जमशेदपुर महिला विश्वविद्यालय में प्रशासनिक मनमानी और कर्मचारियों के अधिकारों के हनन का आरोप झारखंड राज्य अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ ने लगाया है. महासंघ ने प्रशासनिक पदों पर नियुक्तियों और लंबे समय से जमे अधिकारियों के कार्यकाल की उच्च स्तरीय जांच की मांग उठायी है.
रांची/जमशेदपुर. झारखंड राज्य अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ ने जमशेदपुर महिला विश्वविद्यालय की कार्यशैली, प्रशासनिक मनमानी और कर्मचारियों के सेवा संबंधी अधिकारों के हनन पर गंभीर चिंता जतायी है। महासंघ के नेताओं का कहना है कि बुधवार को उन्होंने वीसी और रजिस्ट्रार से मिलकर वार्ता का अनुरोध किया था। इस पर सहमति बनन के बावजूद विवि पहुंचाने पर दोनों पदाधिकारियों से वार्ता नहीं हो सकी। इसके बाद महासंघ ने राज्यपाल को पत्र भेजकर विश्वविद्यालय प्रशासन पर कई गंभीर आरोप लगाते हुए तत्काल हस्तक्षेप करने का अनुरोध किया है.
विश्वविद्यालय पर नियमों की अनदेखी का आरोप
जमशेदपुर महिला विश्वविद्यालय में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के दिशा-निर्देशों, राज्य विश्वविद्यालय अधिनियम तथा परिनियम (Statutes) के प्रावधानों की लगातार अवहेलना की जा रही है।
निश्चित और चक्रीय कार्यकाल का उल्लंघन: नियमों के अनुसार डीन (Dean), कुलानुशासक (Proctor), विभागाध्यक्ष (HOD) और विभिन्न समितियों के निदेशकों जैसे प्रशासनिक पदों का कार्यकाल निश्चित एवं चक्रीय (Rotational Tenure) होना चाहिए, ताकि सत्ता का विकेंद्रीकरण बना रहे और योग्य एवं वरिष्ठ प्राध्यापकों को समान अवसर मिल सकें।
चहेतों का कब्जा: महासंघ का आरोप है कि विश्वविद्यालय प्रशासन (कुलपति एवं कुलसचिव) द्वारा इन वैधानिक नियमों को ताक पर रखकर कुछ चुनिंदा और कृपापात्र प्राध्यापकों को ही इन पदों पर लंबे समय से बैठा रखा गया है, जिससे अन्य योग्य शिक्षकों में असंतोष व्याप्त है।
कर्मचारियों के सेवा संबंधी अधिकारों का हनन : रवींद्र

महासंघ के स्टेट प्रेसिडेंट रवींद्रनाथ ठाकुर के अनुसार विश्वविद्यालय प्रबंधन कर्मचारियों के सेवा संबंधी अधिकारों की रक्षा के प्रति प्रशासन उदासीन बना हुआ है। कर्मचारियों की समस्याओं के समाधान और संवाद के लिए निर्धारित वार्ताओं में भी महासंघ के प्रतिनिधियों के साथ उचित व्यवहार नहीं किया गया। प्रशासनिक स्तर पर तानाशाही रवैया अपनाने और संवादहीनता की स्थिति पैदा होने से शैक्षणिक व प्रशासनिक व्यवस्था पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।
महासंघ की प्रमुख मांगें:
उच्च स्तरीय जांच: जमशेदपुर महिला विश्वविद्यालय में प्रशासनिक पदों पर मनमाने ढंग से हो रही नियुक्तियों और लंबे समय से जमे अधिकारियों के कार्यकाल की उच्च स्तरीय जाँच कराई जाए।
रोटेशनल प्रणाली की सख्ती से पालना: UGC और विश्वविद्यालय अधिनियम के प्रावधानों के अनुरूप सभी प्रशासनिक पदों पर चक्रीय आधार पर योग्य शिक्षकों की नियुक्ति सुनिश्चित की जाए।
कर्मचारियों के अधिकार और सम्मान की सुरक्षा: कर्मचारियों के सेवा-शर्तों और अधिकारों का हनन रोकने के साथ-साथ महासंघ के प्रतिनिधियों के साथ सम्मानजनक संवाद स्थापित किया जाए।
झारखंड राज्य अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ के राज्य अध्यक्ष रवींद्र नाथ ठाकुर एवं महासचिव वीरेंद्र कुमार यादव ने राज्यपाल से पूरे मामले को संवेदनशील बताते हुए संज्ञान लेने और प्रतिष्ठित महिला विश्वविद्यालय की शैक्षणिक और प्रशासनिक गरिमा को बचाने के लिए पहल करने की अपील की है.


