झारखंड की प्रतिष्ठित JPSC-JSSC Scam में नया खुलासा सामने आया है। बताया जाता है कि नामजद अभियुक्त सुरेश राय के बोकारो जिले के दुग्धा स्थित आवास पर परीक्षा से पहले 30 अभ्यर्थियों को पेपर रटवाया गया था. उसी दिन पिता-पुत्र के खातों में पहुंचे 19 लाख रुपये आये थे।
रांची. प्रतियोगी परीक्षाओं में बड़े पैमाने पर धांधली का मामला सामने आने के बाद प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मच गया है। झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की 14वीं सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC-CGL) की परीक्षाओं में सेंधमारी को लेकर अदालत ने बेहद कड़ा रुख अख्तियार किया है। रांची के अपर न्यायायुक्त योगेश कुमार की अदालत में चल रही सुनवाई के दौरान ऐसे सनसनीखेज खुलासे हुए हैं, जिन्होंने चयन प्रणाली की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
प्रश्न-उत्तर रटवाने का काला खेल और खातों का कच्चा चिट्ठा
जांच एजेंसियों के मुताबिक, इस फर्जीवाड़े के तार दूर-दूर तक फैले हैं। जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा गड़बड़ी मामले में नामजद अभियुक्त सुरेश राय पर गंभीर आरोप है कि उसने बोकारो जिले के दुग्धा स्थित अपने आवास पर 30 से अधिक परीक्षार्थियों को परीक्षा से पहले ही प्रश्न और उत्तर रटवाए थे। इस अवैध नेटवर्क की वित्तीय परतों को टटोलने पर चौंकाने वाले तथ्य हाथ लगे हैं। जांच में पता चला है कि 22 जनवरी को मुख्य आरोपी सुरेश राय के बैंक खाते में 14 लाख रुपये ट्रांसफर किए गए थे, जबकि ठीक उसी दिन उसके बेटे उमेश राय के खाते में भी 5 लाख रुपये जमा हुए थे। सीआईडी ने इस मामले में मुख्य आरोपियों और उनके सहयोगियों को पहले ही गिरफ्तार कर सलाखों के पीछे भेज दिया है।
न्यायालय की सख्ती और आगे की कार्रवाई
दूसरी ओर, जेपीएससी 14वीं सिविल सेवा पीटी परीक्षा के फर्जीवाड़े में जेल में बंद आरोपियों की जमानत याचिकाओं पर अदालत ने कड़ा संदेश दिया है। अदालत ने सीआईडी से केस डायरी तलब की है, ताकि इस पूरे षड्यंत्र की गहराई तक पहुंच जा सके। आरोपियों के तार कथित तौर पर मास्टरमाइंड अभय तिवारी के सिंडिकेट से जुड़े बताए जा रहे हैं। अदालत ने सभी पक्षों को सुनने के बाद अलग-अलग तिथियों (10 और 25 नवंबर) पर अगली सुनवाई तय की है।
इस बड़े खुलासे ने उन लाखों युवाओं के अरमानों को गहरी ठेस पहुंचाई है जो दिन-रात एक कर पूरी ईमानदारी से इन परीक्षाओं की तैयारी करते हैं। बहरहाल, अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि अदालत और जांच एजेंसियां इस परीक्षा माफिया के नेटवर्क को कितनी गहराई से तहस-नहस करती हैं।


