रहकर वैश्विक पटल पर आस्था और सांस्कृतिक स्वाभिमान का एक बड़ा प्रतीक बन चुका है, जिससे न सिर्फ पर्यटन को बढ़ावा मिल रहा है बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी सृजित हो रहे हैं।


