कांग्रेस को मिलने वाले 20,000 रुपये से अधिक के चंदे में बीते साल 75 फीसदी तक गिरावट दर्ज की गई है। पिछले तीन वर्षों के दौरान यह सबसे कम चंदा है, जो 130.7 करोड़ रुपये पर सिमट गया है। वहीं आम आदमी पार्टी (आप) को मिले चंदा में 68 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। उसे कुल 12.10 करोड़ का चंदा मिला है।
नई दिल्ली. भारतीय राजनीतिक गलियारों में उस समय सरगर्मी तेज हो गई है जब कांग्रेस पार्टी के वित्त पोषण (Funding) को लेकर एक चौंकाने वाला आंकड़ा सामने आया है। चुनाव आयोग को सौंपी गई ताज़ा योगदान रिपोर्ट के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2025-26 में कांग्रेस को मिलने वाले 20,000 रुपये से अधिक के चंदे में भारी भरकम 75 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है। यह गिरावट राजनीतिक विश्लेषकों के बीच चर्चा का मुख्य विषय बन गई है, क्योंकि पार्टी के इतिहास में पिछले तीन वर्षों के दौरान यह सबसे कम चंदा है, जो केवल 130.7 करोड़ रुपये पर सिमट कर रह गया है।
वहीं आम आदमी पार्टी (आप) को वित्त वर्ष 2025-26 में मिले चंदे में पिछले वित्त वर्ष की तुलना में 68 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। पार्टी ने चुनाव आयोग को दी योगदान रिपोर्ट में कुल 12.10 करोड़ रुपये का चंदा मिलने की जानकारी दी है। इसमें करीब 83 प्रतिशत राशि प्रूडेंट इलेक्टोरल ट्रस्ट और ट्राइडेंट लिमिटेड से मिली है। रिपोर्ट के अनुसार, प्रूडेंट इलेक्टोरल ट्रस्ट और ट्राइडेंट लिमिटेड ने आप को पांच-पांच करोड़ रुपये दिए। शेष करीब 2.10 करोड़ रुपये अन्य दानदाताओं से मिले।
फंड में भारी कमी और वित्तीय आंकड़ों का सच
चुनाव आयोग को दी गई रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले वित्तीय वर्ष यानी 2024-25 में कांग्रेस पार्टी को कुल 517.4 करोड़ रुपये का भारी-भरकम योगदान मिला था। लेकिन, इस बार यह आंकड़ा घटकर मात्र 130.7 करोड़ रुपये रह गया है, जो पिछली बार का महज एक-चौथाई हिस्सा है। गौर करने वाली बात यह है कि 2024-25 का साल लोकसभा चुनाव का था, जिसके चलते राजनीतिक दलों को मिलने वाले चंदे में बढ़ोतरी होना स्वाभाविक माना जाता है। हालांकि, मौजूदा वर्ष के आंकड़े न सिर्फ चुनावी वर्ष से बल्कि सामान्य वित्तीय वर्ष 2023-24 की तुलना में भी करीब 53 प्रतिशत कम हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह स्थिति पार्टी के संगठनात्मक और चुनावी प्रबंधन के लिए एक बड़ी चुनौती बन सकती है।
कॉरपोरेट फंडिंग और इलेक्टोरल ट्रस्ट पर असर
इस वित्तीय गिरावट के पीछे कॉरपोरेट घरानों और इलेक्टोरल ट्रस्ट्स के रुख में आया बदलाव एक मुख्य कारण माना जा रहा है। मुख्य रूप से कॉरपोरेट चंदा पहुंचाने वाले एकमात्र ‘प्रूडेंट इलेक्टोरल ट्रस्ट’ ने इस बार कांग्रेस को कुल चंदे का केवल 19 प्रतिशत हिस्सा यानी 25 करोड़ रुपये ही दिए हैं। तुलनात्मक रूप से देखा जाए तो पिछले साल इसी ट्रस्ट ने पार्टी को 216 करोड़ रुपये दिए थे, जो इस बार के मुकाबले करीब 11.5 प्रतिशत ही रह गया है। इसके अलावा, अन्य बड़े दानदाताओं में स्टार सीमेंट लिमिटेड ने 5 करोड़, सज्जन भजनका ने 4 करोड़, और अफनान कंस्ट्रक्शंस ने 3 करोड़ रुपये का योगदान दिया है। दिलचस्प बात यह है कि एक करोड़ रुपये या उससे अधिक के केवल नौ बड़े योगदानों से ही कुल 43 करोड़ रुपये आए हैं, जो कुल चंदे का लगभग एक-तिहाई हिस्सा है।
चुनावी तैयारियों पर पड़ सकता है प्रभाव
यह आर्थिक गिरावट ऐसे समय में आई है जब देश के विभिन्न राज्यों में राजनीतिक गतिविधियां चरम पर हैं। इस अवधि के दौरान बिहार विधानसभा चुनाव संपन्न हुए हैं और इसके साथ ही कई अन्य महत्वपूर्ण राज्यों के आगामी चुनावों की राजनीतिक सरगर्मी तेज हो चुकी है। ऐसे में, संसाधनों और चुनावी फंड की इस बड़ी कमी से निपटने के लिए कांग्रेस नेतृत्व को अपनी रणनीतियों पर नए सिरे से विचार करना पड़ सकता है। राजनीतिक दलों के लिए यह आर्थिक संकट आने वाले दिनों में और अधिक चर्चा का विषय बन सकता है।


