इंदौर. भारतीय सर्राफा बाजार और आभूषण उद्योग से एक बेहद चौंकाने वाली और चिंताजनक खबर सामने आ रही है। इंदौर में सोने में मिलावट का एक ऐसा नया और उन्नत तरीका सामने आया है, जिसने सुनारों और व्यापारियों की नींद उड़ा दी है। शातिर लोग अब सोने में रुथेनियम, इरिडियम और आस्मियम जैसी भारी और महंगी धातुओं का बहुत ही महीन पाउडर मिलाकर उसका वजन बढ़ा रहे हैं। इस मिलावटी सोने को बाजार में ‘गोल्ड पाउडर’ के रूप में खपाया जा रहा है, जिसकी लागत असली सोने की कीमत से करीब दस प्रतिशत तक कम बैठती है।
इस नए प्रकार की मिलावट की सबसे बड़ी समस्या यह है कि यह पारंपरिक जांच के तमाम पैमानों पर खरी उतर जाती है। मिलावट वाला यह सोना देखने में बिल्कुल असली सोने जैसा ही प्रतीत होता है। सामान्य एसिड टेस्ट (Acid Test) और पारंपरिक कसौटी पर परखने पर भी इस धोखे को पकड़ पाना बेहद मुश्किल साबित हो रहा है। यही वजह है कि ज्वैलर्स आसानी से इसकी पहचान नहीं कर पा रहे हैं। इस गड़बड़ी का खुलासा तब हो रहा है जब कारीगर गहने बनाने के लिए सोने को भट्टी में गलाते हैं और प्रसंस्करण के दौरान उसमें से वास्तविक सोने की मात्रा काफी कम निकलती है।
चीन से कनेक्शन और आधुनिक जांच की जरूरत
सूत्रों और जानकारों के अनुसार, यह गोल्ड पाउडर मुख्य रूप से महाराष्ट्र और बंगाल के रास्तों से बाजारों तक पहुंच रहा है, और इसके पीछे चीन से जुड़ी तकनीक या सिंडिकेट की आशंका जताई जा रही है। चूँकि इन भारी धातुओं का घनत्व सोने से अधिक होता है, इसलिए इनकी थोड़ी सी मात्रा मिलाने पर भी वजन में बड़ा अंतर आ जाता है। पुरानी कैरेट जांच मशीनें भी इस तरह की सूक्ष्म मिलावट को पकड़ने में असमर्थ हैं। इस समस्या से निपटने के लिए अब सराफा कारोबारियों को एक्स-रे फ्लोरेसेंस (XRF) और इलेक्ट्रान माइक्रोस्कोपी जैसी अत्याधुनिक तकनीकों का सहारा लेना पड़ रहा है।
व्यापारी संघ की आपात बैठक में सख्त निर्देश
इस गंभीर मामले के सामने आने के बाद इंदौर सराफा में हड़कंप मच गया है। कारीगरों द्वारा की गई शिकायतों का संज्ञान लेते हुए इंदौर चांदी-सोना-जवाहरात व्यापारी एसोसिएशन ने एक आपात बैठक बुलाई। बैठक में यह कड़ा निर्णय लिया गया है कि भविष्य में केवल 99.50 प्रतिशत शुद्धता वाले प्रमाणित सोने के कारोबार को ही मान्यता दी जाएगी। साथ ही, यदि किसी भी स्तर पर मिलावट की शिकायत पाई जाती है, तो संबंधित कारोबारी के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करने के साथ-साथ व्यापारिक प्रतिबंध भी लगाए जाएंगे ताकि ग्राहकों का भरोसा और बाजार की साख बनी रहे।


