चक्रधरपुर/झारखंड. भारतीय रेलवे एक तरफ जहां अपनी सेवाओं को हाई-टेक करने और यात्री सुविधाओं को बेहतर बनाने के बड़े-बड़े दावे करती है, वहीं दूसरी तरफ जमीनी हकीकत इन दावों की पोल खोलती नजर आ रही है. ट्रेनों के भीतर यात्रियों, खासकर महिलाओं की सुरक्षा और रेल कर्मचारियों की मनमानी को रोकने के लिए रेलवे का सख्त प्रशासनिक ढांचा पूरी तरह नाकाम साबित हो रहा है.
इसका ताजा उदाहरण चक्रधरपुर रेल मंडल में देखने को मिला है, जहां एलेप्पी-धनबाद एक्सप्रेस (ट्रेन नंबर 13352) में ऑन-ड्यूटी टीटीई द्वारा महिला यात्री से अभद्रता करने और रिश्वत मांगने का गंभीर मामला सामने आया है.
यह पूरी घटना बीते 27 अगस्त की है. मिली जानकारी के अनुसार, ट्रेन के सेकेंड एसी कोच में चेकिंग के दौरान चक्रधरपुर रेल मंडल में तैनात टीटीई एस मुंशी ने एक महिला यात्री के साथ न सिर्फ बदतमीजी की, बल्कि उससे पैसों (रिश्वत) की भी मांग की. सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि घटना के वक्त ट्रेन में रेलवे का कोई ऐसा त्वरित तंत्र या निगरानी दल सक्रिय नहीं था जो मौके पर महिला यात्री को सुरक्षा या सहायता प्रदान कर पाता.
जब पीड़ित पक्ष को रेलवे के आंतरिक सिस्टम से कोई मदद नहीं मिली, तब जाकर यात्री नवीन चंद्र ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव और वरिष्ठ अधिकारियों को टैग करते हुए अपनी आवाज उठाई. सोशल मीडिया पर शिकायत वायरल होने और चौतरफा फजीहत झेलने के बाद ही रेल प्रशासन की नींद टूटी.
इस घटना ने रेलवे के प्रशिक्षण और आंतरिक विजिलेंस (निगरानी) सिस्टम पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. सवाल यह उठता है कि क्या ट्रेन में टिकट चेकिंग के नाम पर कर्मचारियों को यात्रियों की गरिमा से खिलवाड़ करने की छूट मिली हुई है? यात्रियों का कहना है कि चेकिंग करना टीटीई का अधिकार हो सकता है, लेकिन यात्री सुरक्षा और सम्मान बनाए रखना रेलवे की प्राथमिक जिम्मेदारी है, जिसमें वह लगातार विफल हो रही है.

मामले के तूल पकड़ने पर सीनियर डीसीएम आदित्य चौधरी ने बयान जारी कर जांच के आदेश दिए हैं और आरोपी के खिलाफ कानूनी व विभागीय कार्रवाई की बात कही है. लेकिन सवाल वही कायम है कि आखिर ऐसी घटनाएं होने ही क्यों दी जाती हैं?
क्या रेलवे का प्रशासनिक अमला सिर्फ घटना घटने और सोशल मीडिया पर मामला वायरल होने के बाद ही जागेगा? यह घटना साफ दर्शाती है कि ट्रेनों में कर्मचारियों की मनमानी रोकने और यात्रियों को सुरक्षित माहौल देने में रेल प्रशासन पूरी तरह विफल रहा है.




