पटना. बिहार की राजधानी पटना के फुलवारीशरीफ थाने में कानून के रखवालों की ही कानून से खिलवाड़ करने वाली एक बेहद शर्मनाक करतूत सामने आई है। मादक पदार्थों की तस्करी के एक गंभीर मामले में संलिप्तता और पकड़े गए तस्करों को छोड़ने के एवज में 11 लाख रुपये की मोटी डील करने वाले आठ पुलिसकर्मियों पर गाज गिरी है। इस हाई-प्रोफाइल भ्रष्टाचार के खुलासे ने एक बार फिर महकमे की कार्यप्रणाली और पुलिस और अपराधियों के बीच साठगांठ पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
क्या है पूरा मामला?
यह पूरा वाकया 26 अक्टूबर का है, जब फुलवारीशरीफ पुलिस ने एक गुप्त सूचना के आधार पर मादक पदार्थों की खरीद-बिक्री के खिलाफ एक बड़ी छापेमारी की थी। इस दौरान पुलिस ने नया टोला पठान टोली के रहने वाले आकिब खान उर्फ मोहम्मद साकिब खान को प्रतिबंधित मादक पदार्थ (स्मैक) के साथ धर दबोचा था और उसे जेल भेज दिया गया था।
पुलिस ने इस सिलसिले में एनडीपीएस एक्ट और आर्म्स एक्ट के तहत मामला (फुलवारीशरीफ थाना कांड संख्या 1867/26) दर्ज किया। हालांकि, असली खेल इसके परदे के पीछे शुरू हुआ। छापेमारी के दौरान फार्म मालिक मो. आफताब आलम और मोहम्मद एहसान को भी पुलिस मौके से पकड़कर थाने लाई थी, जहां से मादक पदार्थों की बरामदगी हुई थी। लेकिन इन दोनों को आधिकारिक प्राथमिकी में शामिल नहीं किया गया और न ही इसकी भनक वरीय अधिकारियों को दी गई।
रुपयों के बंटवारे के विवाद से खुला राज
जांच में यह बात सामने आई कि थाने की छापेमारी टीम में शामिल पुलिसकर्मियों ने तस्करों के साथ सांठगांठ कर उन्हें मोटी रकम लेकर गुप्त रूप से छोड़ दिया। तस्करों को बचाने के लिए यह पूरी सौदाबाजी 11 लाख रुपये में तय हुई थी, जिसका भुगतान अलग-अलग माध्यमों से किया गया।
कहानी में ट्विस्ट तब आया जब इस अवैध रूप से वसूली गई भारी-भरकम रकम के आपसी बंटवारे को लेकर पुलिसकर्मियों के बीच ही कहासुनी और विवाद छिड़ गया। बात इतनी बढ़ गई कि रुपये देने वाले पक्ष से भी उनका झगड़ा हो गया, जिसके बाद यह सनसनीखेज मामला सीधे वरीय पुलिस अधिकारियों तक पहुंच गया।
सख्त प्रशासनिक कार्रवाई
मामले की गंभीरता को देखते हुए एसएसपी कार्तिकेय शर्मा ने फुलवारीशरीफ एएसपी को इसकी संपूर्ण जांच सौंपी। नगर पुलिस अधीक्षक चंद्र प्रकाश ने बताया कि जांच में 11 लाख रुपये की डील का यह काला सच पूरी तरह सही पाया गया। इसके आधार पर त्वरित कार्रवाई करते हुए फुलवारीशरीफ थाने के आठ पुलिस पदाधिकारियों और कर्मियों, एसआई दिवाकर प्रसाद, नारद मुनि सिंह, रितेश कुमार, परिचारी एसआई आकाश कुमार, एसआई पवन कुमार, पीटीसी साबिर आलम, सिपाही आनंद राज और सिपाही शुभम कुमार को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।
इसके साथ ही, सभी आरोपित पुलिसकर्मियों के खिलाफ थाने में प्राथमिकी दर्ज कर विभागीय जांच भी शुरू कर दी गई है। वहीं, मामले में संलिप्त पाए गए फार्म मालिक मोहम्मद आफताब आलम, मोहम्मद एहसान और कथित तौर पर यह सौदा कराने वाले स्थानीय शख्स मुकर्रम उर्फ कमरुद्दीन को भी पुलिस ने हिरासत में लेकर पूछताछ तेज कर दी है। इस सख्त कार्रवाई ने महकमे में हड़कंप मचा दिया है।


